होम /न्यूज /व्यवसाय /चीन का लोन ट्रैप: 300 से अधिक इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप्स पर भारत सख्त, बैन करने की तैयारी

चीन का लोन ट्रैप: 300 से अधिक इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप्स पर भारत सख्त, बैन करने की तैयारी

यदि आपको लगता है कि इंस्टेंट लोन देने वालों के इरादे नेक होते हैं, तो आप गलतफहमी में हैं.

यदि आपको लगता है कि इंस्टेंट लोन देने वालों के इरादे नेक होते हैं, तो आप गलतफहमी में हैं.

झटपट लोन देने वाली ऐप्स कम आय वाले लोगों को ट्रैप करती हैं. एक बार लोन लेने के बाद ऐसे जाल में फंसाया जाता है कि इंसान ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

इन ऐप्स के जरिए एक बार लोन लेने वाले व्यक्ति को बुरी तरह परेशान किया जाता है.
कई ऐप्स बाजार में उपलब्ध हैं और लोगों को फंसाने का इनका काम बदस्तूर जारी है.
ऐप्स का लिंक चीन के साथ होने की खबरों के साथ चलते प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नजर में हैं.

अंकुर शर्मा
नई दिल्ली.
इन दिनों झटपट लोन देने वाली कई ऐप्स काम कर रही हैं. आपको बस एक बार अप्लाई करने की जरूरत है, बस उसके बाद ये लोग आपको लोन देने के बाद ही दम लेते हैं. ये लोग इंस्टेंट लोन जरूर देते हैं, लेकिन अगर आपको लगता है कि इनके इरादे नेक होते हैं, तो आप गलतफहमी में हैं.

अभी तक सामने आए मामलों से पता चलता है कि इन ऐप्स के जरिए एक बार लोन लेने वाले व्यक्ति को बुरी तरह परेशान किया जाता है. यहां तक कि लोग सुसाइड तक कर लेते हैं. इस तरह की कई ऐप्स अभी भी बाजार में उपलब्ध हैं और अपने जाल में लोगों को फंसाने का इनका काम बदस्तूर जारी है. News18 की इस सीरीज में आपको पता चलेगा कि इनके लिए इंसान की कीमत क्या है और चीनी कंपनियां भारतीयों का डेटा हासिल करने के लिए किस हद तक जा रही हैं.

ये भी पढ़ें – एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने ग्राहकों को दिया झटका, होम लोन लेना हुआ महंगा

तुरंत पैसा देते हैं, लेकिन…

कल्पना कीजिए कि आपको तत्काल पैसे की सख्त आवश्यकता है. लेकिन आपके पास लोन के लिए आवश्यक कागजी कार्यवाही के लिए समय की कमी है. तभी आपके स्मार्टफोन पर एक पॉप-अप आता है, जो तत्काल और बिना किसी सवाल का जवाब लिये आपको लोन का ऑफर मिलता है. आप ऐप डाउनलोड करते हैं, साइन अप करते हैं. और जैसा कि आप अन्य ऐप्स के साथ करते हैं, इसे भी आवश्यक डेटा एक्सेस करने की अनुमति देने को सहमति दे देते हैं.

अब आपको तुरंत ही पैसा भी अपने अकाउंट में मिल जाएगा. आपको लगेगा कि चमत्कार हो गया. परंतु, असली ट्रैप यहीं से शुरू होता है. आपको एक सप्ताह के अंदर ही ऐप की तरफ से लोन की री-पेमेंट करने के मैसेज मिलने लगेंगे. चलिए, यहां तक भी कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत इस बात से है कि जो री-पेमेंट आपसे मांगी जा रही होगी, वह उस लोन के अमाउंट से दोगुना अधिक होगी.

ऐसा नहीं है कि गलती से आपको दोगुने पैसे वापस करने का मैसेज मिला हो. ऐसे मैसेज आपको हर दिन मिलेंगे और हर बीतते हुए दिन के साथ मैसेज की भाषा आपको सताने लगेगी. आपको ब्लैकमेल किया जाएगा, धमकी दी जाएगी कि आपके रिश्तेदारों, दोस्तों और साथ काम करने वाले लोगों को आपकी आर्थिक स्थिति के बारे में सब बता दिया जाएगा. चूंकि आप पहले ही ऐप को फोन की सारी परमिशन दे चुके हैं तो इनके पास आपकी पूरी कॉन्टेक्ट लिस्ट और तस्वीरें होती हैं. इन्हीं नंबरों और तस्वीरों का इस्तेमाल ये लोग समाज में आपकी और आपके परिवार की गरिमा को कम करने के लिए करते हैं.

गृह मंत्रालय की नजर में मामला

कई राज्यों में तो स्थितियां यहां तक पहुंची कि लोन लेने वालों को इस भंवर से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखा और उन्हें अपने जीवन का अंत करना पड़ा. यही वजह थी कि जांच एजेंसियों के साथ-साथ सरकार को भी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना पड़ा. अब यह मामला भारत सरकार के गृह मंत्रालय की नजर में है. सूत्रों ने News18 को बताया कि लगभग 300 ऐसे इंस्टेंट लोन ऐप्स पर सख्त कार्रवाई हो सकती है. संभावना है कि इन्हें बैन भी किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें – दिल्ली पुलिस ने पकड़ा ब्लैकमेलर गैंग, 100 लोन Apps से उगाहे 500 करोड़ रुपये, यूजर्स का डेटा भेजा चीन

इन ऐप्स का चीन के साथ संबंध होने की खबरों के साथ चलते प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (Serious Fraud Investigation Office), इंटेलिजेंस ब्यूरो, R&AW और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नजर भी इनपर है. आरबीआई पहले भी इस तरह के ऐप पर लोगों को चेतावनी दे चुका है. सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू करने से पहले एजेंसियों से इनपुट मांगा है.

किन राज्यों में है नेटवर्क

तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और अन्य सरकारों द्वारा “हानिकारक वित्तीय उत्पादों” के खिलाफ केंद्र और केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप की मांग करने वाली रिपोर्टों को साझा करने के बाद गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है. इन सभी राज्यों में से, तेलंगाना को इन ऐप्स ने अपना पसंदीदा शिकार बनाया है.

राज्य पुलिस द्वारा केंद्र सरकार को दी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 1,000 से अधिक ऐसे ऐप्स फिलहाल मार्केट में हैं. एक अंतराल के बीच लगातार नए ऐप्स लॉन्च होते रहते हैं. हालांकि इस बात पर कोई साफ जानकारी नहीं है कि कितना पैसा सर्कुलेशन में है, क्योंकि इन ऐप्स ने पूरे भारत में (कहीं कम तो कहीं ज्यादा) पैर पसारे हुए हैं. लेकिन हैदराबाद पुलिस के एक खुफिया विभाग की रिपोर्ट कहती है कि एक चीनी नागरिक ने 4 फर्जी कंपनियों (Shell corporations) चला रहा है और इसने 21 हजार करोड़ रुपये की 1.4 करोड़ ट्रांजेक्शन्स की हैं.

मनी लॉन्ड्रिंग का शक

ऐसे ऐप्स की डाउनलोड संख्या 50,000 से 10 लाख तक है, जिनकी रेटिंग Google Play Store पर 3.5 और 4.8 के बीच है. राज्य पुलिस बलों की जांच से पता चला है कि ऐसे ऐप्स से जुड़े कॉल सेंटरों में औसतन 300-350 लोगों का स्टाफ होता है. तेलंगाना पुलिस की जांच में कुछ निर्यातकों ने चीन के साथ कारोबार किया, जिन पर जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का रास्ता है.

बड़ा गड़बड़झाला है इसमें तो!

इन ऐप ऑपरेटरों द्वारा अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, News18 ने जांच और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ-साथ इन मामलों पर काम कर रहे साइबर और आर्थिक अपराध विंग के जांचकर्ताओं से बात की. अधिकारियों ने कहा कि ऐप पंजीकृत फिनटेक कंपनियों द्वारा समर्थित हैं, जो बदले में शेल कंपनियों द्वारा समर्थित हैं, कुछ मामलों में इनकी संख्या 100 तक है. इनमें से कई मामलों में, सैकड़ों कंपनियां दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु के आवासीय क्षेत्रों में एक ही पते से संचालित होती पाई गईं.

ये भी पढ़ें – ‘सरकार आधार कार्ड पर दे रही 5 लाख तक लोन’, आपको भी आया ऐसा मैसेज तो हो जाएं सावधान

इस पूरे पिरामिड में सबसे ऊपर चीनी नागरिक हैं जो ऐप्स को डिज़ाइन और लॉन्च करते हैं. चार्टर्ड अकाउंटेंट शेल कंपनियों को स्थापित करने और पंजीकृत करने में मदद करते हैं और भारतीय सहयोगियों को इन कंपनियों के निदेशक के रूप में काम पर रखा जाता है. कॉल सेंटर चलाने के लिए प्रबंधकों और कर्मचारियों को काम पर रखा गया है.

कम आय वाले लोगों को करते हैं टार्गेट

ये ऐप्स पॉप-अप विज्ञापनों के माध्यम से पहला संपर्क बनाते हैं. ये लोग मुख्य रूप से कम आय वाले लोगों को टार्गेट करने के लिए कुछ हजार रुपये के ऋण ऑफर करते हैं. एक बार जब कोई व्यक्ति ऐप डाउनलोड कर लेता है, तो ये ऐप्स ऋण देने से पहले आपके स्मार्टफोन पर कॉन्टेक्ट्स और फोटो गैलरी तक पहुंचने के लिए अनुमति मांगते हैं. एक बार जब उपयोगकर्ता के खाते में लोन का अमाउंट ट्रांसफर हो जाता है, तो हफ्तेभर के अंदर ही री-पेमेंट के कॉल आने लगते हैं. खास बात ये है कि री-पेमेंट अकाउंट लगभग 70-80 फीसदी अधिक होता है.

लोन का ये गंदा खेल रचने वाले अच्छे से जानते हैं कि कम आय वाले व्यक्ति, जोकि कुछ हजार का लोन लेते हैं, वे उसका लगभग दोगुना अमाउंट आसानी से लौटा नहीं पाते हैं. लोन लेने वाला जैसे ही यह जाहिर करता है कि वह इतना पैसा लौटा नहीं सकता तो फिर उसे परेशान करना शुरू किया जाता है. कई बार तो यहां तक धमकी दी जाती है उनकी (लोन लेने वालों की) फोटो-गैलरी का एक्सेस उनके (लोन देने वालों के) पास है. यदि पैसा नहीं लौटाया तो अलग-अलग वेबसाइट्स पर उनके फोटो डाल दिए जाएंगे.

यूं ट्रैप में फंसता चला जाता है इंसान

परेशान हो चुका व्यक्ति लगभग 500-1000 फीसदी तक ज्यादा अमाउंट लौटाने के रास्ते खोजने लगता है. वह कहीं और से पैसा उधार लेता है या लोन लेता है, ताकि एक परेशानी से मुक्त हो सके. News18 के सामने एक ऐसा मामला भी आया, जिसमें ऐप ने 9,000 रुपये के ऋण के लिए प्रोसेसिंग फीस के रूप में 7,260 रुपये वसूले थे. एक अन्य मामले में पीड़िता की मां, पत्नी, बहन और बेटी का उल्लेख करने वाले अश्लील संदेश उसे उसके कॉन्टेक्ट्स को फॉरवर्ड करने की धमकी के साथ भेजे गए थे. विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के कारण लगभग 20 आत्महत्याएं हुई हैं. पिछले दो वर्षों में राज्य पुलिस बलों ने कुछ चीनी नागरिकों समेत कुछ लोगों को शामिल किया है, लेकिन ये धंधा अभी भी बदस्तूर जारी है.

Tags: Business news, Business news in hindi, CHINESE APPS, Loan

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें