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नए कोरोना वेरिएंट Omicron ने पैर पसारे तो क्या होगा शेयर मार्केट का? जानिए

नए कोरोना वेरिएंट Omicron ने पैर पसारे तो क्या होगा शेयर मार्केट का? जानिए

कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (New Corona Variant Omicron) की आहट से ही दुनियाभर के बाजारों (Global Market) में डर का माहौल है.

कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (New Corona Variant Omicron) की आहट से ही दुनियाभर के बाजारों (Global Market) में डर का माहौल है.

कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (New Corona Variant Omicron) की आहट से ही दुनियाभर के बाजारों (Global Market) में डर का माहौल है. कोविड के इस नए वेरिएंट को B.1.1.529 के नाम से भी जाना जाता है. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि इंफेक्शन की दर बढ़ती रहेगी तो बाजार में और गिरावट नहीं आएगी. अब जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि कोरोना का यह नया वेरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं है, तब तक बाजार में डर का माहौल बना रहेगा. निवेशकों को एक बार फिर से महसूस हो रहा है कि बाजार में पूरी तरह लॉकडाउन (Lockdown) ना हो जाए. इसी तरह के सेंटीमेंट्स की वजह से बाजार से बड़ा पैसा निकाला जा रहा है.

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    नई दिल्ली. पिछले सप्ताह शेयर मार्केट (Share Market) में काफी ज्यादा गिरावट देखी गई है. सेंसेक्स में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट हुई है. बाजार ने अक्टूबर में 52 सप्ताह का हाई बनाया था, लेकिन वहां से बाजार अब तक 9 प्रतिशत तक नीचे आ गया है. कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (New Corona Variant Omicron) की आहट से ही दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है.

    कोविड के इस नए वेरिएंट को B.1.1.529 के नाम से भी जाना जाता है. साउथ अफ्रीका में इसके कुछ केस सामने आए हैं. साउथ अफ्रीका के बाद ओमिक्रॉन वेरिएंट के चंद मामले यूनाइटेड किंगडम, इजरायल, बेल्जियम, नीदरलैंड और हांगकांग में भी सामने आए हैं. इसकी वजह से ही यूरोपीयन मार्केट पर भी इसका असर देखा गया है. शुक्रवार को डाउ जॉन्स (Dow Jones) 1000 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ है.

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    कब तक रहेगा डर का माहौल
    इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि इंफेक्शन की दर बढ़ती रहेगी तो बाजार में और गिरावट नहीं आएगी. ग्लोबल मार्केट भी पिछले हफ्ते डर के साए में रही. भारतीय बाजार अपने उच्चतम स्तर से 9% तक नीचे आ गया. एफआईआई (FIIs) अपनी पोजीशंस को बड़े स्तर पर कम कर रहे हैं. अब जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि कोरोना का यह नया वेरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं है, तब तक बाजार में डर का माहौल बना रहेगा.

    इसके अलावा फेडरल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बदलाव किया है, जोकि पहले से निर्धारित नहीं था. फेडरल द्वारा इस तरह का कदम उठाया जाना भी बाजार के लिए नकारात्मक साबित हुआ है. उधर कोरोनावायरस के नए वेरिएंट के मिलने के बाद यूरोप में साउथ अफ्रीका से आने वाली फ्लाइट्स पर अस्थाई तौर पर प्रतिबंध लगाया है. निवेशकों को एक बार फिर से यह महसूस हो रहा है कि बाजार में पूरी तरह लॉकडाउन ना हो जाए. इसी तरह के सेंटीमेंट्स की वजह से बाजार से बड़ा पैसा निकाला जा रहा है.

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    बाजार का गिरना, निवेश का मौका
    बाजार का गिरना हालांकि सुखद नहीं है, फिर भी एक्सपर्ट का मानना है कि जब जब बाजार इस तरह से गिरता है, तब तब अच्छे स्टॉप्स में निवेश करने का मौका बनता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसे स्टॉक्स में पैसा डालना चाहिए, जिनका फंडामेंटल और मैनेजमेंट अच्छा है. कोरोना काल में ब्लू चिप स्टॉक्स ने अच्छा रिटर्न दिया है और यदि लॉकडाउन की स्थिति फिर से बनती है तब भी ब्लू चिप स्टॉक्स में निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इस तरह के स्टॉक यदि नीचे की कीमतों में मिलते हैं तो उन्हें उठा लेने में कोई बुराई नहीं है.

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    इसके अलावा, जैसे कि पिछली बार हमने देखा था कि कोरोनावायरस के दौरान हुए लॉकडाउन में फार्मा सेक्टर में काफी तेजी आई थी. तो इस सेक्टर के फंडामेंटली स्ट्रांग स्टॉक्स में पैसा डाला जा सकता है. कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड के इक्विटी रिसर्च (रिटेल) के हेड श्रीकांत चौहान कहते हैं कि आने वाले कुछ समय के लिए इक्विटी मार्केट पर नए कोविड वेरिएंट, महंगाई के आंकड़े और सेंट्रल बैंक की पॉलिसी का असर दिखेगा.

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