Gold Jewellery पर अनिवार्य हॉलमार्किंग के फैसले को वापस लिया जा रहा है? जानें सरकार ने क्या कहा

सोने के गहनों और कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था 16 जून से फेज बाय फेज तरीके से लागू हो गई है.

Gold Jewellery Hallmarking: सोने के गहनों और कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था 16 जून से फेज बाय फेज तरीके से लागू हो गई है.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने हाल ही फैसला लिया कि 16 जून 2021 से देश में सिर्फ बीआईएस की हॉलमार्किंग (BIS hallmarking) के आभूषण ही बिकेंगे. यानी कि 15 जून से देश में हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई और अब ज्वेलर्स सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वैलरी ही बेच सकेंगे. इस बीच एक खबर वायरल हो रहा है कि सरकार गोल्ड ज्वैलरी (Gold jewellery)की हॉलमार्किंग वापस ले रही है. हालांकि, मंगलवार को सरकार की ओर से इस खबर का खंडन किया गया और कहा गया कि गोल्ड jewellery पर अनिवार्य रूप से hallmarking जारी रहेगी और इसे अलग-अलग फेज के जरिये क्रियान्वित किया जा रहा है.

    जानें क्या है सरकार की राय?
    सरकार ने मंगलवार को कहा कि सोने के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 16 जून से चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और इसे वापस लेने का सर्कुलर 'फर्जी' है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "सोशल मीडिया के कुछ वर्गों में प्रसारित समाचार कि सोने के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के संबंध में भारत सरकार के आदेश को वापस ले लिया गया है, फर्जी है."

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    256 जिलों में इसे लागू किया गया है
    बता दें कि सोने के गहनों और कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था 16 जून से फेज बाय फेज तरीके से लागू हो गई है. सरकार ने पहले फेज में 256 जिलों को शामिल किया है. हॉलमार्किंग के नियम के तहत, कोई जौहरी या सर्राफा अपने ग्राहकों को एक तरह की क्वालिटी देता है. अभी 14,18,20,22,23 और 24 कैरेट की जूलरी बेचने की अनुमति दी गई है.

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