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शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर इतने साल कर सकती हैं सरकार, जानिए पूरा मामला

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Updated: February 6, 2020, 8:40 AM IST
शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर इतने साल कर सकती हैं सरकार, जानिए पूरा मामला
इसके पीछे का मकसद मातृत्व मृत्युदर (maternal mortality) में कमी लाना है.

अंग्रेजी के बिज़नेस अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, सरकार इस पर विचार कर रही हैं. इसके पीछे का मकसद मातृत्व मृत्युदर (maternal mortality) में कमी लाना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने पिछले हफ्ते अपने बजट भाषण में कहा था कि महिला के मां बनने की सही उम्र के बारे में सलाह देने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई जाएगी.

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  • Last Updated: February 6, 2020, 8:40 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जल्द शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल कर सकती हैं. अंग्रेजी के बिज़नेस अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, सरकार इस पर विचार कर रही हैं. इसके पीछे का मकसद मातृत्व मृत्युदर (maternal mortality) में कमी लाना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने पिछले हफ्ते अपने बजट भाषण में कहा था कि महिला के मां बनने की सही उम्र के बारे में सलाह देने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई जाएगी. सरकार की इस कवायद के पीछ सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है. मौजूदा समय में लड़की की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के के लिए 21 साल तय है.

क्या हैं मामला-इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने अखाबर को बताया हैं कि सुप्रीम कोर्ट का अक्टूबर 2017 में आया एक फैसला सरकार की इस कवायद की वजह हो सकता है. कोर्ट ने कहा था कि वैवाहिक बलात्कार (marital rape) से लड़की को बचाने के लिए बाल विवाह पूरी तरह से अवैध माना जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के लिए न्यूनतम उम्र के बारे में फैसला लेने का काम सरकार पर छोड़ दिया था. वहीं, दूसरी ओर कहा जा रहा हैं कि अगर मां बनने की कानूनी उम्र 21 साल तय कर दी जाती है तो महिला की बच्चे पैदा करने की क्षमता वाले सालों की संख्या अपने आप घट जाएगी.

>> यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 27 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले और सात प्रतिशत लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है.

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>> भारत के कुछ राज्यों और समुदायों में बाल विवाह होना अब भी आम है. बाल विवाह को रोकने के लिए भारत में कड़े कानून हैं. लेकिन फिर भी ऐसे मामले अकसर सामने आते रहते हैं.

पाकिस्‍तान, माता, पिता,

>> विवाह की न्यूनतम उम्र को लेकर भारत में लंबी बहस चलती आई है. अंग्रेजों के समय में शादी को लेकर पहली बार भारत में कानून बने थे. इन कानूनों में समय-समय पर बदलाव कर इसे 21 और 18 साल की उम्र तय किया गया थी.>> 1955 में नया हिंदू मैरिज एक्ट बनाया गया. यह कानून हिंदुओं के साथ जैन, बौद्ध और सिखों पर भी लागू हुआ करता था. 2012 में सिखों के लिए अपना अलग आनंद मैरिज बिल लागू किया गया. हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक शादी के लिए लड़के की निम्नतम आयु 18 साल और लड़की की निम्नतम आयु 15 साल होना जरूरी था.

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिनकी इस सीजन में शादी (Marriage) होने वाली है तो ये खबर आपके लिए है पढ़ना बहुत जरूरी है. हम आपको बता रहे हैं वेडिंग इंश्योरेंस (Wedding Insurance) के बारे में इसकी मदद से आप अपनी शादी पर होने वाले खर्च से लेकर खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं.
शादी पर होने वाले खर्च से लेकर खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं


>> पारसी मैरिज एक्ट के मुताबिक लड़के की उम्र 18 और लड़की की उम्र 15 साल होनी चाहिए. 1978 में बाल विवाह कानून में संशोधन किया गया. इसमें लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल कर दी गई. यह कानून सभी धर्मों पर लागू होता है.

>> साल 2018 में लॉ कमीशन ने भी तर्क दिया था कि शादी की उम्र में अंतर रखना पति के उम्र में बड़े और पत्नी के छोटे होने के रूढ़िवाद को बढ़ावा देता है. इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

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First published: February 5, 2020, 5:52 PM IST
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