सरकार की नई LTC स्कीम: आपके लिए कितनी फायदेमंद, एक्सपर्ट्स ने दिए इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब

आप LTC/LTA का फायदा उठाना चाहते हैं तो उस पैसे का इस्तेमाल करके आप कुछ सामान खरीद सकते हैं.
आप LTC/LTA का फायदा उठाना चाहते हैं तो उस पैसे का इस्तेमाल करके आप कुछ सामान खरीद सकते हैं.

LTC Cash Voucher Scheme 2020: एलटीसी स्कीम का चुनाव करने वाले कर्मचारियों को 31 मार्च 2021 से पहले सामान या सेवाओं को खरीदना होगा, जिनकी कीमत किराये की 3 गुना और लीव इनकैशमेंट कवर के बराबर हो. आइए जानें इससे जुड़ी सभी बातें

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 12:44 PM IST
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नई दिल्ली: सरकार ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों और निजि क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए LTC कैश वाउचर स्कीम का ऐलान किया है. अगर आप LTC/LTA का फायदा उठाना चाहते हैं तो उस पैसे का इस्तेमाल करके आप कुछ सामान खरीद सकते हैं. इस स्कीम का चुनाव करने वाले कर्मचारियों को 31 मार्च 2021 से पहले सामान या सेवाओं को खरीदना होगा, जिनकी कीमत किराये की 3 गुना और लीव इनकैशमेंट कवर के बराबर हो. इसके अलावा राशि को उन सामान पर खर्च करना होगा जिन पर 12 फीसदी या उससे ज्यादा का जीएसटी हो और खरीदारी डिजिटल माध्यम के जरिए GST रजिस्टर्ड विक्रेता से करनी होगी.

LTC कैश वाउचर स्कीम के तहत कितनी मिलेगी टैक्सछूट और आपके लिए कितना फायदेमंद है जानिए यहां-
टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा के मुताबिक, अगर आप कोई कॉन्ट्रैक्टट साइन कर रहे हैं या फिर कोई ऑफर ले रहे हैं तो आपको टर्म एंड कंडीशन पढ़ना सबसे जरूरी है. तो ये जो बेनिफिट सरकार ने जनता को दिया है ये एक अच्छा मौका है टैक्स बचाने के लिए, लेकिन इससे पहले आपको ये जानना जरूरी है कि यह किस-किस के लिए बेनिफिशयरी है-

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1. सरकारी कर्मचारी 4 साल में दो बार LTC की सुविधा ले सकते हैं.


2. इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को LTC पर टैक्स नहीं चुकाना होता है.
3. प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को भी 4 साल में 2 बार LTC की सुविधा मिलती है.
4. LTC की सुविधा न लेने पर कंपनी टैक्स कटौती के बाद बकाया दे देती है.
5. नई स्कीम के तहत लीव इनकैशमेंट और LTC से तीन गुना ज्यादा खर्च करने पर ही टैक्स छूट मिलेगी.
6. इसके अलावा LTC से मिले पैसों से 3 गुनी कीमत का सामान खरीदना होगा
7. इसके अलावा जिस पर GST दर 12फीसदी से ज्यादा हो
8. GST का बिल भी कर्मचारियों को पेश करना होगा.
9. खरीदारी 31 मार्च 2021 से पहले करनी होगी.


कोरोना महामारी की वजह से नहीं कर पाएं सफर
CNBC आवाज पर टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने कहा कि महामारी की वजह से बहुत से कर्मचारी सफर नहीं कर सके और इस साल वे लीव ट्रैवल छूट के लिए दावा नहीं कर सकेंगे. इसलिए सरकार ने यह स्पेशल पैकेज कर्मचारियों के लिए निकाला है. इसके जरिए वह टैक्स छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं.

इस समय खर्च करने होंगे 3 लाख रुपए
इस समय आपको 30000 रुपए का टैक्स बचाने के लिए 3 लाख रुपए खर्च करने होंगे. वहीं, पहले आपको 30 हजार रुपए की टैक्स छूट के लिए सिर्फ 1 लाख रुपए खर्च करने होते थे.

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कौन-कौन ले सकता है इस स्कीम का फायदा?
यह स्कीम केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) के कर्मचारियों के लिए है. हालांकि, नोटिफिकेशन के मुताबिक, टैक्स कंसेशन के लिए राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के उन कर्मचारियों को मंजूरी दी जाएगी , जो वर्तमान में LTC के लिए योग्य हैं.

कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए मिला नया विकल्प-इस स्कीम के तहत केंद्रीय कर्मचारी (Central Govt. Employees) चार साल के अंतराल में दो बार अपने होमटाउन या अन्य जगह पर घूमने जा सकते हैं. इसके लिए ये कर्मचारी एलटीसी और 10 दिन की छुट्टी के ​लिए भुगतान (Leave Encashment) के योग्य होंगे. टिकट खर्च पर कर्मचारियों को टैक्स नहीं देना होगा, जबकि छुट्टी के भुगतान पर टैक्स देय होगा. चूंकि, कोरोना वायरस महामारी के बीच ट्रैवल को लेकर लोगों में अभी भी संकोच की स्थिति है. ऐसे में सरकार ने इन कर्मचारियों को इस स्कीम का लाभ लेने के लिए एक खास विकल्प दिया है. कर्मचारी एलटीसी किराये और लीव इनकैशमेंट के बराबर कैश प्राप्त करने के हकदार होंगे. हालांकि, इसके लिए सरकार ने कुछ शर्तें भी रखी हैं.

वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?वित्त मंत्रालय ने विस्तृत तरीके से इस बारे में लिखा है, 'कॉरपोरेट सेक्टर में लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) की तुलना में सरकार की एलटीसी ​अलग है. एलटीसी क्लेम करने वाले व्यक्ति को तभी योग्य माना जाएगा, जब वो वाकई में ट्रैवल करेगा. अगर वो ट्रैवल नहीं करते हैं तो यह रकम उनके पेमेंट से काट ली जाएगी और उन पर अनुशास्नात्मक कार्रवाई की जा सकती है. उनके पास यह विकल्प नहीं होता है कि वो इस रकम को रख लें और इस पर देय इनकम टैक्स का भुगतान करें.'

इसके पहले मिलते थे केवल दो विकल्प-सरकार के सिस्टम के तहत, कर्मचारियों के पास पहले दो विकल्प हुआ करते थे. पहला तो यह कि वो ट्रैवल करें और खर्च करें. इसमें होटल, खाने आदि का खर्च शामिल होता था. उनके पास दूसरा विकल्प होता था कि तय तारीख के अंदर क्लेम नहीं करने पर उन्हें इस स्कीम का लाभ नहीं मिल सकेगा. लेकिन, अब इन कर्मचारियों को एक तीसरा विकल्प दे दिया गया है. वो ये कि कर्मचारी इस रकम को ट्रैवल के अलावा भी किसी अन्य खर्च के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. कोविड-19 महामारी के मौजूदा दौर में, ट्रैवल के दौरान संक्रमण के जोखिम को देखते हुए सरकार ने इस विकल्प की पेशकश की है.

सरकारी कर्मचारियों के बचत पर लॉकडाउन का कम असर-मंत्रालय ने यह भी बताया कि लॉकडाउन के बावजूद सरकारी कर्मचारियों की बचत पर बेहद कम असर पड़ा है. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कोई कटौती नहीं हुई है. ऐसे में सरकारी कर्मचारी इस​ स्थिति में हैं कि वो खर्च कर सकें, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़े. उनके पास अपनी पसंद और जरूरत की वस्तु या सेवा पर खर्च करने के लिए एलटीसी स्कीम का लाभ लेने का विकल्प होगा.

LTC के बदले स्पेशल पैकेज को कैसे कैलकुलेट करें?LTC के बदले स्पेशल पैकेज कर्मचारियों के खर्च से पता चलता है. इसलिए अगर कर्मचारी लीव इनकैशमंट की पूरी राशि और LTC किराये की 3 गुना राशि (बताई गई स्लैब) खर्च करता है, तो रिम्बर्समेंट की राशि कुल लीव इनकैशमेंट और कुल LTC किराये के बराबर होगी. अगर वह कम खर्च करता है, तो रिम्बर्समेंट की राशि उसी सीमा के मुताबिक तय होगी. इसे आसानी से ऐसे समझा जा सकता है:इसलिए अगर कर्मचारी की कोई खर्च करने की योजना है, जैसे कि उसे आने वाले त्योहारी सीजन में कुछ सामान खरीदना है, तो वह इस स्कीम को चुन सकता है.

कब तक खर्च कर सकते हैं राशि?प्रत्येक चार साल में सरकार अपने कर्मचारियों को उनकी पसंद के किसी गंतव्य की यात्रा के लिए एलटीसी देती है. इसके अलावा एक एलटीसी उन्हें उनके गृह राज्य की यात्रा के लिए दिया जाता है. सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से कर्मचारियों के लिए इस साल यात्रा करना मुश्किल है. ऐसे में सरकार ने उन्हें नकद वाउचर देने का फैसला किया है. इसे 31 मार्च 2021 तक खर्च करना होगा.

सरकार कितना करेगी खर्च?एलटीसी के लिए सरकार 5,675 करोड़ रुपये खर्च करेगी. वहीं केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों तथा बैंकों को 1,900 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से 19,000 करोड़ रुपये की मांग पैदा होगी. यदि आधे राज्यों ने इस दिशानिर्देश का पालन किया तो 9,000 करोड़ रुपये की मांग और पैदा होगी.
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