Loan Moratorium: आपने नहीं लिया लोन मोरेटोरियम का लाभ? अब बैंक की तरफ से मिलेगा Cashback

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Loan Moratorium के दौरान ब्याज पर ब्याज की माफी को लेकर वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की तरफ से गाइडलाइंस जारी कर दी गई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन्होंने इस दौरान लोन मोरेटोरियम का लाभ नहीं उठाया है, उन्हें अनुग्रह राशि या कैशबैक दी जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 1:51 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने बीते शुक्रवार को ब्याज पर ब्याज माफी के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है. ब्याज पर यह छूट 2 करोड़ रुपये तक के उन लोन पर मिलेगा, जिन्होंने मार्च से अगस्त के बीच लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) का लाभ उठाया है. साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन्होंने इस दौरान लोन मोरेटोरियम का लाभ नहीं उठाया है, उन्हें अनुग्रह राशि (Ex Gratia) या कैशबैक दी जाएगी. यह भुगतान 2 करोड़ रुपये तक के लोन लेने वाले छोटे उद्यमी या व्यक्तियों को दिया जाएगा.

वित्त मंत्रालय ने उधारकर्ताओं को दी नई योजना की जानकारी
वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने शुक्रवार को RBI द्वारा रेगुलेट किए जाने वाले सभी उधारकर्ताओं से कहा कि सरकार ने इस संबंध में एक योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का नाम 'लोन खातों में उधारकर्ताओं को छह महीने के लिए साधारण ब्याज के बीच अंतर के भूतपूर्व भुगतान के अनुदान के लिए योजना' रखा है. यह छूट 1 मार्च 2020 से लेकर 31 अगस्त 2020 के बीच ब्याज पर मिलेगी.

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इन उधारकर्ताओं में बैंक, सहकारी बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) और माइक्रोफाइनेंस संस्थान शामिल हैं. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) ने केंद्र को RBI की तरफ से कर्ज लौटाने को लेकर दी गयी मोहलत के तहत 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज छूट योजना को जल्द- से -जल्द लागू करने का निर्देश दिया था. उसके बाद यह दिशानिर्देश आया है.



क्या है गाइडलाइंस?
यह लाभ एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 की अवधि के लिये है. इसके अनुसार जिन कर्जदारों के ऊपर 29 फरवरी तक कुल ऋण 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे योजना का लाभ उठाने के लिये पात्र होंगे. इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन कर्ज, MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), टिकाऊ उपभोक्ता सामन के लिये लिया गया कर्ज और खपत के लिये लिया ऋण आएगा.

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वित्तीय संस्थान संबंधित कर्जदार के खाते में रकम डालकर उसके भुगतान के लिये केंद्र सरकार से दावा करेंगे. सूत्रों के अनुसार सरकारी खजाने पर इस योजना के क्रियान्वयन में 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
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