दूध पीने वालों के लिए बड़ी खबर! इतने रुपए तक बढ़ सकती हैं कीमतें

इस साल दूध का उत्पादन कम हो सकता है और डिमांड में तेजी आने की उम्मीद है. अगर दूध के दाम बढ़ते है तो अन्य डेरी प्रोडक्ट्स जैसे मक्खन, दही, घी और फ्लेवर्ड मिल्क के दाम भी बढ़ना तय है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2019, 1:42 PM IST
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अगर आप दूध पीने के शौकीन है तो ये आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. माना जा रहा है कि उत्पादन में कमी और डिमांड बढ़ने की वजह से दूध के दाम बढ़ सकते हैं. दूध के दामों में 1-2 लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, कंपनियों की ओर से अभी तक कोई घोषणा नहीं हुआ है.  आपको बता दें कि हाल में रेटिंग एजेंसी CRISIL की एक रिपोर्ट जारी हुई है. इसमें अनुमान लगाया गया है कि इस साल दूध का उत्पादन कम हो सकता है और डिमांड में तेजी आने की उम्मीद है. अगर दूध के दाम बढ़ते है तो अन्य डेरी प्रोडक्ट्स जैसे मक्खन, दही, घी और फ्लेवर्ड मिल्क आदि भी महंगे हो सकते हैं. हालांकि अमूल और मदर डेयरी ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. (ये भी पढ़ें: किसान क्रेडिट कार्ड के नियमों में हो चुका है बदलाव! इन चीजों के लिए भी मिलेगा 2 लाख का लोन!)

दाम बढ़ने के पीछे ये है वजह
दूध, आइसक्रीम या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स जल्द ही महंगे हो सकते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि उत्पादन में कमी के चलते दूध की कीमतें 1-2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक तरफ 2019-20 में दूध का उत्पादन 3 से 4 फीसदी घटने की उम्मीद है. वहीं दूध की खपत 6-7 फीसदी बढ़ने से भी दूध के दाम बढ़ेंगे.

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2017 में 1 रुपये/लीटर बढ़े थे दूध के दाम


आखिरी बार दूध के दाम 2017 में बढ़े थे. 2017 में दूध के दाम 1 रुपये प्रति लीटर से बढ़े थे. CRISIL रिपोर्ट के मुताबिक, इस वजह से स्किम्ड मिल्क का स्टॉक जल्द ही खत्म होने की उम्मीद है. दूनिया भर में स्किम्ड मिल्क के दाम 20 फीसदी से बढ़े हैं. मार्च 2018 के अंत में स्किम्ड मिल्क का 3 लाख टन का स्टॉक था. लेकिन इस स्टॉक के अब 25 फीसदी से घटने की उम्मीद है. बिना मलाई के दूध को स्किम्ड मिल्क कहते हैं.

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दूध और इससे जुड़े प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों को अब और कड़े नियमों का पालन करना पड़ेगा. फूड रेगुलेटर FSSAI ने डेयरी कंपनियों के लिए गाइडेंस डॉक्यूमेंट जारी किए हैं. आपको बता दें कि पिछले साल जारी हुई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो दूध बिक रहा है, उसमें से 68.7 फीसदी दूध और उससे बनी चीजें मिलावटी हैं. यह दूध FSSAI के मानकों पर खरा नहीं उतरता है. मिलावट के सबसे ज्यादा मामले उत्तर राज्यों में सामने आए हैं.

नए नियम जारी
>> 
दूध और इससे बने प्रोडक्ट्रस की खराब क्वालिटी से चिंतित FSSAI ने कड़े मापदंड बनाए
>> डेयरी प्रदूषित इलाकों से दूर हो
>> डेयरी में काम करने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए.
>> दूध इकट्ठा करते समय हाइजिन का खयाल रखा जाए
>> दूध की पैकैजिंग फूड ग्रेड मटैरियल में ही होना चाहिए.
>> कंपनी दूध के हर पैकेट को 24 घंटे में ट्रेस करने की व्यवस्था बनाए
>> रॉ दूध को 4 घंटे के अंदर किसान से प्रोसेसिंग यूनिट तक ले जाया जाना चाहिए.
>> कंपनियों को तय करना होगा कि गाय या भैंस के चारे में ज्यादा पेस्टीसाईड का इस्तेमाल नहीं किया गया हो.
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