लोन टू वैल्‍यु रेशियो से तय होता है आपको कितना मिलेगा लोन, कैसे होती है कैलकुलेशन, जानें LTV के बारे में सबकुछ

राज्‍य में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की 323 शाखाएं हैं.
राज्‍य में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की 323 शाखाएं हैं.

लोन टू वैल्‍यू रेशियो (LTV Ratio) वह प्रॉपर्टी प्रपोर्शन है, जिसके आधार पर कर्ज (Loan) दिया जाता है. रेशियो का बैंक्स (Banks), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs), नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFCs) आकलन करते हैं. कर्जदाता तय करते हैं कि लोन अमाउंट के हिसाब से प्रॉपर्टी की वैल्यू (Property Value) क्या है और अप्‍लाई करने वाले को कितने फीसदी लोन दिया जाना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 19, 2020, 2:19 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश में ज्‍यादातर लोग घर, व्‍हीकल खरीदने या अपनी दूसरी बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी-प्राइवेट बैंक (PSBs & Private Banks) या दूसरे वित्‍तीय संस्‍थानों (Financial Institutions) से लोन (Loan) लेते हैं. इसमें कर्जदाता (Lenders) सबसे पहले तय करता है कि अप्‍लाई करने वाले व्‍यक्ति को कितने फीसदी लोन दिया जाना है. इसके लिए सबसे पहले व्‍यक्ति की सालाना इनकम (Annual Income) देखी जाती है. इसके बाद उसका क्रेडिट स्‍कोर (Credit Score) और लोन टू वैल्‍यू रेशियो (LTV Ratio) का आकलन किया जाता है. इसके बाद तय किया जाता है कि अप्‍लाई करने वाले को कितना डाउन पेमेंट करना है और कितना लोन मंजूर होगा. इसमें क्रेडिट स्‍कोर क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्‍यूरो इंडिया लिमिटेड (CIBIL) बताता है. आइए जानते हैं कि एलटीवी कैसे कैलकुलेट किया जाता है और इसकी क्‍या अहमियत है.

इस फार्मूला से निकाला जाता है एलटीवी रेशियो
लोन टू वैल्‍यू या एलटीवी रेशियो वह प्रॉपर्टी प्रपोर्शन है, जिसके आधार पर कर्ज दिया जाता है. रेशियो का बैंक्स (Banks), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs), नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFCs) आकलन करते हैं. कर्जदाता तय करते हैं कि लोन अमाउंट के हिसाब से प्रॉपर्टी की वैल्यू (Property Value) क्या है. प्रॉपर्टी की कीमत का अंदाजा इसलिए लगाया जाता है ताकि लोन देने वाले संस्थान आपको उससे ज्यादा लोन नहीं देंगे. लोन देने वाले संस्थान एलटीवी रेशियो निकालने के लिए खास फार्मूला का इस्‍तेमाल करते हैं. अगर आपने एक करोड़ रुपये का मकान लिया है और आपका एलटीवी रेशियो महज 70 फीसदी है, तो आपको 70 लाख से ज्यादा का लोन नहीं मिलेगा.
(उधार लिया गया अमाउंट/प्रॉपर्टी की वैल्यू) X 100 = LTV रेशियो
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ये है गाइडलाइन
लोन देने वाले संस्थानों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन है कि 30 लाख या उससे कम के होम लोन में एलटीवी रेशियो 90 फीसदी तक जा सकता है. इसका मतलब साफ है कि खरीदार को प्रॉपर्टी के लिए 10 फीसदी कीमत जेब से देनी होगी और बाकी कीमत फाइनेंस हो जाएगी. वहीं, 30 लाख से 75 लाख तक पर यह रेशियो 80 फीसदी और 75 रुपये से ज्यादा के अमाउंट पर 75 फीसदी एलटीवी रेशियो होता है. आरबीआई गाइडलाइन के मुताबिक, लेंडर होम लोन का रेशियो 75 से 90 फीसदी तक रख सकता है. अगर उधार लेने वाला व्यक्ति भविष्य में लोन चुकाने की स्थिति में नहीं होता तो इस रेशियो से अपना एनपीए बढ़ने से रोकते हैं.

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कम एलटीवी रेशियो रहता है बेहतर
एलटीवी रेशियो जितना कम होगा, आपके होम लोन पर अन्य नियम और ब्याज दरें उतनी ही बेहतर होंगी. लोन के लिए आवेदन करते समय आपको लेंडर से अपना एलटीवी रेशियो पता चल सकता है. कम एलटीवी रेशियो के साथ आपको अपने लेंडर के साथ कम ब्याज दर, कर्ज के पुनर्भुगतान के लिए ज्यादा समय तय करने में मदद मिलती है. आसान शब्‍दों में समझें तो 60 फीसदी एलटीवी पर कम ब्याज दर पर लोन की पेशकश नहीं होती तो बात करने की जरूरत पड़ती है.
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