रिलायंस को लेकर झूठी बातें फैलाई जा रही हैं, नए कानून से सिर्फ किसानों का ही फायदा: महाराष्ट्र शेतकारी संगठन

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

नये कृषि कानून को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक बतों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोमवार को एक बयान जारी किया है. कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि उसका कॉरपोरेट फार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से कोई लेनादेना नहीं है. ना ही कॉरपोरेट फार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सेक्टर में उतरने का इरादा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2021, 3:25 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के आधार पर कॉरपोरेट फार्मिंग (Corporate Farming) को लेकर फैलायी जा रही भ्रामक बातों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने आज स्पष्टीकरण जारी किया है. कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि पहले भी उसने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) नहीं की है और न ही आगे ऐसा करने का इरादा है. रिलायंस ने यह भी कहा है कि वो खेती की जमीन भी नहीं खरीद रही है. रिलायंस द्वारा सोमवार को स्पष्टीकरण जारी करने के बाद कई लोगों ने अपनी बातें रखी हैं.

महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनबट ने कहा कि कृषि कानून को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां किसानों की जमीन हड़प रही हैं. यह पूरी तरह से गलत है. हकीकत में कोई भी कंपनी ​किसी भी हालात में किसानों की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकती है. पिछले कई सालों से महाराष्ट्र और पंजाब में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग हो रही है. किसानों को ही इसका फायदा मिलता है. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत कोई भी किसानों की जमीन नहीं ले सकता है.

पंजाब के भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि रिलायंस का कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से पूरे देश में कोई लेनादेना नहीं है. रिलायंस का यह बयान बिल्कुल ठीक है. किसानों को गुमराह किया जा रहा है. टावर तोड़ने का नुकसान आम लोगों को ही उठाना पड़ रहा है. पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री सुरजीत ज्याणी ने कहा कि रिलायंस का कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से कोई लेना देना नहीं है. प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए रिलायंस का नाम लिया जा रहा है.

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विश्वास पाठक ने कहा कि मोदी सरकार जो नया कानून लेकर आई है, उसमें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अनिवार्य नहीं है. लेकिन अगर कोई कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करता है तो उससे किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए कानूनी प्रावधान हैं. अब रिलायंस इस धंधे में है ही नहीं, ऐसे में रिलायंस को टारगेट करना उचित नहीं है. किसी भी प्राइवेट कंपनी का इन्वेस्टमेंट होता है तो उसमें बैंकों द्वारा पब्लिक का ही पैसा होता है. इसलिए पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना सही बात नहीं है. जहां तक एमएसपी की बात है तो इसका भी प्रोटेक्शन दिया है. किसानों को यह बात समझनी चाहिए. किसी भी पब्लिक प्रॉपर्टी को डैमेज करने से पहले कई बार सोचना चाहिए. इससे आम लोगों का ही नुकसान होता है. कानून हाथ में लेना गलत बात है.

विजय सरदाना ने कहा कि कुछ लोग भारत के कॉरपोरेट को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. रिलायंस का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण है. जब उनसे पूछा गया कि क्या किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करनी चाहिए तो उन्होंने जवाब दिया कि जिस तरह से हमारे यहां जमीनों के रेट हैं और जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी है, उस तरह से देखें तो हिंदुस्तान में कॉरपोरेट फार्मिंग फिजिबल ही नहीं है.

जब भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन से पूछा गया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बयान जारी किया है कि उसका कॉरपोरेट फार्मिंग से लेनादेना नहीं है. क्या इससे विपक्ष का भ्रम दूर होगा? उन्होंने जवाब दिया कि ये बात सही है कि हर चीज को गलत तरीके से बताया जाता है कि ये कंपनी आएगी, गुलाम बना लेगी. ऐसा कहीं नहीं है. एमएसपी से नीचे खरीदने की इजाज़त किसी को नहीं है.



रिलायंस ने क्या स्पष्टीकरण जारी किया है?

बता दें कि सोमवार को ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बयान जारी कर कहा है कि उनका कॉरपोरेट फार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से कोई लेनादेना नहीं है. ना ही कॉरपोरेट फार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सेक्टर में उतरने का कोई इरादा है. रिलायंस ने अपने बयान में कहा है कि कॉरपोरेट फ़ार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए उसने कभी कोई ज़मीन नहीं ख़रीदी और ना ही खेती के लिए कोई ज़मीन ख़रीदेगी. रिलायंस ने साफ़ कहा कि वो किसानों से सीधे अनाज नहीं ख़रीदते हैं और उनके सप्लायर किसानों से सिर्फ़ MSP पर ही ख़रीदारी करते हैं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने यह भी साफ़ किया कि उसने कभी भी कम क़ीमत पर ख़रीदारी के लिए कोई लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया. रिलायंस ने कहा कि वो किसानों के साथ है, लेकिन हुड़दंग करने वालों के ख़िलाफ़ है. रिलायंस किसानों को शक्ति देने और उनकी बेहतरी के लिए समर्पित है.

(डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)
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