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भारत में मेडिकल टूरिज़्म का तेज विकास- ‘हील इन इंडिया’ ने दुनियाभर में मजबूत की भारत की स्थिति

हील इन इंडिया ने भारत में हेल्‍थ इकोसिस्‍टम को मजबूत बनाया है.

हील इन इंडिया ने भारत में हेल्‍थ इकोसिस्‍टम को मजबूत बनाया है.

भारत में हेल्थकेयर इंडस्ट्री का कुल मिलाकर मार्केट वैल्‍यू 2022 तक 372 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. भारत पहले से ही दुनि ...अधिक पढ़ें

    आज किसी भी दादा-दादी से भारत की हेल्थ सर्विस (स्वास्थ्य सेवा) में अचानक हुए बदलाव के बारे में पूछें, तो आप देखेंगे कि उनके चेहरे खिल उठते हैं. बहुत समय पहले की बात नहीं है, जब भारतीयों को ऐसी बीमारियों या स्थितियों का सामना करना पड़ा जिन्हें जटिल सर्जरी या संभावित इलाज की ज़रूरत थी. इसके इलाज के लिए भारतीयों ने पश्चिमी देशों का सहारा लिया था. अब स्थिति यह है कि दुनियाभर के लोग इलाज के लिए भारत आते हैं. भारतीय हेल्थकेयर इंडस्ट्री उच्च गुणवत्ता और आर्थिक रूप से सक्षम विकल्प के रूप में दुनिया भर में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है, ऐसे समय में जब पश्चिम देशों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल कठिन होता जा रहा है.

    भारत में हेल्थकेयर इंडस्ट्री में अस्पताल, मेडिकल डिवाइस (चिकित्सा उपकरण), क्लीनिकल ट्रायल (नैदानिक परीक्षण), आउटसोर्सिंग, टेलीमेडिसिन, मेडिकल टूरिज़्म (चिकित्सा पर्यटन), हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) और मेडिकल इक्विपमेंट (चिकित्सीय उपकरण) शामिल हैं. लाइफ़स्टाइल से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती घटनाएं, किफ़ायती हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम (स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली) की बढ़ती मांग, तकनीकी विकास, टेलीमेडिसिन का उदय, तेज़ी से हेल्थ इंश्योरेंस की पैठ और ई-हेल्थ (टैक्स छूट लाभ और प्रोत्साहन राशि के साथ) जैसी सरकारी पहल भारत में हेल्थ मार्केट को आगे बढ़ा रही है.

    भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री में संभावना
    2020 में Indian Healthtech industry की मार्केट वैल्‍यू 1.9 अरब डॉलर थी. इसके 2023 तक सिर्फ़ 3 साल में 5 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है. हम डायग्नोस्टिक्स मार्केट में इसी तरह के रुझान देखते हैं, जो 2012 के सिर्फ़ 5 अरब डॉलर से बढ़कर 2022 में 32 अरब डॉलर तक पहुंच रहा है. इस दौरान सालाना CAGR 20.4% रहा. टेलीमेडिसिन के भी 2025 तक 5.4 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. नेशनल डिजिटल हेल्थ ब्लूप्रिंट का बाजार अगले 10 साल में करीब 200 अरब डॉलर हो जाएगा.

    इस तरह देखा जाए तो भारत में हेल्थकेयर इंडस्ट्री का कुल मिलाकर मार्केट वैल्‍यू 2022 तक 372 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. भारत पहले से ही दुनिया की फार्मेसी हब बना हुआ है. अब भारत सरकार के 2022-23 के केंद्रीय बजट में 86,200 करोड़ रुपये का आवंटन मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) में अपेक्षित वृद्धि के लिए भारत के हेल्थकेयर संबंधी बुनियादी ढांचे को तैयार करने में मील का पत्थर साबित होने वाला है.

    फिलहाल, 2020-21 के लिए मेडिकल टूरिज़्म इंडेक्स (MTI) में India की रैंक 10वीं है. यह बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी का एक संयोजन है. भारत उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल ट्रेनिंग (चिकित्सा प्रशिक्षण) के साथ-साथ अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह बोलने वाले डॉक्टर और पैरामेडिक्स स्टाफ़ का सबसे बड़ा पूल प्रदान करता है. भारत दुनिया में सबसे अधिक मेडिकल कॉलेज होने का दावा करता है और साल 2022 में 10 लाख कुशल हेल्‍थकेयर सेवाप्रदाताओं को शामिल किए जाने की उम्‍मीद है. अब National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers (NABH) के तहत 1,400 hospitals को ग्लोबल स्टैंडर्ड (वैश्विक मानकों) के बराबर या उससे ज़्यादा हेल्थकेयर प्रदान करने वाला माना गया है.

    ‘अतिथि देवो भव’ के साथ ‘सेवा’ के मैंडेट (जनादेश) वाले Heal in India के जरिए दुनिया को आमंत्रित करते हुए, भारत सरकार मेडिकल और वेलनेस टूरिज़्म के लिए दुनिया के अग्रणी हब के रूप में भारत को स्थापित करने के लिए समर्पित है. इन पहलों में, एक MVT (एमवीटी) पोर्टल भी है, जिसका उद्देश्य भारत में मेडिकल ट्रैवलर को उनकी यात्रा शुरू करने से लेकर आखिरी तक एक सहज अनुभव प्रदान करना है. इसके ज़रिए मरीज और मरीज की देखभाल करने वाले लोग प्रक्रियाओं, शहरों, अस्पतालों के आधार पर सर्विस प्रोवाइडर और यहां तक कि किसी विशेष डॉक्टर को खोजने में सक्षम हैं. वे न सिर्फ़ एलोपैथी और इंटीग्रेटेड मेडिसीन के लिए, बल्कि मेडिसीन के पारंपरिक भारतीय पद्धति के लिए भी पारदर्शी प्राइस पैकेज ऑनलाइन एक्सेस करने में सक्षम हैं. वे NABH (एनएबीएच) पैनल में शामिल MVT (एमवीटी) फ़ैसिलिटेटर्स के ज़रिए अपनी यात्रा की व्यवस्था करने में भी सक्षम हैं.

    तीन श्रेणी में मेडिकल ट्रैवल करते हैं विदेशी
    मेडिकल ट्रीटमेंट : सर्जरी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, जॉइंट री-प्लेसमेंट, कैंसर और पुरानी बीमारी के इलाज वगैरह सहित रोगनिवारक उद्देश्यों के इलाज.
    वेलनेस और रिजुवनेशन : शारीरिक कायाकल्प या सौंदर्य संबंधी इलाज जैसे कॉस्मेटिक सर्जरी, स्ट्रेस रिलीफ़, स्पा वगैरह पर केंद्रित.
    ट्रेडिशनल मेडिसीन : आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के तहत भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति.

    भारत में मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को क्या प्रेरित करता है?
    शुरुआत करने वाले लोगों के लिए फ़ाइनेंशियल सेविंग (वित्तीय बचत) बहुत अहम है. भारत अमेरिका की तुलना में 65-90% की सेविंग के साथ कम लागत पर विश्व स्तरीय हेल्थकेयर सर्विस और इलाज उपलब्ध करा रहा है. उच्च गुणवत्ता और कम लागत का संयोजन भारत को पश्चिमी देशों के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनाता है, जिन्हें अपने घरेलू देशों में समान मेडिकल प्रक्रियाओं के लिए लंबा इंतज़ार या बड़ी लागत लगानी पड़ती है.

    भारतीय अस्पतालों ने रोबोटिक सर्जरी, रेडिएशन, साइबरनाइफ़ स्टीरियोटैक्टिक ऑप्शन, IMRT/IGRT (आईएमआरटी/आईजीआरटी), ट्रांसप्लांट सपोर्ट सिस्टम वगैरह जैसे अत्याधुनिक तकनीकों में भारी इन्वेस्ट किया है. भारत कुछ सबसे नामी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और मेडिकल सेवाओं का भी देश है. जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल रियलिटी (VR) और समग्र मेडिसीन जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करके रोगियों को नए और सबसे उन्नत इलाज का विकल्प प्रदान करता है.

    एक अन्य वजह भारत में मेडिकल ट्रीटमेंट (चिकित्सा इलाज) के अनेक विकल्प उपलब्ध होना भी इसे एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनाता है. भारत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी का केंद्र बिंदु है, इन सभी को अब Ministry of AYUSH के तत्वावधान में लाया गया है और लगातार रोगी को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए रेगुलेट किया गया है. योग आश्रम, स्पा और वेलनेस सेंटर जो संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराते हैं, वे भी वेलनेस माइंडेट मेडिकल टूरिस्ट को आकर्षित करते हैं.

    हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण कारक जो रोगियों और उनकी देखभाल करने वालों को भारत लाता है, वह है गुणवत्ता का भरोसा. भारत के नेशनल मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज़्म बोर्ड का गठन पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में एक समर्पित और व्यापक संस्थागत ढांचा प्रदान करने के लिए किया गया है जो मेडिकल टूरिज़्म (चिकित्सा पर्यटन) को बढ़ावा देता है और बढ़ाता है. इसमें भारतीय चिकित्सा पद्धति भी शामिल है. बोर्ड मूल संगठन के रूप में कार्य करता है जो आयुष (AYUSH) मंत्रालय और NABH (एनएबीएच) के प्रतिनिधित्व के साथ मेडिकल टूरिज़्म को नियंत्रित करता है और बढ़ावा देता है.

    भारत की गुणवत्ता से जुड़ी गतिविधि
    भारत ने विशेष रूप से रोगी सुरक्षा के संदर्भ में गुणवत्ता से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करने की आवश्यकता को पहचाना. क्वालिटी काउंसिल ऑफ़ इंडिया (QCI) ने पिछले 25 साल में हमारे माल के गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करके और कई क्षेत्रों में उत्पादों को प्रमाणित करके भारत में गुणवत्ता से जुड़ी गतिविधि को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. भारत की संसद में उठाए गए एक प्रश्न के परिणामस्वरूप, अप्रैल 2005 में QCI (क्यूसीआई) के तत्वावधान में NABH (एनएबीएच) का गठन किया गया था.

    NABH (एनएबीएच) ने हेल्थकेयर सर्विस में गुणवत्ता और सुरक्षा के वैश्विक मानकों को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रणाली विकसित करने की दृष्टि से अपनी यात्रा शुरू की. NABH (एनएबीएच) ने 2006 में भारत में हेल्थकेयर संगठनों को मान्यता देना शुरू किया और साल 2010 में इंटरनेशनल एक्रेडिएशन (अंतर्राष्ट्रीय प्रत्यायन) के लिए अपनी शाखा का विस्तार किया. यह नर्सिंग एक्सीलेंस प्रोग्राम, लेबोरेटरी सर्टिफ़िकेशन प्रोगाम और कई अन्य जैसे गुणवत्ता संवर्धन पहल भी करता है. यह शिक्षा और प्रशिक्षण पहल के साथ-साथ अनेक हेल्थकेयर क्वालिटी कोर्स (स्वास्थ्य देखभाल गुणवत्ता पाठ्यक्रमों) और वर्कशॉप (कार्यशालाओं) को मान्यता और सहयोग प्रदान करता है.

    NABH (एनएबीएच) संपूर्ण हेल्थकेयर को कवर करता है
    अस्पताल, छोटे हेल्थकेयर संगठन, ब्‍लड बैंक और ब्‍लड स्टोरेज सुविधाएं, मेडिकल इमेजिंग सर्विस, डेंटल हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर, एलोपैथिक क्लीनिक, आयुष अस्पताल और पंचकर्म क्लीनिक, आई केयर ऑर्गनाइज़ेशन, ओरल रीहैबिलटेशन सेंटर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, वेलनेस सेंटर, नशा रोगी के लिए इंटीग्रेटेड रीहैबिलटेशन सेंटर, साथ ही क्लीनिकल ट्रायल एथिक्स कमिटी को भी एनएबीएस कवर करता है.

    ये मान्यताएं कई सर्टिफ़िकेशन, शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा समर्थित हैं जिनकी मान्यता प्राप्त करने के लिए मेडिकल प्रोवाइडर को आवश्यकता हो सकती है. मानकों का पालन करने, विभिन्न संसाधन प्रदान करने और विशेषज्ञ उपलब्ध कराने के बीच, NABH (एनएबीएच) एक ऐसा   इकोसिस्टम बनाता है जो भारत में हेल्थकेयर अर्थव्यवस्था के केंद्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता और एकता बनाए रखता है.

    भारत की गुणवत्ता से जुड़ी गतिविधि, QCI (क्यूसीआई) और NABH (एनएबीएच) जैसे इसके घटक बोर्ड द्वारा संचालित है, भारत के मेडिकल इकोसिस्टम के लिए जो भी संभव है, इस पर लगातार दबाव बना रहा है. यह “गुणवत्ता से आत्मनिर्भरता” हमें अपनी सीमाओं से परे ले गया है. वे दिन गए जब भारतीयों को महंगी मेडिकल प्रक्रियाओं के लिए विदेश की यात्रा करनी पड़ती थी. इसके बजाय, भारत आज हजारों रोगियों और उनके देखभाल करने वालों की मेजबानी करता है, जो एक स्वस्थ कल की ओर अपनी यात्रा में गुणवत्तापूर्ण भारतीय संस्थानों, सर्विस प्रोवाइडर और यहां तक कि इंडिविजुअल डॉक्टर की तलाश करते हैं.

    QCI (क्यूसीआई), और भारत की ‘गुणवत्ता से आत्मानिर्भरता’ पहल और ऐसे कई तरीकों से जिसने हमारे जीवन को प्रभावित किया है, उसके बारे में और अधिक जानने के लिए https://www.news18.com/qci/ पर जाएं.

    -पार्टनर पोस्‍ट 

    Tags: Business news in hindi, Health Facilities, Healthcare workers

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