मोदी सरकार की इस स्कीम की वजह से भारत में बढ़ा मोबाइल प्रोडक्शन, जानिए क्यों मिल रहा है इसे जोरदार रिस्पॉन्स?

मोदी सरकार की इस स्कीम की वजह से भारत में बढ़ा मोबाइल प्रोडक्शन, जानिए क्यों मिल रहा है इसे जोरदार रिस्पॉन्स?
मोदी सरकार की इस स्कीम की वजह से भारत में बढ़ा मोबाइल प्रोडक्शन, जानिए क्यों

सीएनबीसी-आवाज़ को जानकारी मिल रही है कि तीन बड़ी कंपनियां Samsung, Foxconn and Winstron ने आवेदन दिया है. अब तक 20,000 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिल चुका है. घरेलू, विदेशी दोनों कंपनियों को सरकार की ये स्कीम पसंद आ रही है.

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नई दिल्ली. भारत में मोबाइल फोन प्रोडक्शन (Mobile Phone Production) बढ़ाने की IT मंत्रालय की प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव (Production Link Incentive) स्कीम को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. डोमेस्टिक के साथ साथ विदेशी कंपनियां भी इसमें दिलचस्पी दिखा रही है. सीएनबीसी-आवाज़ को जानकारी मिल रही है कि तीन बड़ी कंपनियां Samsung, Foxconn and Winstron ने आवेदन दिया है. अब तक 20,000 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिल चुका है. घरेलू, विदेशी दोनों कंपनियों को सरकार की ये स्कीम पसंद आ रही है.

20,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिले
Lava मोबाइल जैसी घरेलू कंपनियों का भी आवेदन मिला है. प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम के तहत अब तक 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिल चुके हैं. सरकार का देश में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है. इस साल 5300 करोड़ रुपये का इंसेंटिव देने का टारगेट है. प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम के तहत भारत में उत्पादन करने पर 4 से 6 फीसदी का इन्सेंटिव देने को प्रस्ताव है. ये स्कीम 1 अगस्त से शुरू हो रही है.

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चीनी फ़ोनों का घटा प्रोडक्शन


शाओमी, ओपो, वीवो और रीयलमी जैसी चीनी कंपनियों के हजारों करोड़ रुपयों के स्मार्टफोन का प्रोडक्शन इस समय काफी प्रभावित हुआ है. इसकी वजह ये है कि चीन से आने वाले इनके कॉम्पोनेंट नहीं पहुंच पा रहे हैं, क्योंकि बंदरगाहों पर इस समय सख्त चेकिंग हो रही है और सप्लाई घट गई है. वहीं दूसरी ओर कोरोना सेफ्टी प्रोटोकॉल्स की वजह से लेबर की कमी ने स्थिति को और खराब कर दिया है. इसकी वजह से इन स्मार्टफोन का प्रोडक्शन कोरोना से पहले की तुलना में करीब 30-40 फीसदी तक घट गया है. इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस समय चीनी कंपनियां मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं.
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