MGNAREGA का नया रिकॉर्ड! लोगों को मिला अब तक का सबसे ज्‍यादा 387 करोड़ दिन का काम

बिहार ने मनरेगा के तहत महज 22.7 करोड़ दिन का रोजगार दिया.

बिहार ने मनरेगा के तहत महज 22.7 करोड़ दिन का रोजगार दिया.

देश के करीब सभी बड़े राज्यों ने वित्त वर्ष 2015-21 के दौरान मनरेगा (MGNREGA) संचालन में बढ़ोतरी हासिल की है. राजस्थान (Rajasthan) काम के मामले में सबसे ऊपर रहा है. इस दौरान योजना से 11.2 करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिला है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस संकट (Coronavirus Crisis) के कारण देश में 68 दिन लगे लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान आर्थिक गतिविधियां बंद रहने के कारण लाखों प्रवासी श्रमिक अपने-अपने घर लौट गए. हालांकि, इस बीच रोजगार गारंटी स्कीम यानी मनरेगा (MGNREGS) के तहत वित्त वर्ष 2015-21 में 387.7 करोड़ दिन का काम दिया गया. इससे 11.2 करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिला. ये योजना लागू होने के बाद से अब तक सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है. बता दें कि इस दौरान सभी बड़े राज्‍यों ने अपने मनरेगा संचालन में बढ़ोतरी हासिल की है.

राजस्‍थान काम देने में पहले, प. बंगाल दूसरे और यूपी तीसरे पायदान पर

राजस्थान मनरेगा के तहत काम के मामले में शीर्ष पायदान पर रहा है. राज्‍य में लोगों को 45.4 करोड़ दिन का काम दिया गया. इसके बाद पश्चिम बंगाल ने लोगों को 41.4 करोड़ दिन का काम दिया. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने मनरेगा के तहत 39.4 करोड़ दिन का रोजगार दिया. वहीं, मध्य प्रदेश ने 34.1 करोड़ और तमिलनाडु ने लोगों को 33.3 करोड़ दिन का रोजगार उपलब्‍ध कराया.

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महामारी में 7.5 करोड़ परिवारों की आय का जरिया बनी केंद्रीय योजना

कोरोना संकट के बीच बिहार में सबसे ज्‍यादा प्रवासी मजदूर घर लौटे. बावजूद इसके बिहार ने इस केंद्रीय योजना के तहत 22.7 करोड़ दिन का ही रोजगार दिया. महामारी के दौरान ये योजना करीब 7.5 करोड़ गरीब परिवारों की आय का जरिया बनी. पश्चिम बंगाल ने सबसे ज्‍यादा 1.2 करोड़ लोगों को योजना के तहत रोजगार दिया. इसके बाद तमिलनाडु में 1.16 करोड़ और राजस्थान में 1.1 करोड़ लोगों ने पिछले साल मनरेगा में काम किया है. वहीं, 79 लाख लोगों को बिहार में मनरेगा के तहत काम मिला है.
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