कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर इस कंपनी का बड़ा ऐलान, कहा- अगले महीने तक...

कंपनी ने इस वक्सीन के 100 माइक्रोग्राम डोज़ को तैयार कर लिया है.
कंपनी ने इस वक्सीन के 100 माइक्रोग्राम डोज़ को तैयार कर लिया है.

अमेरिका की बायोटक कंपनी मॉडर्ना इंक (Moderna Inc.) ने कहा है कि मिडस्टेज में कंपनी ने ट्रायल के लिए 300 व्यस्कों को चुना था. इसके अलावा 18 से 54 साल की उम्र के 50 अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया था. आज के ऐलान के बाद प्री-मार्केट ट्रेडिंग में कंपनी के शेयर्स में 6 फीसदी तक उछाल देखने को मिली.

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शिकोगा. मॉडर्ना इंक (Moderna Inc.) ने गुरुवार को कंफर्म कर दिया है कि वो अगले महीने में 30 हजार लोगों पर कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona virus Vaccine) का फाइनल ट्रायल करेगी. कंपनी इस वैक्सीन की टेस्टिंग के फाइनल स्टेज तक पहुंच चुकी है. कैम्ब्रिज-मैसेचुसेट्स की इस बायोटेक कंपनी ने बताया कि इस स्टडी का प्राइमरी गोल ​लक्षण वाले कोविड-19 (Symptomatic COVID-19) को रोकना होगा. इसके बाद दूसरा गोल इस महामारी को रोकने पर केंद्रित होगा. कंपनी के इस बयान के बाद गुरुवार को ही प्री-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान शेयरों में 6 फीसदी की उछाल देखने को मिली.

एक अरब डोज़ तैयार करने का लक्ष्य
मॉडर्ना ने कहा कि बाद में स्टडी के लिए उसने इस वक्सीन के 100 माइक्रोग्राम डोज़ को तैयार कर लिया है. डोज़ लेवल पर बात करें तो कंपनी हर साल 50 करोड़ डोज़ तैयार करने के लिए काम कर रही है. साल 2021 के बाद कंपनी हर साल 1 अरब डोज़ तैयार करने में सक्षम हो जायेगी. कंपनी ये डोज़ स्विस ड्रगमेकर लोन्ज़ा (Lonza) के साथ मिलकर अमेरिका​ स्थिति इंटर्नल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में तैयार करेगी.

कंपनी ने बताया कि उसने 100 माइक्रोग्राम डोज़ को इसलिए चुना है ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिकतम बूस्ट मिल सके और इसका न्यूनतम रिएक्शन हो. कंपनी ने तीसरे चरण के ट्रायल के लिए पर्याप्त वैक्सीन तैयार कर लिया है.
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मिडस्टेज स्टडी में कंपनी ने बताया कि उसने 300 स्वस्थ व्यस्क को चुना था, जिन्हें कम से एक शॉट का डोज़ दिया गया था. इसके लिए 18 से 54 साल के 50 लोगों को यह डोज़ दिया गया है.

स्टडी में भाग लेने वाले लोगों पर 1 साल तक नजर होगी
कंपनी ने बताया कि 54 साल ये इससे करीब के उम्र वाले लोगों को टेस्टिंग करना क्रिटिकल काम है क्योंकि इनमें वायरस के सबसे ज्यादा असर होने की संभावना है. आमतौर पर इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होता है. मिडस्टेज स्टडी में एहतियात के तौर पर वैक्सीन के असर को देखा जाता है. इसमें 28 दिन के अंदर दो डोज़ दिये जाते हैं. इस स्टडी में भाग लेने वाले लोगों की देखरेख 1 साल तक की जाएगी.

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