OPINION: मोदी सरकार 2.0 के पहले बजट में गांव, गरीब और किसानों पर जोर

खाद्य सुरक्षा पर सरकार का विशेष ध्यान है. जहां 2014 से पहले जहां खाद्य सुरक्षा पर 1.2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे, वहीं मोदी सरकार आने के बाद यानी 2014 के बाद खाद्य सुरक्षा बजट करीब डेढ़ गुना बढ़कर 1.8 लाख करोड़ हो गया है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 5:00 PM IST
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 5:00 PM IST
मोदी सरकार 2.0 के पहले बजट में गांव, गरीब और किसानों पर जोर दिखा. राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिस तरह सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने में किसानों के महत्वपूर्ण योगदान की बात कही थी, निर्मला सीतारमण के पहले बजट में वह साफ-साफ नजर आया.

2024 तक सबको मिलेगा साफ पानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सरकार में अपनी पहली 'मन की बात' कार्यक्रम में पानी की समस्या का जो गंभीर विषय उठाया था उसका भी असर बजट भाषण में दिखा. वित्‍त मंत्री ने बजट भाषण में जलजीवन मिशन के तहत 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को जल उपलब्‍ध कराने का प्रस्ताव रखा. साथ ही गरीबों के लिए 2022 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत सभी को घर उपलब्‍ध कराने की बात कही.

2022 तक सड़क के रास्ते गावों में पहुंचेगा विकास

कहते हैं कि विकास का रास्ता पहले नदियों से जाता था और अब ये सड़कों से होकर जाता है. इसको ध्यान में रखते हुए अगले 5 सालों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 1 लाख 25 हजार किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़के बनाने तथा पुरानी सड़कों को ठीक करने की बात भी इस बजट में कही गई है, जिससे हर मौसम में गांवो की कनेक्टिविटी 97 प्रतिशत से अधिक होगी. इस योजना को पूरा करने के लिए सरकार ने 2022 तक का लक्ष्य रखा है.

किसानों को फसल का उचित मूल्य
खाद्य सुरक्षा पर सरकार का विशेष ध्यान है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि जहां 2014 से पहले जहां खाद्य सुरक्षा पर 1.2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे, वहीं मोदी सरकार आने के बाद यानी 2014 के बाद खाद्य सुरक्षा बजट करीब डेढ़ गुना बढ़कर 1.8 लाख करोड़ हो गया है. सरकार के किसानों और खेती के प्रति सकारात्मक नजरिये का अंदजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां यूपीए-2 की सरकार में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने में सरकार का 88 हजार 740 करोड़ रुपये खर्च होता था. वहीं 2014 में मोदी सरकार आने के बाद 1 लाख,71 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने में खर्च किया गया है.
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साफ है मोदी सरकार 2.0 का ज्यादा जोर गांव गरीब और किसानों पर है. सरकार ये मानती है कि गांवों के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है. साथ ही कृषि को फायदे का सौदा बनाए बिना देश में बेरोजगारी दूर नहीं की जा सकती.

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First published: July 6, 2019, 11:41 AM IST
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