लोन मोरेटोरियम मामला : सरकार के हलफनामे से संतुष्ट नहीं SC, 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

Loan Moratorium Case : आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और RBI द्वारा दायर किए गए हलफनामे को संतोषजनक नहीं बताया. अब 13 अक्टूबर तक फिर से हलफनामा दायर करना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 1:20 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. लोन मोरेटोरियम मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है. मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने केंद्र सरकार और RBI को फिर से हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. कोर्ट ने कहा कि 'ब्याज पर ब्याज' माफी को लेकर केंद्र द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा संतोषजनक नहीं है. अब RBI और केंद्र को इसे रिवाइज करने के बाद दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय है. पहले दाखिल किए गए हलफनामे में केंद्र सरकार ने 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर 'ब्याज पर ब्याज' माफ करने को कहा था. इसका बोझ खुद केंद्र सरकार उठाएगी, जोकि अनुमानित तौर पर 5,000 से 7,000 करोड़ रुपये होगा.

रियल एस्टेट और बिजली उत्पादकों को भी दें राहत
आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार से कहा गया कि वो रियल एस्टेट (Real Estate) और बिजली उत्पादकों (Power Producers) को भी इसके दायरे में लाएं. कोर्ट ने सरकार से कहा कि फैसले के ऐलान के बाद केंद्र या RBI की तरफ से 'कोई परिणामी आदेश या सकुर्लर' नहीं जारी किया गया. बता दें कि रियल एस्टेट डेवलपर्स (Real Estate Developers) ने भी कुछ दिन पहले ही सरकार के प्लान के तहत ब्याज पर ब्याज माफी की मांग की ​थी.

केंद्र ने ब्याज से इन्हें राहत देने की बात कही
बीते शुक्रवार को केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर कर बताया था कि वो छोटे कारोबार, शिक्षा, हाउसिंग और क्रेडिट कार्ड समेत कुछ लोन्स के लिए मोरेटोरियम की अवधि के दौरान लगने वाले ब्याज पर ब्याज को माफ करेगी.



यह भी पढ़ें:-  एक छोटे हार्डवेयर की वजह से बंद करना पड़ा 6 लाख करोड़ डॉलर का कारोबार, जानिए क्या है पूरा मामला

रियल एस्टेट सेक्टर को सरकार से कोई राहत नहीं
रियल एस्टेट बॉडी CREDAI की तरफ से बात रखने वाले कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) ने कहा, 'सरकार के हलफनामे में बहुत से तथ्य एवं आंकड़े निराधार हैं.' उन्होंने कहा कि सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए ताकि वो इस बारे में विस्तृत जानकारी दे सके. क्रेडाई की तरफ से आर्यमा सुंदरम (Aryama Sundaram) ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर को सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं दी गई है. इस सेक्टर को लोन रिस्ट्रक्चरिंग की भी सुविधा नहीं दी गई है. 1 सितंबर 2020 से पूरा ब्याज देना पड़ रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज