Loan Moratorium- ब्याज पर लगने वाले ब्याज मामला, मिलेगी आम आदमी को राहत? बुधवार सुबह 10:30 बजे होगी SC में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India)

Supreme Court Hearing on Loan Moratorium: सुप्रीम कोर्ट में अब लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई बुधवार (14 अक्टूबर 2020) को सुबह 10:30 बजे को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार को कहा था कि 'ब्याज पर ब्याज' माफी को लेकर केंद्र द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा संतोषजनक नहीं है.

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    नई दिल्ली. कोरोना काल में आम आदमी को राहत देने वाले ब्याज पर लगने वाले ब्याज (Loan Moratorium) मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में सुनवाई कल तक के लिए टल गई है. अब कोर्ट बुधवार यानी 14 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई करेगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'ब्याज पर ब्याज' माफी को लेकर केंद्र द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा संतोषजनक नहीं है. अब कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने को कहा है. पहले दाखिल किए गए हलफनामे में केंद्र सरकार ने 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर 'ब्याज पर ब्याज' माफ करने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि ब्याज पर जो राहत देने की बात की गई है, उसके लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किसी तरह का दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया. इसलिए न्यायालय में एक हफ्ते के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के लिए नया हलफनामा दायर किया जाए.



    सरकार ने कहा- और राहत देना अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक- दो दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि 'नीति बनाना केंद्र सरकार का काम है और कोर्ट को विशेष सेक्टर्स के आधार पर वित्तीय राहत देने के मामले में नहीं पड़ना चाहिए.

    केंद्रीय बैंक ने कहा कि 2 करोड़ तक के लोन के लिए 'ब्याज पर ब्याज' माफ किया जा सकता है, लेकिन इसके अलावा कोई और राहत देना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए हानिकारक होगा.

    आरबीआई ने कहा कि छह महीने से अधिक समय के लिए लोन मोरेटोरियम की सुविधा प्रदान करने से समग्र ऋण अनुशासन समाप्त हो सकता है, जिसका अर्थव्यवस्था में ऋण निर्माण की प्रक्रिया पर दुर्बल प्रभाव पड़ेगा.

    क्या है लोन मोरेटोरियम-कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने  पूरे देश में लॉकडाउन लगाया था. उस समय उद्योग धंधे पूरी तरह बंद थे. इसीलिए कारोबारियों और कंपनियों के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गई. कई लोगों की नौकरियां चली गईं. ऐसे में लोन की किस्तें चुकाना मुश्किल था. ऐसे में रिजर्व बैंक ने लोन मोरेटोरियम की सहूलियत दी थी. यानी लोन पर किस्तें टाल दी गई थी. किसी लोन पर मोरेटोरियम का लाभ लेते हुए किस्त नहीं चुकाई तो उस अवधि का ब्याज मूलधन में जुड़ जाएगा. यानी अब मूलधन+ब्याज पर ब्याज लगेगा. इसी ब्याज पर ब्याज का मसला सुप्रीम कोर्ट में है.

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