गन्ना किसानों का बकाया रिकॉर्ड 30 हजार करोड़ रुपये हुआ! जानिए क्यों नहीं हो रहा है भुगतान!

चीनी मिलों को जोरदार राहत पैकेज दिए जाने के बावजूद गन्ना किसानों की परेशानियां जस की तस हैं. नए आंकड़ों के मुताबिक, गन्ना किसानों का करीब 30,335 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है.

News18Hindi
Updated: April 12, 2019, 2:40 PM IST
गन्ना किसानों का बकाया रिकॉर्ड 30 हजार करोड़ रुपये हुआ! जानिए क्यों नहीं हो रहा है भुगतान!
गन्ना किसानों का बकाया रिकॉर्ड 30 हजार करोड़ रुपये हुआ! जानिए क्यों नहीं हो रहा है भुगतान!
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Updated: April 12, 2019, 2:40 PM IST
चीनी मिलों को जोरदार राहत पैकेज दिए जाने के बावजूद गन्ना किसानों की परेशानियां जस की तस हैं. नए आंकड़ों के मुताबिक, गन्ना किसानों का करीब 30,335 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है. सीएनबीसी आवाज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, कई शुगर मिलों में पिछले 6 महीने से गन्ने का पेमेंट नहीं हुआ है. इन बकायदरों में मवाना शुगर मिल्स, बजाज, सिंभावली भी शामिल है. मिलें गन्ना किसानों के भुगतान में धनघोर लापरवाही कर रही हैं जिसका नतीजा ये है कि किसानों की माली हालत पतली होती जा रही है. अपनी उपज मिलों को बेचने के बाद भी भुगतान न होने से किसानों को मजबूरन ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ रहा है. ये खुलासा यूपी के मुजफ्फनगर से सीएनबीसी-आवाज़ की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट में हुआ है.

क्यों नहीं हो पा रहा है भुगतान- चीनी इंडस्ट्री की दिक्कतें अभी भी बरकरार है. इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने बताया कि शुगर मिल्स की लागत ज्यादा आ रही है. जबकि, चीनी के दाम गिर रहे हैं. वहीं, शुगर मिल्स के पास पहले से 200 लाख टन चीनी की इवेंट्री पड़ी हुई है. गोडाउन में पड़ी चीनी की कीमत करीब 70 हजार करोड़ रुपये बैठती है. इसीलिए शुगर मिल्स के पास पैसों के भुगतान की दिक्कतें आ रही है. 

सीएनबीसी-आवाज़ की टीम गन्ना बेल्ट के नाम से मशहूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दौर करके आई हैं. यहां, मुजफ्फरनगर में आवाज़ की टीम की मुलाकात गन्ना किसान श्रवण कुमार से हुई. वह 20 साल से खेती कर रहे. श्रवण कुमार ने इस बार 22 बीघे खेत पर गन्ना उगाया है. गन्ने की लहलहाती फसल से इन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा. सोचा था गन्ना बेचकर धूमधाम से बेटी की शादी करेंगे. लेकिन अब शादी के लिए ऊंची ब्याज पर कर्ज लेने के लिए मजबूर हैं. पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान भुगतान में देरी से परेशान हैं. हैरानी तो तब हुई जब गन्ना मंत्री के घर के पास की चीनी मिल पर गन्ना किसान बकाये से परेशान दिखे.



 

किसानों की दर्द भरी दास्तां यहीं खत्म नहीं होती. अगर गन्ना ज्यादा पैदा कर लिया तो उन्हें उसकी सजा भी मिलती है. जी हां, पर्ची नहीं मिलने का मतलब होता है चीनी मिल गन्ना खरीदने को तैयार नहीं हैं और फिर ऐसे में एक ही सहारा होता है वो है गन्ने को कोल्हू पर बेचें. एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ उत्तर प्रदेश में कुल उत्पादन का 30 फीसदी गन्ना कोल्हू में जाता है जैसा कि किसानों ने कहा, हर क्विंटल पर करीब 75 रुपये का नुकसान होता है.


कोल्हू में गन्ना देने से उत्तर प्रेदेश के गन्ना किसानों को सालाना करीब 300 करोड़ रु का नुकसान होता है. थोड़ा और सुनिए इसके बाद तो शायद आप ये शिकायत करना भी भूल जाएंगे कि चीनी महंगी हो गई. गन्ना काटने में देरी से गेहूं की खेती किसान कर नहीं पाते.

गन्ने में नुकसान तो हुआ ही और अगली फसल की आमदनी भी मारी गई. यानी, ना माया मिली ना राम. ये सब कुछ देखने के बाद कम से कम इतनी तो उम्मीद कर सकते हैं कि अगली बार सरकार जब चाय पर चर्चा करे तो चाय की मिठास के पीछे की कड़वाहट का ख्याल जरूर रखे.
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