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माइकल पात्रा ने RBI डिप्टी गवर्नर का कार्यभार संभाला, 3 साल का होगा कार्यकाल

News18Hindi
Updated: January 15, 2020, 8:48 PM IST
माइकल पात्रा ने RBI डिप्टी गवर्नर का कार्यभार संभाला, 3 साल का होगा कार्यकाल
RBI के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा

माइकल पात्रा ने RBI में चौथे डिप्टी गवर्नर के रूप में पदभार संभाला. वह मौद्रिक नीति का कार्यभार संभालेंगे. वह सभी महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति में भी शामिल होंगे, जो ब्याज दर पर निर्णय लेती है.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 8:48 PM IST
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नई दिल्ली. माइकल पात्रा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिप्टी गवर्नर का कार्यभार संभाल लिया है. यह पद करीब छह महीने पहले विरल आचार्य के इस्तीफे के बाद से खाली पड़ा हुआ था. RBI का कहना है कि पात्रा मौद्रिक नीति, फाइनेंशियल मार्केट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट को देखेंगे. इसके साथ ही वो एमपीसी के मेंबर बने रहेंगे. माइकल पात्रा अगले 3 साल तक इस पद पर रहेंगे.

कई अर्थशास्त्रियों के इंडरव्यू के बाद माइकल पात्रा को इस पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है. Deputy governor in-charge of monetary policy आरबीआई का इनसाइडर न होकर सामान्य तौर पर इनडिपेंडेंट इकोनॉमिस्ट होता है.

पात्रा ने RBI में चौथे डिप्टी गवर्नर के रूप में पदभार संभाला. वह मौद्रिक नीति का कार्यभार संभालेंगे. वह सभी महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति में भी शामिल होंगे, जो ब्याज दर पर निर्णय लेती है. पात्रा उन उम्मीदवारों में से एक हैं, जिनका वित्त मंत्रालय की समिति ने साक्षात्कार लिया था. समिति में बैंकिंग और वित्त सचिव राजीव कुमार शामिल थे.

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कौन हैं माइकल पात्रा
माइकल ने आईआईटी मुंबई से इकोनॉमिक्स से पीएचडी किया है. अक्टूबर 2005 में मॉनिटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट में आने से पहले माइकल पात्रा रिजर्व बैंक में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं.

इन्होंने सन 1985 में रिजर्व बैंक को ज्वाइन किया था. माइकल पात्रा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के फेलो रह चुके हैं. इन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) में में डॉक्टरेट किया है.रेपो रेट में कटौती के समर्थक रहे हैं पात्रा
दास के दिसंबर 2018 में पद संभालने के बाद से रीपो रेट में लगातार तीन बार हुई कटौती में पात्रा ने हमेशा पक्ष में मतदान किया है. गवर्नर की तरह उनका भी मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नरम मौद्रिक नीति के साथ राजकोषीय स्तर पर मदद मिलना बहुत जरूरी है.

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First published: January 15, 2020, 8:48 PM IST
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