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44 स्टार्टअप्स बनें यूनिकॉर्न, 14 लाख नौकरियों के साथ 106 बिलियन डॉलर की संपत्ति भी बढ़ाई

41% यूनिकॉर्न भारत की स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु से हैं. इसके बाद दिल्ली में 34% और मुंबई में 14% स्टार्टअप्स हैं.
41% यूनिकॉर्न भारत की स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु से हैं. इसके बाद दिल्ली में 34% और मुंबई में 14% स्टार्टअप्स हैं.

बीते एक दशक में 44 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न कंपनियों में तब्दील हो गए हैं. इन कंपनियों के मार्केट कैप में 106 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो गई है. साथ ही, 14 लाख नौकरियां भी पैदा की हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 10:12 AM IST
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नई दिल्ली. देश में नई कंपनियां यानी स्टार्टअप्स (Startups ) की वैल्यू तेजी से बढ़ रही है. बीते एक दशक में 44 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न (Unicorn, ऐसे स्टार्टअप्स जिनका मूल्य एक बिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाता है) कंपनियों में तब्दील हो गए हैं. इससे इन कंपनियों के मार्केट कैप या संपत्ति में कुल 106 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो गई है. यही नहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की 14 लाख नौकरियां भी पैदा की हैं.

वेंचर कैपिटल फंड ओरियोस वेंचर पार्टनर (Orios Venture Partners) की इंडियन टेक यूनिकॉर्न रिपोर्ट 2020 के मुताबिक मेकमाईट्रिप, इनमोबी, पेटीएम, बायजूस, कार्स 24, ओला समेत 44 स्टार्टअप ने 106 बिलियन डॉलर की पूंजी जोड़ी है. इससे यह सभी स्टार्टअप अब यूनिकॉर्न में बदल गए हैं. सिर्फ 2020 में, रेजरपे, पाइनलैब्स, जीरोधा और पोस्टमैन समेत 12 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गए है. यह एक साल में सबसे अधिक की बढ़ोतरी है.
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सबसे ज्यादा फाइनेंसियल सेक्टर के स्टार्टअप्स को फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय भुगतान क्षेत्र यानी फाइनेंसियल सेक्टर में काम करने वाले स्टार्टअप्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है. इसके बाद रिटेल और सास (सेवा के रूप में सॉफ्टवेयर) का नंबर आता है. अन्य वर्टिकल में लॉजिस्टिक्स, डेटा एनालिटिक्स, ट्रैवल, फूड और गेमिंग वाले स्टार्टअप शामिल हैं.


सबसे मूल्यवान पेटीएम, दूसरे नंबर पर बायजूस
यूनिकॉर्न क्लब में 16 बिलियन डॉलर की वैल्यू के साथ पेटीएम सबसे मूल्यवान है. इसके बाद एडटेक स्टार्टअप बायजूस का नंबर है. ओरोस वेंचर पार्टनर्स के मैनेजिंग पार्टनर रेहान यार खान के मुताबिक भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने फाउंडर्स, कर्मचारियों, निवेशकों और अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त मूल्य उत्पन्न किया है. इनमें से अधिकांश टेक्नोलॉजी बेस्ड हैं. खान ने कहा कि ओरियो ने शुरुआती दिनों से ओला, द्रुवा और फार्मेसा जैसे यूनिकॉर्न में निवेश किया है और अगले कुछ वर्षों में 3-5 अन्य स्टार्टअप्स की भी यूनिकॉर्न बनने की उम्मीद है.
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बेंगलुरू बनी स्टार्टअप्स की राजधानी
दिलचस्प बात यह है कि 41% यूनिकॉर्न भारत की स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु से हैं. इसके बाद दिल्ली में 34% और मुंबई में 14% स्टार्टअप्स हैं. ईवाई इंडिया के अंकुर पहवा ने कहा कि इस साल स्टार्टअप्स सार्वजनिक पेशकशों (आईपीओ) में तेजी ला सकते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि विभिन्न वर्टिकल में प्रॉफिटेबिलिटी और स्केल में सुधार हो रहा है.
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पहले यूनिकॉर्न बनने में 14 साल लगे, अब छह से भी कम लग रहे
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक स्टार्टअप बनने के लिए आठ साल की औसत समय अवधि अब कम हो रही है. इसकी वजह वैश्विक निवेश की उपलब्धता और सुलभ पूंजी उपलब्धता है. 2005 से पहले Naukri.com, MakeMyTrip की स्थापना की गई थी, जिसे यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने में 14 साल लगे. जबकि, Zomato, Flipkart और Policy Bazaar को लगभग 8.7 साल लगे. Nykaa और Oyo ने 5.8 वर्षों में भी कम समय लिया है. अब Udaan और Ola Electric को केवल तीन साल का समय लगा है. जनवरी में इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम ने कहा था कि 2021 में कम से कम 12 यूनिकॉर्न बन जाएंगे.
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