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एक दिन का लॉकडाउन लगने पर दिल्ली को होता है इतने करोड़ का नुकसान, लाखों कारोबारियों पर होगा असर

दिल्ली में हर रोज़ होता है 700 करोड़ रुपये का कारोबारी लेन-देन
दिल्ली में हर रोज़ होता है 700 करोड़ रुपये का कारोबारी लेन-देन

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT — The Confederation of All India Traders) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल की मानें तो दिल्ली के बाज़ारों में हर रोज 700 करोड़ रुपये का लेन-देन होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 10:22 AM IST
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नई दिल्ली. बढ़ते कोरोना केस (Corona Case) को देखते हुए एक बार फिर से दिल्ली में लॉकडाउन (Lockdown) लगाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन या फिर बाज़ार बंदी की फाइल एलजी के पास भेज दी है. अब फैसला एलजी (LG) को करना है. लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि एक दिन की बंदी से भी दिल्ली को कितना नुकसान होता है. दिल्ली ही नहीं आसापस के कितने लोग बंदी से परेशान होते हैं. दिल्ली (Delhi) को देश का सबसे बड़ा व्यापारिक वितरण केंद्र कहा जाता है. इसी से सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि एक दिन का लॉकडाउन भी कितनी बड़ी परेशानी लेकर आता है.

दिल्ली में हर रोज़ होता है 700 करोड़ रुपये का कारोबारी लेन-देन

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल की मानें तो दिल्ली के बाज़ारों में हर रोज 700 करोड़ रुपये का लेन-देन होता है. इसमे से 500 करोड़ रुपये का लेन-देन तो सिर्फ उन कारोबारियों से हो जाता है जो दिल्ली के बाहर से माल खरीदने आते हैं. बाहर से आने वाले ऐसे कारोबारियों की संख्या करीब 5 लाख है.



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दिल्ली में हैं छोटे-बड़े 3500 बाज़ार हैं

राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में सभी तरह के मिलाकर छोटे-बड़े करीब 3500 बाज़ार हैं. अकेले पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट, चावड़ी बाज़ार, सदर बाज़ार, क़रोल बाग, पहाड़गंज, दरियागंज आदि इलाकों में 700 के करीब बाज़ार है. इसके अलावा बाकी बची दिल्ली में 2800 से बाज़ार हैं जहां सुबह से रात तक करोड़ों रुपये का कारोबार हो जाता है.

लॉकडाउन लगा तो यह कारोबारी होंगे सबसे ज़्यादा प्रभावित

शादी समारोह में मेहमानों की संख्या में छूट मिलने के बाद से शादी वाले घर के साथ ही कारोबारियों में भी खुशी छा गई थी. उन्हें उम्मीद जागी थी कि अब बहुत ज़्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत कारोबार तो पटरी पर आ ही जाएगा. ध्यान रहे कि दीवाली के बाद शादियों का एक बड़ा सहलग देवोत्थान शुरु हो जाता है. खासतौर से कपड़ा बाज़ार, फूल बाज़ार, इवेंट कंपनियां, आतिशबाजी वाले, मैरिज होम, होटल-रेस्टोरेंट, कैटरिंग, बैंडबाजा पार्टी, किराना और ड्राइ फ्रूट बाज़ार को दिल्ली सरकार के इस फैसले से बड़ी उम्मीद जागी थी.

आतिशबाजी कारोबार पर पड़ेगी डबल मार

आतिशबाजी कारोबार पर तो डबल मार पड़ती दिख रही है. दिवाली और दूसरे खास मौकों के लिए तो आतिशबाजी को दिल्ली सरकार समेत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी बैन कर चुका है. आतिशबाजी पर यह बैन दिल्ली ही नहीं यूपी, राजस्थान, ओडिशा समेत देश के कई शहरों में आतिशबाजी बैन की जा चुकी है.
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