साल 1993 के बाद टिड्डी का सबसे बड़ा हमला, सरकार ने बनाया इन्हें खत्म करने का पूरा प्लान

साल 1993 के बाद टिड्डी का सबसे बड़ा हमला, सरकार ने बनाया इन्हें खत्म करने का पूरा प्लान
राजस्थान में टिड्डियों के न्यूट्रिशनल वैल्यू पर होगी स्टडी (Demo Pic)

उत्तर भारत के राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में खतरनाक टिड्डी दल (Locust Attack) का आतंक चल रहा है. टिड्डी दल जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है रास्ते में आने वाली हरियाली को चट करता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भारत में टिड्डीयों का ये 26 साल का सबसे बड़ा हमला है

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नई दिल्ली. टिड्डी दल (Locust Attack) ) छोटे-छोटे कीड़ों का झुंड होता है. इस झुंड में लाखों कीड़े शामिल होते हैं. कीड़ों का ये झुंड उत्तर पूर्वी अफ्रीका में तैयार होता है. ये ग्रासहॉपर समुदाय का एक सदस्य होता है. ये टिड्डे अपना झुंड बनाकर एक इलाके से दूसरे इलाके जाते हैं. आमतौर पर ये कीड़े अगर कम संख्या में हों तो खेती को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते. लेकिन जब ये लाखों की तादाद में झुंड में होते हैं तो तबाही मचा देते हैं.

टिड्डी हमले (locust attack) को रोकने के लिए हर साल भारत-पाकिस्तान (india-pakistan) के अधिकारियों के बीच 6 बैठकें होती हैं. ताकि टिड्डी की स्थिति से संबंधित सूचना का आदान-प्रदान करके इसे रोका जा सके. लेकिन इस छोटे लेकिन घातक दुश्मन को खत्म करने में पाकिस्तान दिलचस्पी नहीं दिखाता.

भारत पर जब भी टिड्डी दल का हमला होता है वह पाकिस्तान की तरफ से होता है. पाकिस्तान की ओर से होने वाले खेती के दुश्मन टिड्डियों का हमला इस बार राजस्थान से होते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके तक पहुंच गया है.



सरकार की योजना-इन्हें मारने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय (ministry of agriculture) में लगातार बैठकें चल रही हैं, फैसले लिए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हालात ये है कि टिड्डियां सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भारत में डेरा डाले हुए हैं. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का कहना है कि टिड्डियों के नियंत्रण के लिए पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल होगा. इसके लिए डीजीसीए (Directorate General of Civil Aviation) ने अनुमति दे दी है.



टिड्डी चेतावनी संगठन (Locust Warning Organization) के जाइंट डायरेक्टर डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि सरकार इसके नियंत्रण के लिए प्रयासरत है. लेकिन पाकिस्तान ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया. ये वहीं से आते हैं. यह इस बार थोड़ा जल्दी आ गया है. उधर फसलें नहीं हैं इसलिए यह तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है.

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ऐसा है टिड्डियों का हमला, कैसे बचेंगी फसलें (file photo)


इसके भौगोलिक कारण क्या हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि टिड्डी दल मरुस्थल में पनपता है. यह इसके पनपने के लिए अनुकूल होता है. एक मादा 108 अंडे देती है और ये बढ़ती चली जाती हैं. पाकिस्तान में थार मरुस्थल का बड़ा हिस्सा है. वहां पर ये पनपते हैं और हवा के साथ भारत में आ जाते हैं. भारत में राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में 2,05,785 वर्ग किमी क्षेत्र रेगिस्तान है. इसलिए इन प्रदेशों में टिड्डियों का खतरा बना रहता है.

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि ये कीड़े रेगिस्तानी इलाके में पैदा होते हैं और हरियाली वाले इलाकों का पीछा करते हुए आगे बढ़ते हैं. ये उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं जिस दिशा की हवा चल रही होती है. मतलब ये हवा की दिशा के साथ ही अपना सफर तय करते हैं.

किसानों के सबसे बड़े दुश्मन-किसानों के लिए ये टिड्डी दल इसलिए खतरनाक है क्यों कि इस टिड्डी दल में लाखों कीड़े होते हैं बहुत तेजी से हरियाली चट करते हैं. कुछ मिनटों में ये दल पूरे के पूरे खेत चट कर जाते हैं. ये 50 से 100 गुना तेजी से अपनी संख्या में बढ़ोतरी करते हैं. अगर इन टिड्डियों को हरियाली मिलती जाती है तो ये और तेजी से अपनी संख्या बढ़ाते हैं. किसानों को सलाह दी जाती है कि अगर टिड्डियों का दल आता दिखे तो जोर जोर से आवाज करके थाली पीटकर, ढोल ताशे बजाकर इस टिड्डी दल को भटकाया जा सकता है. इसके अलावा कीटनाशकों का भी छिड़काव किया जा सकता है.

थोड़ा जल्दी आ गया है टिड्डी दल
टिड्डी प्रजनन का मौसम जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर तक होता है. लेकिन इस बार यह मई में ही आ गया है. टिड्डियों का दल आमतौर पर हवा की दिशा में उड़ता है. पाकिस्तान से होकर भारत के रेतीले क्षेत्रों में प्रवेश कर जाता है.

छोटे से छोटे टिड्डी दल में भी लाखों की संख्या में टिड्डी होती हैं. जो एक ही दिन में फसलों को साफ कर देती हैं. वयस्क टिड्डी झुंड एक दिन में 150 किमी तक हवा के साथ उड़ सकता है. बहुत छोटा झुंड भी एक दिन में लगभग 35,000 लोगों जितना खाना खाता है.

क्या कर रही है सरकार
राजस्थान, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का गृह राज्य है. इसलिए वो हालात पर नजर बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि राजस्थान के जालौर, जयपुर, करौली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, पोकरण सहित टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा कीटनाशकों के छिड़काव सहित सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे है.

टिड्डी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 3 लाख लीटर मैलाथियान खरीद की मंजूरी दी है. वर्तमान में टिड्डी नियंत्रण कार्यालयों के पास 47 हजार लीटर कीटनाशक मौजूद है. टिड्डी दल को नष्ट करने के लिए कृषि मंत्रालय ने DGCA से ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति ली है. भारत में छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग पहली बार किया जाएगा.

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