Cabinet Meeting: ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज के कॉर्पोरेटाइजेशन पर लग सकती है कैबिनेट की मुहर

Cabinet Meeting: ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज के कॉर्पोरेटाइजेशन पर लग सकती है कैबिनेट की मुहर
डिफेंस में बड़े रिफॉर्म की तैयारी

Cabinet Meeting: सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक आज होने वाली कैबिनेट की माटिंग में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कॉरपोरेटाइजेशन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के साथ ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में नया निवेश लाने पर निर्णय लिया जा सकता है.

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  • Last Updated: August 19, 2020, 1:18 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक सुबह 10.15 बजे से हो रही है. इस बैठक में डिफेंस में बड़े रिफॉर्म की तैयारी है. सूत्रों के मुताबिक, सैनिकों के लिए हथियार बनाने वाली Ordnance Factories के कॉरपोरेटाइजेशन पर कैबिनेट की मुहर लग सकती है. सीएनबीसी आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक कैबिनेट ऐसे करीब एक दर्जन फैसले ले सकता है जिसमें गन्ने की सरकारी कीमत यानी FRP बढ़ाने का भी प्रस्ताव शामिल है.

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कॉरपोरेटाइजेशन पर मुहर
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक आज होने वाली कैबिनेट की माटिंग में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कॉरपोरेटाइजेशन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के साथ ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में नया निवेश लाने पर निर्णय लिया जा सकता है. डिफेंस में नई तकनीक, आधुनिक मशीन पर भी जोर होगा. ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल पर फोकस होगा. इसके साथ ही. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के मौजूदा ढांचे में बदलाव भी संभव है. इन फैक्ट्रियों के बोर्ड को कामकाज करने की आजादी दी जाएगी.

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अभी देश में 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हैं जहां सेना की गाड़ियां, सेना की वर्दी, हथियार आदि बनते हैं. इन सबको बनाने की जिम्मेदारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की होती है. इनका गवर्नेंस ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के जरिए होता है. सरकार इस बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन करने जा रही है. कॉरपोरेटाइजेशन से यह होगा कि ये ऑर्डिनेंस बोर्ड निजी कंपनी तो नहीं बनेगी लेकिन निजी कंपनियों से कम भी नहीं रहेंगी. यहां पर सरकार की कोशिश होगी को कॉरपोरेटाइजेशन के बाद उसके मैनजमेंट में एक बड़ा बदलाव लाया जाए. इसके ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की जगह एक या एक से ज्यादा कॉरपोरेट एंटिटी बनाई जाए.



इतना ही नहीं, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में निजी निवेश लाया जाए, नई तकनीक लाई जाए और नए-नए मशीन लाई जाए. इसमें शुरुआत मैनेजमेंट ट्रांजिशन से होगा. मैनेजमेंट को और ज्यादा अकाउंटेबल बनाया जाएगा. फिर फाइनेंसिंग की व्यवस्था की जाएगी कि कैसे पैसा जुटाए ताकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सके और इसके लिए सरकार कंसल्टेंट हायर कर चुकी है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार उसके सुझाव पर आगे काम करेगी. (लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर- CNBC-आवाज़)
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