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Loan Moratorium Case: सुप्रीम कोर्ट में आज होगी ‘ब्याज पर ब्याज’ मामले पर सुनवाई

लोन मोरेटोरियम मामले में आज होगी सुनवाई
लोन मोरेटोरियम मामले में आज होगी सुनवाई

Loan Moratorium Case: सुप्रीम कोर्ट में बैंकों द्वारा कर्जदारों से ब्याज पर ब्याज की वसूली पर रोक का आग्रह करने वाली विभिन्न याचिकओं पर आज सुनवाई होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 8, 2020, 8:25 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बैंकों द्वारा कर्जदारों से 'ब्याज पर ब्याज' की वसूली (Loan Moratorium) पर रोक का आग्रह करने वाली विभिन्न याचिकओं पर आज सुनवाई होगी. इससे पहले इस मामले पर सुनवाई 02 दिसंबर को हुई थी. बता दें कि जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही है. वहीं याचिकाकर्ता की ओर से लगातार ब्याज में राहत की मांग की जा रही है. याचिकाकर्ता का कहना है कि कोरोना के कारण लोगों के क्रेडिट स्कोर पर काफी असर पड़ा है. ऐसे में ब्याज पर राहत दिए जाने की दरकार है.

2 दिसंबर को हुई थी SC में सुनवाई
इससे पहले 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऋण स्थगन अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. जिसके बाद इस मामले में जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच ने 3 दिसंबर को सुनवाई फिर से शुरू की. बता दें कि रिजर्व बैंक द्वारा कोविड 19 महामारी के मद्देनजर ऋण की किस्तों के भुगतान पर रोक की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. बैंकों ने इस सुविधा का लाभ लेने वाले ग्राहकों से ऋण की मासिक किस्तों (ईएमआई) के ब्याज पर ब्याज वसूला है, जिसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई है.

कोरोना संकट के मद्देनजर कर्जधारकों को बैंक से लिए दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर 31 अगस्त तक किस्त चुकाने की बाध्यता से राहत दी गई थी. अवधि की समाप्ति के बाद बैंकों द्वारा कर्जधारकों से छूट की अवधि के ब्याज पर ब्याज वसूले के मामले को सुप्रीम कोर्ट देख रहा है.
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क्या है पूरा मामला
बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों की आमदनी में आई कमी के मद्देनजर इस साल मार्च से अगस्त तक मोरेटोरियम योजना लागू की गई थी. इसके तहत लोगों को बैंक लोन पर बकाया किश्त टालने की छूट दी गई थी. योजना का लाभ लेने वालों की शिकायत थी कि अब बैंक बकाया राशि पर अतिरिक्त ब्याज लगा रहे हैं, जो कि सही नहीं है.



इस मामले पर कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा था. इसके बाद सरकार ने 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए ब्याज के ऊपर ब्याज न लगाने का फैसला लिया. इसमें 2 करोड़ रुपये तक के लघु और मध्यम दर्जे के व्यापार के लोन, एजुकेशन लोन, होम लोन, उपभोक्ता सामग्री के लिए लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कार-टू व्हीलर लोन और पर्सनल लोन को शामिल किया गया.
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