मारुति सुजुकी ने खारिज की सीतारमण की दलील, कहा- मंदी की वजह ओला-उबर ही नहीं

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Updated: September 12, 2019, 2:55 PM IST
मारुति सुजुकी ने खारिज की सीतारमण की दलील, कहा- मंदी की वजह ओला-उबर ही नहीं
युवा आबादी में ओला, उबर सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) का कोई ठोस कारण नहीं है, बल्कि इसके उलट इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने ने के लिए एक बड़ी रिसर्च की जाने की जरूरत है.

युवा आबादी में ओला, उबर सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) का कोई ठोस कारण नहीं है, बल्कि इसके उलट इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने ने के लिए एक बड़ी रिसर्च की जाने की जरूरत है.

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  • Last Updated: September 12, 2019, 2:55 PM IST
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नई दिल्ली. युवा आबादी में ओला, उबर सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) का कोई ठोस कारण नहीं है, बल्कि इसके उलट इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने ने  के लिए एक बड़ी रिसर्च की जाने की जरूरत है. यह बात देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) के एक शीर्ष अधिकारी ने कही है. मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के सेल्स एंड मार्केटिंग विभाग के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने पीटीआई-भाषा को एक इंटरव्यू में बताया कि भारत में कार खरीदने को लेकर धारणा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है और लोग अपनी आकांक्षा के तहत कार खरीदते हैं.

इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार को कहा था कि ज्यादातर लोगों की सोच में बदलाव आया है जो अब मासिक किस्त देने की जगह ओला और उबर जैसी टैक्सी सेवा का लाभ लेना पसंद करते हैं और यह आटो मोबाइल क्षेत्र में मंदी के कई कारणों में से एक है.

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श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा मंदी के पीछे ओला और उबर जैसी सेवाओं का होना कोई बड़ा कारण नहीं है. मुझे लगता है कि इस तरह के निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले हमें और गौर करना होगा और साथ ही बड़ा अध्ययन करना होगा. उन्होंने कहा कि ओला और उबर जैसी सेवायें पिछले 6-7 वर्षो में सामने आई हैं. इसी टाइम पीरियड में आटो उद्योग ने कुछ बेहतरीन अनुभव भी हासिल किये हैं. इसलिए केवल पिछले कुछ एक महीनों में ऐसा क्या हुआ कि मंदी गंभीर होती चली गई? मुझे नहीं लगता कि ऐसा केवल ओला और उबर की वजह से हुआ है.

उन्होंने कहा कि मंदी से निपटने के लिए पिछले माह घोषित किये गये सरकार के उपाय पर्याप्त नहीं हैं और ये उपाय उद्योग के लॉन्ग टर्म स्वास्थ्य के लिए मददगार हो सकते हैं क्योंकि ये बुनियादी तौर पर ग्राहकों की धारणाओं पर ध्यान देते हैं. सोसायटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (एसआईएएम) के अनुसार अगस्त महीने में घरेलू वाहनों की बिक्री 23.55 प्रतिशत घटकर 18,21,490 इकाई रह गई जो पिछले वर्ष के इसी महीने में 23,82,436 इकाई हुई थी.



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First published: September 12, 2019, 10:03 AM IST
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