क्या वोडाफोन मामले में अपील नहीं करेगी सरकार? जानिए क्या है वित्त मंत्रालय का कहना

वोडाफोन
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वोडाफोन आर्बिट्रेशन मामले वित्त मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है. इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अटॉर्नी जनरल ने सरकार को इस मामले पर दोबारा अपील नहीं करने की राय दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2020, 6:23 PM IST
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नई दिल्ली. वोडाफोन आर्बिट्रेशन मामले (Vodafone Arbitration Case) में वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि सरकार फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है. इन विकल्पों पर विस्तृत विचार करने के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा. न्यूज एजेंसी ANI ने इस बारे में जानकारी दी है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की तरफ से यह स्पष्टीकरण तब आया है, जब कयासों के आधार पर कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अटॉर्नी जनरल ने इस मामले में दोबारा अपील नहीं करने की राय दी है. मंत्रालय ने साफ कहा है कि ये रिपोर्ट्स पूरी तरह से गलत और निराधार हैं.

क्या है पूरा मामला?
वोडाफोन ने 2007 में हॉन्गकॉन्ग के हचिसन ग्रुप के मालिक हचिसन हामपोआ (Hutchison Whampoa) के मोबाइल बिजनेस हचिसन-एस्सार में 67 फीसदी हिस्सेदारी 11 अरब डॉलर में खरीदी थी. वोडाफोन ने यह हिस्सेसदारी नीदरलैंड और केमैन आईलैंड स्थित अपनी कंपनियों के जरिए ली थी.

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इस डील पर भारत का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वोडाफोन से कैपिटल गेन टैक्स मांग रहा था. हालांकि जब वोडाफोन कैपिटल गेन टैक्स चुकाने पर राजी हुई तब रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स की भी मांग की गई. यानी यह डील 2007 में हुई थी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लगातार विदहोल्डिंग टैक्स की मांग कर रहा था. इसके बाद कंपनी ने 2012 में इस डिमांड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस किया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के अपने फैसले में कहा था कि वोडाफोन ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को ठीक समझा है. 2007 में यह डील टैक्स के दायरे में नहीं थी तो अब इस पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता है.



हालांकि इसके बाद सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2012 के जरिए रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लागू कर दिया. यानी सरकार ने 2012 में यह कानून बनाया कि 2007 में वोडाफोन और हचिसन की डील टैक्सेबल होगी. वोडाफोन ने 3 जनवरी 2013 को कहा था कि उससे 14,200 करोड़ रुपये का टैक्स मांगा गया है. इसमें प्रिंसिपल और ब्याज था लेकिन कोई पेनाल्टी नहीं जोड़ी गई थी.

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10 जनवरी 2014 को इस फैसले को चुनौती दी और दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी. इसके बाद 12 फरवरी 2016 को वोडाफोन को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से 22,100 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला. साथ ही यह धमकी दी गई कि अगर कंपनी टैक्स नहीं चुकाती है तो भारत में उसकी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी.
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