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दिल्लीवालों को सरकार का तोहफा, लोकसभा में पास हुआ अवैध कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 7:32 PM IST
दिल्लीवालों को सरकार का तोहफा, लोकसभा में पास हुआ अवैध कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल
लोकसभा में पास हुआ अवैध कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल

बिल में 1797 कालोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव है. ये कालोनियां 175 वर्ग किलोमीटर में फैली हैं.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 7:32 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों को तोहफा मिला है. अवैध कॉलोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने (Regulations of Delhi's Unauthorized Colonies) वाला बिल लोकसभा में पास हो गया है. बिल में 1797 कालोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव है. ये कालोनियां 175 वर्ग किलोमीटर में फैली हैं. केंद्र सरकार ने बुधवार को इस बिल को लोकसभा में पेश किया था.

क्या होगा फायदा?
>> इस बिल का उद्देश्य जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत, बेचने, खरीदने और कब्जे संबंधी दस्तावेजों को मान्यता देना है. इसके तहत इनके निवासियों को एक बार में इन सभी मामलों में छूट मिलेगी. इसके अलावा बिल अंतिम लेनदेन पर पंजीकरण शुल्क और स्टांप शुल्क की भी सुविधा देगा और सर्किल रेट से कम शुल्क के कारण आयकर देनदारी के मुद्दे को भी संबोधित करेगा.

>> प्रॉपर्टी के मालिकों को मालिकाना हक पाने के लिए इस पोर्टल पर अप्लाई करना होगा. फिर दिल्ली सरकार के तहत घर की रजिस्ट्री होगी. इसी के बाद डीडीए लोकल एरिया को विकसित करने का प्लान तैयार करेगी.

>> अवैध कॉलोनी चाहे वो सरकारी जमीन पर हो या निजी जमीन पर सभी को मालिकाना हक मिलेगा. साथ ही इस घर के एवज में लोगों को लोन भी मिल सकेगा.

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>> सरकार इन कॉलोनियों को वैध कॉलोनी करार देते हुए वहां सारी बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल की व्यवस्था करेगी.
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मालिकाना हक के लिए चुकानी होगी कीमत
>> विधेयक के तहत कालोनी के मालिकाना हक के लिए आवेदक को कार्पेट एरिया/भूखंड के आकार के हिसाब से मामूली शुल्क का भुगतान करना होगा.

>> इसमें सरकारी भूमि पर बनी कालोनियों के लिए 100 वर्ग मीटर से कम के लिए सर्किल रेट का 0.5 फीसदी शुल्क वसूला जाएगा.
> वहीं 100-250 वर्ग मीटर के लिए एक फीसदी और 250 वर्गमीटर से अधिक के लिए 2.5 फीसदी शुल्क चुकाना होगा. वहीं निजी भूमि पर बनी कालोनियों के लिए यह शुल्क सरकारी भूमि का ठीक आधा हो जाएगा.

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First published: November 28, 2019, 7:27 PM IST
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