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...तो अब ऑनलाइन शॉपिंग में मिल रहे भारी डिस्काउंट पर लगेगी रोक!

...तो अब ऑनलाइन शॉपिंग में मिल रहे भारी डिस्काउंट पर लगेगी रोक!

...तो अब ऑनलाइन शॉपिंग में मिल रहे भारी डिस्काउंट पर लगेगी रोक!

...तो अब ऑनलाइन शॉपिंग में मिल रहे भारी डिस्काउंट पर लगेगी रोक!

सीएनबीसी-आवाज़ को सूत्रों के हवाले से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि सीसीआई यानि कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई ने वाणिज्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि इस तरह के ऑफर्स को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.

    ई-कॉमर्स कंपनियों के भारी डिस्काउंट ऑफर पर कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई ने सवाल खड़े किए हैं. सीएनबीसी-आवाज़ को सूत्रों के हवाले से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि सीसीआई यानि कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई ने वाणिज्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि इस तरह के ऑफर्स को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. (ये भी पढ़ें-VIDEO: जेल की सलाखों के पीछे शुरू हुआ ये स्टार्टअप हुआ हिट)

    सीसीआई ने कहा है कि बाजार कीमत को गैरवाजिब तरीके से प्रभावित किया जा रहा है. सीसीआई ने पूछा है कि ई-कॉमर्स नीति में विदेशी निवेश की नीति और डिस्काउंट को लेकर क्या प्रावधान किए गए हैं. सरकार मौजूदा नीतियों के मुताबिक क्या कदम उठा रही है. सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय के जवाब के बाद सीसीआई खुद कड़े कदम उठा सकती है. आपको बता दें कि छोटे रिटेलर्स की संस्था ने इस बारे में सीसीआई से शिकायत की थी.

    सरकार ने उठाया कदम- वाणिज्य और उपभोक्ता मंत्रालय ने ई-कॉमर्स के लिए नई गाइड लाइन बनाई है जिसके तहत अब प्रोडक्ट की फर्जी रेटिंग पर नकेल कसेगी और इसको रोकने को लिए अनफेयर बिजनेस प्रैक्टिस के तहत कानूनी कदम उठाए जाएंगे. (ये भी पढ़ें-ऑनलाइन शॉपिंग: फर्जी रेटिंग के जरिए ऐसे ठग रही हैं कंपनियां, सरकार जल्द लेगी ये फैसला)

    इन चीजों में होगी ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी 
    >> इस गाइड लाइन के मुताबिक प्रोडक्ट फेक या डैमेज हुआ तो विक्रेता के साथ ई-कॉमर्स पोर्टल भी जिम्मेदार होगा.
    >> गलत या टूटा सामान पहुंचने पर 14 दिन के भीतर ग्राहक को रिफंड देना होगा. 30 दिन के भीतर ग्राहक की शिकायत पूरी तरह दूर करनी होगी.
    >> डिटेल्स के मुताबिक समान नहीं होने पर ग्राहक को सामान लौटने का अधिकार होगा.
    >> ई-कॉमर्स पालिसी तय करने के लिए बने टास्कफोर्स की सब कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौप दी है.
    >> वाणिज्य और उपभोक्ता मंत्रालय ने मिल कर ये गाइडलाइन्स तैयार की है.
    >> निर्देश के मुताबिक पोर्टल पर विक्रेता का पूरा पता और कांटेक्ट नंबर देना जरूरी होगा.
    >> रिफंड और रिटर्न पालिसी को भी साफ साफ वेबसाइट पर डालना जरूरी होगा. (ये भी पढ़ें-ये हैं देश के 5 सबसे बड़े थोक बाजार, यहां ब्रांडेड जूतों समेत ये चीजें मिलती है सस्ती)

    42 फीसदी बढ़ी शिकायतें
    >>ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में इस साल 42 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
    >> साल 2016-17 के मुकाबले शिकायतों में बढ़ोत्तरी के मामले पर सरकार गंभीर है.
    >> डिलीवरी में देरी, गलत प्रोडक्ट, रिटर्न और रिप्लेसमेंट के साथ रिफंड को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं.
    >> ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए अभी तक कोई सरकारी रेगुलेटर नहीं है.
    >> शिकायतों को लेकर उपभोक्ता नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर ही अभी निर्भर हैं. हालांकि 60 फीसदी >> शिकायतों का निपटारा करने में हेल्पलाइन से मदद मिली है.
    >> नए बिल में कंपनियों को ग्राहकों का डेटा भी सुरक्षित रखने गारंटी देनी होगी.
    >> बिल के तहत नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है.

    Tags: Discount Sale, Ecommerce

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