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मोदी सरकार ने टेलिकॉम सेक्टर को उबारने के लिए 9 स्ट्रक्चरल रिफॉर्म को दी मंजूरी, 10 प्‍वाइंट्स में जानें सबकुछ

टेलिकॉम मिनिस्‍टर अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि टेलिकॉम सेक्‍टर के लिए  5 प्रोसेस रिफॉर्म को मंजूरी दी गई है.

टेलिकॉम मिनिस्‍टर अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि टेलिकॉम सेक्‍टर के लिए 5 प्रोसेस रिफॉर्म को मंजूरी दी गई है.

दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने कहा कि कैबिनेट ने टेलिकॉम सेक्‍टर (Telecom Sector) को उबारने के लिए 9 स्ट्रक्चरल रिफॉर्म को मंजूरी (Cabinet Decisions) दी है. इसके अलावा 5 प्रोसेस रिफॉर्म को मंजूरी दी गई है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लंबे समय से एजीआर बकाया के संकट से जूझ रहे टेलिकॉम सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई (100% FDI in Telecom Sector) को मंजूरी दे दी गई है. इसके अलावा यह फैसला लिया गया कि टेलिकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम चार्जेज और एजीआर बकाये (AGR Payment) को लेकर 4 साल की मॉरेटोरियम (Moratorium) सुविधा दी जाएगी. दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने कहा कि कैबिनेट ने 9 स्ट्रक्चरल रिफॉर्म को मंजूरी दी है. इसके अलावा 5 प्रोसेस रिफॉर्म को मंजूरी दी गई है. टेलिकॉम कंपनियों को स्‍पेक्‍ट्रम ट्रांसफर पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के भुगतान के मामले में 4 साल के मॉरे‍टोरियम की सुविधा देकर बड़ी राहत दी गई है. बता दें कि एजीआर की वजह से वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल पर भारी वित्तीय बोझ है.

    एजीआर के कारण भारी बोझ महसूस कर रही थीं कंपनियां
    एजीआर दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से ली जाने वाली यूसेज और लाइसेंसिग फीस है. दूरसंचार विभाग पिछले कई साल का बकाया मांग रहा है, जिसे देने में टेलीकॉम कंपनियां आनाकानी कर रह थीं. कई टेलिकॉम कंपनियां एजीआर की वजह से आर्थिक भार महसूस कर रही थीं. केंद्र सरकार ने टेलिकॉम सेक्‍टर और उपभोक्‍ताओं को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं.

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    10 प्‍वाइंट्स में टेलिकॉम सेक्‍टर के लिए केंद्र के सभी फैसले

    एजीआर बकाये की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा. टेलिकॉम कंपनियां इसकी मांग कर रही थीं.
    टेलिकॉम कंपनियों के लिए मासिक ब्‍याज दर अब सालाना कर दी गई है. पेनल्टी पर राहत दी गई है.
    टेलिकॉम कंपनियां बकाये को लेकर मॉरेटोरियम ले सकेंगी. ये सुविधा 4 साल तक के लिए मिल सकेगी. इसे चुनने वाली कंपनियां सरकार को ब्याज देंगी.
    टेलीकॉम सेक्टर के ऑटोमेटिक रूट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है.
    अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा. अभी तक डॉक्युमेंट जमा कराने होते थे. अब बिना हार्डकॉपी के वेरिफिकेशन हो सकेगा.
    कागजी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म (CAF) को डाटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा.
    ग्राहकों को प्रीपेड से पोस्टपेड में जाने पर दोबारा केवाईसी की जरूरत नहीं होगी.
    टावर के इंस्टॉलेशन के नियम में भी बदलाव हुआ है. अब सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर ये काम हो सकेगा.
    स्पेक्ट्रम नीलामी हर वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी.
    नीलामी में स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है. स्पेक्ट्रम के लिए 10 वर्ष के बाद सरेंडर की अनुमति दी जाएगी.

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