आखिर भारत पर क्यों हुआ टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला! तबाह हुई 90 हजार हेक्टेयर फसल

आखिर भारत पर क्यों हुआ टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला! तबाह हुई 90 हजार हेक्टेयर फसल
करीब 6 से 8 जिले ऐसे हैं जिनमें टिड्डी का प्रकोप लगातार बना हुआ है.

अफ्रीका में 14 साल तक एग्रीकल्चर (Agriculture) पर काम कर चुके कृषि वैज्ञानिक प्रो. साकेत कुशवाहा कहते हैं कि इस साल भारत के किसानों के लिए टिड्डियां (Locust Attack) भी परेशानी का सबब बन सकती हैं. क्योंकि टिड्डियों के विकास के लिए अनुकूल है मौसम

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नई दिल्ली. टिड्डियों के हमले (Locust-attack Latest News) की वजह से राजस्थान, एमपी, यूपी और हरियाणा सहित कई प्रदेशों में अलर्ट है. किसानों की करीब 90 हजार हेक्टेयर फसल तबाह (Farmers) हो चुकी है. आखिर इस बार पिछले 26 साल का सबसे बड़ा हमला कैसे हुआ.

इसकी वजह क्या है?

अफ्रीका में 14 साल तक एग्रीकल्चर पर काम कर चुके कृषि वैज्ञानिक प्रो. साकेत कुशवाहा कहते हैं कि इस साल भारत के किसानों के लिए टिड्डियां भी परेशानी का सबब बन सकती हैं. अगर कुछ अफ्रीकन देशों की गरीबी के कारणों को तलाशेंगे तो पाएंगे कि करीब 15 फीसदी वजह टिड्डियां भी हैं. क्योंकि ये कोई फसल होने नहीं देतीं.



इस बार क्यों हुआ इतना बड़ा हमला?



प्रो. कुशवाहा कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से करीब 5 महीने पहले पूर्वी अफ्रीका में मौसम टिड्डियों के काफी अनुकूल था. अच्छी बारिश हुई थी.  इस वजह से टिड्डियों का अच्छा विकास हुआ. कोरोना लॉकडाउन की वजह से मानवीय दखल तब हुआ जब उन्होंने तबाही मचानी शुरू कर दी.

बताया गया है कि अफ्रीका से करीब 200 किलोमीटर रोजाना का सफर तय करते हुए ये टिड्डियां दक्षिणी ईरान और फिर दक्षिण पश्चिमी पाकिस्तान पहुंचीं. वहां भी प्रजनन के लिए अच्छा माहौल मिला. इससे उनकी तादाद में इजाफा हुआ. पाकिस्तान से ये हवा के साथ भारत आ गईं. जुलाई की शुरुआत तक टिड्डियों का प्रकोप जारी रहने की आशंका है.

ये भी पढ़ें-साल 1993 के बाद टिड्डी का सबसे बड़ा हमला, सरकार ने बनाया इन्हें खत्म करने का पूरा प्लान

वैज्ञानिकों के मुताबिक अत्यधिक मात्रा में पैदा होने पर टिड्डियों के व्यवहार में परिवर्तन होता है. इसे फेज चेंज कहा जाता है. ये झुंड में चलती हैं यही किसानों के लिए चिंता का कारण है. जिस भी खेती में झुंड बैठता है देखते ही देखते पूरी फसल खत्म हो जाती है.

संयुक्त राष्ट्र ने भी दी है चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि इस साल भारत के किसानों को टिड्डियों के झुंड से दो-चार होना पड़ेगा. जलवायु परिवर्तन ने मौसम के हालात को मौजूदा प्रकोप के अनुकूल बना दिया है. असामान्य मौसम के साथ पिछले साल एक शक्तिशाली चक्रवात के कारण दुनिया के कई स्थानों पर नमी पैदा हुई है जो टिड्डियों के विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाती है.

टिड्डियों के बारे में जानिए

-झुंड के प्रत्येक वर्ग किलोमीटर में कम से कम 40 मिलियन और कभी-कभी 80 मिलियन वयस्क टिड्डी हो सकते हैं.

-डेजर्ट मादा टिड्डी रेतीली मिट्टी में सतह के नीचे 10-15 सेंटीमीटर की गहराई पर अंडे देती है. एक मादा 95-158 अंडे देती है. एक वर्ग मीटर में 1,000 अंडे तक पाए जाते हैं.
First published: May 29, 2020, 2:23 PM IST
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