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चीनी राष्ट्रपति के जाते ही मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, लगाई ये पाबंदी

News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 5:11 PM IST
चीनी राष्ट्रपति के जाते ही मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, लगाई ये पाबंदी
सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर आयात नीति में बदलाव किया

विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) की तरफ से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के पार्ट-1, सेक्शन 1.2 में तय मानकों का पालन नहीं करने के कारण भारतीय झंडे का आयात नहीं किया जा सकेगा.

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  • Last Updated: October 17, 2019, 5:11 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (Indian National Flag) को लेकर आयात नीति में बदलाव किया है. इसके तहत भारतीय झंडे के आयात (Import) पर पाबंदी लगा दी गई है. नई नीति के तहत इंडियन फ्लैग कोड पर खरे उतरने वाले ही झंडों का आयात होगा. सरकार ने झंडे के डिजाइन और रंगों को लेकर नियम जारी किए हैं.

पिछले हफ्ते विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) की तरफ से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के पार्ट-1, सेक्शन 1.2 में तय मानकों का पालन नहीं करने के कारण भारतीय झंडे का आयात नहीं किया जा सकेगा.

बता दें कि तय मानकों का पालन नहीं करने वाले भारतीय झंडे का आयात देश में हो रहा था. घरेलू उद्योग की तरफ से इसके खिलाफ शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. ऐसे अधिकांश झंडे प्लास्ट‍िक से बने होते हैं और ज्यादातर चीन से इम्पोर्ट होते हैं.



खादी शिल्पकारों के लिए दिवाली का तोहफा
खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमिशन ने (KVIC) ने सरकार के इस निर्णय को खादी से जुड़े लाखों शिल्पकारों के लिए दिवाली गिफ्ट बताया है. KVIC का कहना है कि फ्लैग कोड के मुताबिक हमारे भारतीय झंडे को केवल हाथ से काते गए और बनाए गए ऊन, कॉटन या सिल्क खादी से ही बनाया जा सकता है. 15 अगस्त और 26 जनवरी पर झंडों की डिमांड बढ़ जाती है.

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खादी के बनाए झंडों की बिक्री घटी
KVIC संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एकमात्र वैधानिक इकाई है, जिसके पास भारतीय राष्ट्रीय झंडे के निर्माण का अधिकार है. KVIC ने गौर किया कि पिछले दो साल से उसके द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में गिरावट आ रही है.

वित्त वर्ष 2017-18 में KVIC ने 3.69 करोड़ रुपये के भारतीय झंडों की बिक्री की थी, लेकिन 2018-19 में यह बिक्री 14 फीसदी घटकर 3.16 करोड़ रुपये रह गई. चालू वित्त वर्ष में अभी तक इसकी बिक्री सिर्फ 1.94 करोड़ रुपये की हुई है.

चीन से इम्पोर्ट हो रहे थे भारतीय झंडे
KVIC के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को झंडों की बिक्री में गिरावट की जानकारी दी गई थी. एक पत्र लिखकर सक्सेना ने कहा था कि इम्पोर्टेड भारतीय झंडे ज्यादातर प्लास्ट‍िक से बने होते हैं, जो भारत के फ्लैग कोड का उल्लंघन करते हैं. KVIC ने ऐसे झंडों के आयात पर रोक लगाने की मांग की थी. सूत्रों का कहना है कि अधिकांश भारतीय झंडे चीन से इम्पोर्ट हो रहे थे.

(आलोक प्रियदर्शी, संवाददाता- CNBC आवाज़, पीटीआई इनपुट के साथ)

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First published: October 17, 2019, 3:48 PM IST
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