आरबीआई ने MSME को दी राहत, दोगुना बढ़ गई लोन री-स्ट्रक्चरिंग लिमिट

एमएसएमई सेक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एमएसएमई सेक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने एमएसएमई के लिए लोन री-स्ट्रक्चरिंग की सीमा बढ़ा कर दोगुना कर दी है. अब एमएसएमई के लिए लोन री-स्ट्रक्चरिंग की लिमिट 25 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है.

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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने ऋण समाधान व्यवस्था 2.0 के दायरे का विस्तार किया है. आरबीआई ने इसके तहत एमएसएमई (MSME), गैर-एमएसएमई, छोटे कारोबार और लोगों के लिए कारोबारी उद्देश्य से अधिकतम कर्ज सीमा को दोगुना कर 50 करोड़ रुपये कर दिया है. अभी तक यह दायरा 25 करोड़ रुपये था.

रिजर्व बैंक ने दो मई को दबाव झेल रहे व्यक्तिगत लोगों, छोटे कारोबारों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (Micro, Small and Medium Enterprises) के लोन री-स्ट्रक्चरिंग के लिए रेजल्यूशन फ्रेमवर्क 2.0 (Resolution Framework 2.0) की घोषणा की थी. यह योजना ऐसी यूनिट्स के लिए थी जिनका कुल लोन 25 करोड़ रुपये तक है.

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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करने के अवसर पर कहा कि समाधान रूपरेखा 2.0 के तहत अधिक कर्जदारों को लाभ देने के लिए इस योजना का दायरा बढ़ाया गया है. अब 50 करोड़ रुपये तक के कर्ज वाले एमएसएमई, गैर-एमएसएमई, छोटी यूनिट्स या व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.
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रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 4 फीसदी पर ही रहेगा बरकरार

बता दें कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मुख्य नीतिगत दर 'रेपो रेट' को चार फीसदी पर कायम रखने की घोषणा की. मौद्रिक समीक्षा में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर यदि गहराती है और इसकी वजह से देशभर में गतिविधियों पर अंकुश लगते हैं तो मुद्रास्फीति के ऊपर की ओर जाने का जोखिम है.

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