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रेलवे की वो योजना, जिसे पूरा नहीं कर पाई कोई सरकार, अब मोदी से जगी उम्मीदें

रेलवे की वो योजना, जिसे पूरा नहीं कर पाई कोई सरकार, अब मोदी से जगी उम्मीदें

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करने वाली है.

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करने वाली है.

इस साल की शुरुआत में ही रेलवे ने सभी मानवरहित स्तर की क्रॉसिंग को खत्म करने की प्रक्रिया पूरी की. लोगों के रेलवे ट्रैक पार करने के लिए भारतीय रेलवे ने कई फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) और सबवे भी बनाए हैं.

    मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करने जा रही है. इस बार के आम बजट में भी रेल यात्रियों की सुविधा का विशेष खयाल रखने की बात हो रही है. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी रेलवे की ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दिया था. पिछले कार्यकाल की तरह इस बार भी केंद्र सरकार रेलवे पर कुछ ज्यादा ही फोकस कर रही है. खासतौर पर इस बार के केंद्रीय बजट में भारतीय रेलवे को सभी प्रकार के रेलवे क्रासिंग से पूरी तरह से मुक्त करने की कवायद चल रही है. इसके लिए रेल मंत्रालय आने वाले सालों में रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने की दिशा में एक विशेष कार्ययोजना पर काम कर रही है, जिसे अगले चार सालों में लागू किया जाना है.

    पहली बार आम बजट पेश करने जा रही निर्मला सीतारमण रेलवे से जुड़े कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे सकती हैं, जो काफी सालों से अधर में फंसे हुए हैं या फिर उस पर उतना काम नहीं हुआ है जितना होना चाहिए. इस बार के बजट में रेलवे की सुधार योजनाओं के साथ-साथ रेवेन्यू बढ़ाने के भी कई प्रस्तावों पर फोकस किए जाने की संभावना है.

    मोदी सरकार यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बजट में बड़ा ऐलान कर सकती है


    रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने के लिए फंड बढ़ाना ही होगा
    रेल मंत्रालय ने अपना 100 दिन का एक रोडमैप तैयार किया है. इस रोडमैप को रेलवे बोर्ड ने तैयार किया है. भारतीय रेलवे ने स्वर्णिम चतुर्भुज और डाइगनल पर 100 दिनों के भीतर 2 हजार, 568 मानव रहित क्रॉसिंग को समाप्त करने के लिए कई कदम उठाए जाने हैं. इन परियोजनाओं को अगले चार सालों में यानी 2023 तक लागू किया जाएगा. मंत्रालय ने रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) का निर्माण करके स्वर्णिम चतुर्भुज और डाइगनल पर सभी प्रकार के क्रॉसिंग को समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है.

    रोडमैप में कहा गया है कि रेलवे को अगले चार सालों में केंद्र से 50 हजार करोड़ रुपये से लेकर एक लाख करोड़ रुपये तक की जरूरत होगी. इस साल की शुरुआत में ही रेलवे ने सभी मानव रहित  क्रॉसिंग को खत्म करने की प्रक्रिया पूरी की. लोगों के रेलवे ट्रैक पार करने के लिए भारतीय रेलवे ने कई फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) और सबवे भी बनाए हैं.

    इस देश में माल भाड़ा इतना ज्यादा है कि वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ते हैं.


    देश में रेलवे पर किए जा रहे कामों पर साल 2000 से 2002 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेलवे बोर्ड के मेंबर और चेयरमैन रह चुके आरएन मल्होत्रा न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'पिछले 50 सालों से इस देश में रेलवे क्रासिंग खत्म करने की बात हो रही है, लेकिन इतने पैसे नहीं मिलते कि ये सारे काम हो सकेें. देश में हर एक किलोमीटर के बाद रेलवे क्रासिंग है. इस देश में जितनी रेलवे क्रासिंग खत्म होती हैं उतनी और जुड़ भी जाती हैं. यह काम थोड़ा मुश्किल है इसके लिए जमीन अधिग्रहण से लेकर रोड अथॉरिटी की मंजूरी लेना आवश्यक है. यह काम इतना आसान नहीं है.’

    वाजपेयी जी ने मंजूर किया था 17 हजार करोड़ का सेफ्टी फंड
    आरएन मल्होत्रा कहते हैं, 'देखिए साल 2002 में पहली बार रेलवे ने 17 हजार करोड़ रुपये का सेफ्टी फंड अटल जी से मंजूर करवाया था. इस फंड का इस्तेमाल हम लोगों ने रेलवे के पुराने डिब्बों, सिग्नल सिस्टम और रेलवे लाइनों को दुरुस्त करने के लिए शुरू किया था. रेलवे की पुरानी चीजों को बदलने की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए. यह प्रक्रिया किसी भी समय बंद हो जाती है या कम हो जाती है. बंद और कम होने की वजहों से भी रेल के एक्सीडेंट की घटना बढ़ जाती हैं. मुझे खुशी है कि मोदी सरकार इस मामले में अच्छा काम कर रही है. साल 2005 से 2010 तक रेलवे की माली हालत बेहतर हो गई थी, क्योंकि देश में जीडीपी ग्रोथ इकॉनमी की वजह से अच्छी हो रही थी. भाड़ा भी अच्छा आ रहा था और रेलवे की आय भी ठीक तरीके से बढ़ रही थी. इससे रेलवे का जो पैसा सरप्लस था उससे वो रिप्लेसमेंट करते जा रहे थे.'

    इंफ्रास्ट्रक्चर पर और खर्च करना चाहिए
    आरएन मल्होत्रा के मुताबिक, 'भारतीय रेलवे के कई सेक्शन ऐसे हैं जहां नियम के तहत 100 गाड़ियां चलनी चाहिए वहां 150 गाड़ियां चलाई जा रही हैं. मंत्री और सांसदों की ऐसी डिमांड पर लगाम लगाई जानी चाहिए. इंफ्रास्ट्रक्चर पर और खर्च करना चाहिए. कुछ कदम तो सरकार ने सही उठाए हैं. एलआईसी से जो एक लाख करोड़ रुपये का लोन लिया है. उसको डबलिंग के कामों और सिग्नलिंग सिस्टम पर खर्च किया जा रहा है. लेकिन, अभी भी रेलवे को ठीक करने के लिए जितने पैसे की जरूरत है, वह नहीं मिल रहा है. रेलवे को दुरुस्त करने के लिए और पैसे चाहिए. रेलवे के पुराने पार्ट-पुर्जों और पटरियों को बदलना होगा. रेलवे को अपने स्टाफ से प्रेशर घटाने की जरूरत है. इन सब चीजों के लिए एडिशनल पैसा चाहिए.'

    2019 के केंद्रीय बजट में रेलवे की कई रुकी हुईं परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं


    जानकारों का मानना है कि इस देश में माल भाड़ा इतना ज्यादा है कि वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ते हैं. ऐसा कहा जाता है कि लौह अयस्क को ब्राजील से हिंदुस्तान लाने में जितना खर्चा पड़ता है. उससे कहीं ज्यादा खर्चा हमारे हिंदुस्तान में मांइस से फैक्ट्री तक ले जाने में पड़ता है. जब तक इस प्रकार की विसंगतियों को सुधारा नहीं जाएगा. रेलवे में किसी भी तरह की आमूलचूल परिवर्तन की बात करना बेईमानी होगी. ये रेलवे की इकॉनमी और देश की इकॉनमी दोनों को खराब कर रही है.

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    Tags: Budget, Budget 2019, Budget For Common Man, Indian railway, Indian Railway Catering and Tourism Corporation, Modi Government Budget, Piyush goyal, Rail Budget, Railway, Union budget, Union Budget 2019

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