160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाला मेड इन इंडिया रेल इंजन तैयार, बेहद खास टेक्नोलॉजी का हुआ इस्तेमाल

भारतीय रेलवे ने बताया है कि देश में 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाला इंजन बनकर तैयार है.
भारतीय रेलवे ने बताया है कि देश में 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाला इंजन बनकर तैयार है.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने बताया कि चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (Chittaranjan Locomotive Works) के बनाए दोनों पैसेंजर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (PEL) को इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे तेज रफ्तार में भी एयर ड्रेग्स कम हो सके. इन दोनों लोकोमोटिव की क्षमता 6000 हॉर्सपॉवर होगी, जिससे यह 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 12:00 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. कई मोर्चों पर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा है कि यात्री ट्रेनों (Passenger Trains) की स्पीड बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटा की जाएगी. इंडियन रेलवे के इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (Chittaranjan Locomotive Works) ने एयरोडायनेमिक डिजाइन वाला WAP-5 पैसेंजर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव इंजन तैयार किया है. पहले बैच में दो इंजन तैयार किए गए हैं, जिनके नंबर है-35012 और 35013 हैं.

इन आधुनिक इंजनों की ये है खासियत
चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) के बनाए इन इंजनों को इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे तेज रफ्तार में भी एयर ड्रेग्स कम हो सके. ये पैसेंजर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (PEL) एनर्जी एफिसिएंट और डायनेमिक्ली स्टेबल होगा. इन दोनों लोकोमोटिव की क्षमता 6000 हॉर्सपॉवर होगी, जिससे यह 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम होंगे. ये लोकोमोटिव आईजीबीटी आधारित पर्पल्सन सिस्टम से लैस होंगे. ये लोकोमोटिव इंजन प्रीमियम पैसेंजर ट्रेनों में पुश-पुल मोड पर काम करेंगे.

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ड्राइवर डेस्क में भी किया है बदलाव


नए लोकोमोटिव इंजन को चलाने के दौरान ड्राइवरों की सहूलियत को ध्‍यान में रखकर कई जरूरी बदलाव भी किए गए हैं. तकनीकी बदलाव करते समय ध्‍यान रखा गया है कि लोको पायलट अपनी स्किल्‍स का सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें. इंजन में कंपोजिट कंवर्टर्स उपलब्ध कराया गया है ताकि ट्रेन के डिब्बों और पैंट्री कार में बिजली की आपूर्ति की जा सके. इससे ट्रेनों में अतिरिक्त डीजल पॉवर जेनेरेटर कार लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सीएलडब्ल्यू ने दावा किया है कि ये इंजन शोर मुक्त, प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल हैं. इन इंजनों के इस्तेमाल से ऊर्जा संरक्षण भी किया जा सकेगा. यहीं नहीं इन लोकोमोटिव इंजनों के रखरखाव पर कम समय का खर्च होगा, जिससे संटिंग टाइम बचेगा.

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इन रूट्स पर चलाने का लिया फैसला
भारतीय रेलवे पहले ही घोषणा कर चुका है कि दिल्ली-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई रूट्स पर ट्रेनों को 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा. रेलवे इन्हीं रूट्स पर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) भी बना रहा है, जिसका काम मार्च 2022 तक पूरा हो जाएगा. डीएफसी बन जाने से ट्रेनों के लिए ट्रेक खाली मिल सकेगा. बता दें कि भारतीय रेलवे पहले से ही तेजस, वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें चला रहा है.
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