सेबी ने FPI के लिए आसान किए KYC नियम, बोर्ड बैठक में हुए ये अहम फैसले

भाषा
Updated: August 21, 2019, 7:51 PM IST
सेबी ने FPI के लिए आसान किए KYC नियम, बोर्ड बैठक में हुए ये अहम फैसले
अब बाजार के बाहर भी खरीद सकेंगे सिक्योरिटीज

सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए नियामकीय व्यवस्था को आसान करते हुए उनके लिए केवाईसी (Know Your Custorm) नियमों को आसान बनाया.

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मार्केट रेगुलेट भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के बोर्ड की बैठक में आज कई अहम फैसले हुए. सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए नियामकीय व्यवस्था को आसान करते हुए उनके लिए केवाईसी (Know Your Custorm) नियमों को आसान बनाया. साथ ही बाजार के बाहर प्रतिभूतियों के लेनदेन की अनुमति भी दी है. सेबी के बोर्ड की बैठक के दौरान इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और उसमें तेजी लाने के मद्देनजर ये कदम उठाए गए हैं. नई व्यवस्था के तहत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को तीन के बजाए दो श्रेणियों में बांटा जाएगा.

बाजार नियामक ने बोर्ड की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा, केवाईसी के लिए जरूरी दस्तावेजी कामकाज को आसानी बनाया गया है. भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एच. आर. खान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के आधार पर एफपीआई नियमों को नए सिरे से तैयार किया गया है.

IFSC यूनिट्स को FPI नियमों को मानना होगा
विदेशी में जारी डेरिवेटिव उत्पाद के सब्सक्रिप्शन और जारी करने की आवश्यकताओं को भी तर्कसंगत बनाया गया है. म्यूचुअल फंड की ओर से पेश विदेशी कोषों को एफपीआई के रूप में पंजीकरण करने के बाद देश में निवेश करने की अनुमति होगी. इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में स्थापित इकाइयों को एफपीआई के मानदंडों को ही मानना होगा. सेबी ने विज्ञप्ति में कहा, एफपीआई को घरेलू या विदेशी निवेशकों को बाजार के बाहर प्रतिभूतियों के लेनदेन (स्थानांतरण) की अनुमति होगी. ये प्रतिभूतियां असूचीबद्ध, निलंबित, आसानी से नकदी में नहीं परिवर्तित होने वाली होंगी.

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इसके अलावा, बहु निवेश प्रबंधक (MIM) के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है. ऐसे केंद्रीय बैंक जो अंतर्राष्ट्रीय निपटान बैंक के सदस्य नहीं है विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के रूप में पंजीकरण करने के लिए पात्र होंगे. इसका उद्देश्य बाजार में ज्यादा से ज्यादा विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है.

रेटिंग एजेंसियों लोन चूक की जानकारी देना अनिवार्य
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सेबी के नए नियम के अनुसार अब कंपनियों को कर्ज चूक या डिफॉल्ट से संबंधित पूरी जानकारी रेटिंग एजेंसियों को मुहैया करानी अनिवार्य होगी. यह निर्णय ऐसे स्थिति में किया गया है जबकि बैंक अपने ग्राहकों की गोपनीयता का हवाला देकर कंपनियों की ओर से लोन की किस्ते चुकाने में देरी या चूक होने की जानकारी देने से कतराते हैं. बड़ी कंपनियों के लोन भुगतान में चूक के काफी मामले सामने आए हैं. इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) का मामला भी सामने आया है. इससे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां भी सवालों के घेरे में आ गई हैं.

रेटिंग एजेंसियों द्वारा जिन प्रतिभूतियों या इकाइयों की रेटिंग दी गई है, उनको लेकर संभावित जोखिमों का वे पता लगाने में विफल रही हैं. हालांकि, रेटिंग एजेंसियों ने इसका पूरा दोष कंपनियों पर डालते हुए कहा है कि उन्हें बैंक के ऋण भुगतान में विलंब या चूक से संबंधित पूरी जानकारी इकाइयों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

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इस नियामकीय खामी को दूर करने के लिए सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के संबंध में अपने नियमनों में बदलाव किया है. ऐसे में किसी भी सूचीबद्ध या गैर सूचीबद्ध इकाई को रेटिंग हासिल करने से पहले रेटिंग एजेंसियों को अपने मौजूदा और भविष्य के कर्ज तथा लोन भुगतान में विलंब या चूक की पूरी जानकारी देनी होगी. सेबी के निदेशक मंडल की यहां हुई बैठक में इस बारे में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. नियामक का कहना है कि इससे रेटिंग एजेंसियों को संभावित डिफॉल्ट के बारे में समय पर जानकारी मिल सकेगी. इस कदम से रेटिंग एजेंसियों को रेटिंग वाली इकाइयों की वित्तीय स्थिति का बेहतर तरीके से आकलन करने में मदद मिलेगी. रेटिंग एजेंसी और उसके ग्राहक या प्रतिभूतियों को जारी करने वाले के बीच रेटिंग करार के प्रावधानों की निगरानी सेबी (साख निर्धारण एजेंसियां) नियमन के तहत की जाती हैं. यह नियमन 1999 में बना था.

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First published: August 21, 2019, 7:51 PM IST
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