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सेहत के लिए केवल Mediclaim Policy काफी नहीं, अलग से भी बनाएं हेल्थकेयर फंड

सेहत के लिए केवल Mediclaim Policy काफी नहीं, अलग से भी बनाएं हेल्थकेयर फंड

घर का बजट बनाते समय इस तरह के मेडिकल खर्चों के लिए अलग से फंड बनाकर रखना चाहिए.

घर का बजट बनाते समय इस तरह के मेडिकल खर्चों के लिए अलग से फंड बनाकर रखना चाहिए.

Health Insurance Plan के साथ-साथ हमें नियमित मेडिकल खर्चों के लिए अलग से फंड बनाकर चलना चाहिए.

    Healthcare Fund Investment: बीते कुछ सालों में मेडिकल से जुड़े खर्चों में बेतहाशा इजाफा हुआ है. अब किसी मर्ज विशेष का इलाज करवाना किसी आम आदमी के बूते में नहीं रहा है. कोरोना काल में देखा कि एक ऐसा बुखार जिसकी कोई दवा नहीं थी, उसके इलाज के लिए अस्पतालों ने लाखों रुपये वसूल किए.

    हालांकि इस कोरोना महामारी ने हेल्थ इंश्योरेंस के महत्व को अच्छी तरह से समझा दिया है. आज की तारीख में एक आम आदमी अपने जेब से परिवार के किसी सदस्य की बहुत आम बीमारी का इलाज नहीं करा सकता है. डॉक्टरों की फीस 1000 रुपये के आसपास होती है और जो दवाएं वह लिखता है उनकी कीमत कई हजारों में होती है. इसमें जांच वगैरह का खर्च अलग है. अलग किसी मरीज को हफ्ते में दो बार डॉक्टर को दिखाने की जरूरत आ पड़ी तो घर का सारा बजट बिगड़ जाता है.

    इलाके के हिलाब से इलाज के खर्चे अलग-अलग होते हैं. महानगरों में इलाज की सुविधाएं ज्यादा हैं तो यहां के खर्चे एक आम तो क्या खास आदमी की पॉकेट से बहार है. दिल्ली के किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में बच्चा पैदा करने का खर्चा ही 2 लाख रुपये के आसपास बैठता है. यहां किसी बाल विशेषज्ञ की फीस 1,000 रुपये से कम नहीं है. और जब बात बच्चे की आती है तो आदमी किसी हद तक जाकर भी अपने बच्चे का इलाज करवाता है.

    इसलिए ऐसी स्थिति से उबरने के लिए मेडिकल इंश्योरेंस (Mediclaim Policy) एक अदद मददगार साबित होता है. लेकिन सवाल उठता है कि जिस कदर इलाज के खर्चे बढ़ रहे हैं उसमें 4-5 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस कवर पर्याप्त होगा, जवाब होगा- बिल्कुल नहीं.

    इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance Plan) के साथ-साथ हमें मेडिकल खर्चों के लिए अलग से फंड बनाकर चलना चाहिए.

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    अलग आप स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग फंड बना कर चलेंगे तो अचानक आई परेशानी में आपके घर का बजट नहीं बिगड़ेगा.

    हेल्थ इंश्योरेंस (Mediclaim Policy) तो लेकर ही रखना चाहिए, यह बात हमें गांठ बांध लेनी चाहिए. अब इंश्योरेंस के बाद भी अलग से कितना फंड तैयार करके चलें इसके लिए आपको अपने परिवार की जरूरत और अपने शहर में होने वाले मेडिकल खर्चों का अनुमान लगातार फंड तैयार करना चाहिए. कोरोना के बाद इंश्योरेंस (Insurance) की कीमतें भी बढ़ गई हैं.

    इंश्योरेंस के अलावा मेडिकल फंड बनाने की बात इसलिए की जा रही है क्योंकि इंश्योरेंस में कवरेज हॉस्पिटल में भर्ती होने और कुछ खास बीमारियों के इलाज के लिए होता है. इससे बाहर डॉक्टरों को दिखाने, दवा खरीदने, कोई जांच करवाने समेत तमाम ऐसे खर्चे हैं जो एक परिवार में आए दिन होते रहते हैं.

    इसलिए घर का बजट बनाते समय इस तरह के मेडिकल खर्चों के लिए अलग से फंड बनाकर रखना चाहिए. और डॉक्टर की फीस, मेडकिल स्टोर से दवा खरीदना तथा किसी जांच आदि पर होने वाले खर्च से कम से कम 3-4 गुना फंड बनाकर चलना चाहिए. अगर आप दिल्ली-मुंबई जैसे शहर में रह रहे हैं तो फंड को और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है.

    म्यूचुअल फंड में करें निवेश (Healthcare Mutual Funds)
    अब सवाल आता है कि इस फंड को कैसे इकट्ठा किया जाए, तो मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि मेडिकल खर्चों के लिए फंड तैयार करने के लिए आप अलग से म्यूचुअल फंड्स में सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से निवेश कर सकते हैं. इस एसआईपी को केवल हेल्थ फंड के लिए रखना चाहिए. अन्य टारगेट से इसका कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए.

    म्यूचुअल फंड में निवेश का फायदा यह होता है कि यह महंगाई की बढ़ती दर के हिसाब से आप एसआईपी में धीरे-धीरे इजाफा भफी कर सकते हैं. यहां आपको रिटर्न भी अच्छा मिलता है. और जरूरत पड़ने पर इस फंड से पैसा भी निकाल सकते हैं.

    केवल और केवल हेल्थ फंड
    यहां यह बात ध्यान रखें कि इस फंड का इस्तेमाल आप मेडिकल उद्देश्यों को छोड़कर अन्य जरूरतों के लिए नहीं करेंगे. किसी और काम के लिए किसी भी जरूरत आ जाए, आप इस फंड को हाथ नहीं लगाएंगे. क्योंकि अन्य कामों में आप समझौता कर सकते हैं, लेकिन परिवार के किसी सदस्य की बीमारी में नहीं.

    Tags: Health Insurance, Health insurance scheme, Mutual funds, Personal finance

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