Loan Moratorium पर किसका और कितना ब्याज होगा माफ? जानिए सभी सवालों के जवाब

बैंक से लोन लेने वाले जिन भी ग्राहकों ने मोरेटोरियम की सुविधा का फायदा लिया है उन ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी है.
बैंक से लोन लेने वाले जिन भी ग्राहकों ने मोरेटोरियम की सुविधा का फायदा लिया है उन ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी है.

बैंक से लोन लेने वाले जिन भी ग्राहकों ने मोरेटोरियम की सुविधा का फायदा लिया है उन ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने ब्याज पर ब्याज माफ करने का फैसला लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 3:48 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली: बैंक से लोन लेने वाले जिन भी ग्राहकों ने मोरेटोरियम की सुविधा का फायदा लिया है उन ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने ब्याज पर ब्याज माफ करने का फैसला लिया है. फिलहाल ऐसा अनुमान है कि इस कदम से सरकार के ऊपर करीब 5000-6000 करोड़ रुपए को बोढ बढ़ जाएगा. हालांकि, सूत्र बता रहे हैं कि केंद्र सरकार अभी इसकी घोषणा नहीं करेगी, क्योंकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. आइए आपको इस मामले के बारे में डिटेल में बताते हैं कि आखिरा लोन मोरेटेरियम क्या है और सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर क्या मामला चल रहा है-

कोरोना की महामारी से लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा था. इससे राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लोन पर मोरेटोरियम देने का फैसला किया था. इसमें ग्राहकों की इच्‍छा पर था कि वे अपनी ईएमआई का भुगतान करें या न करें. मोरेटोरियम की अवधि 31 अगस्‍त को समाप्‍त हो चुकी है. बैंकों के ब्याज पर ब्याज वसूलने के कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. देश की सबसे बड़ी अदालत में 2 नवंबर 2020 को इस मामले पर अगली सुनवाई होने वाली है.

  • क्या लोन मोरेटेरियम से कम हो सकती है EMI?

    आपको बता दें कि लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) के जारिए आप अपनी ईएमआई कुछ समय के लिए रोक सकते हैं. कोरोना महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे थे तो रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से लोन मोरेटोरियम की पेशकश की गई थी. लोगों ने मार्च से अगस्त तक मोरेटोरियम योजना यानी किश्त टालने के लिए मिली छूट का लाभ लिया था.

  • आखिर सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा ये मामला?

    लोन मोरेटोरियम की पेशकश के बाद ग्राहकों की शिकायत थी कि बैंक बकाया राशि पर अतिरिक्त ब्याज यानी ब्याज के ऊपर ब्याज लगा रहे हैं. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.


  • किन लोगों को मिलेगा सरकार के इस फैसले का फायदा?

    सूत्रों ने बताया कि सीसीईए की बैठक में लोन पर ब्याज माफी को मंजूरी मिल गई है, लेकिन बैठक में चुनिंदा लोन पर ही ब्याज माफी को मंजूरी मिली है. इसका फायदा 2 करोड़ रुपए तक के लोन लेने वालों को मिलेगा. प्रस्ताव के मुताबिक चुनिंदा लोन के लिए ब्याज पर ब्याज माफ किया जायेगा. सरकार ब्याज पर ब्याज का Ex gratia Payment करेगी. 2 करोड़ रु तक के लोन की EMI के ब्याज पर ब्याज माफ करने का प्रस्ताव है.


  • केंद्र सरकार कब तक जारी करेगी सर्कुलर?

    14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार को ब्‍याज पर ब्‍याज माफी स्‍कीम को जल्‍द से जल्‍द लागू करना चाहिए. इसके लिए केंद्र को एक महीने का वक्त क्यों चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि अगर सरकार इस पर फैसला ले लेगी तो हम तुरंत आदेश पारित कर देंगे. इस पर सॉलीसीटर जनरल ने कहा कि सभी लोन अलग-अलग तरीके से दिए गए हैं. इसलिए सभी से अलग-अलग तरीके से निपटना होगा. फिर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि ब्याज पर ब्याज माफी स्‍कीम को लेकर 2 नवंबर तक सर्कुलर लाया जाए. इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार 2 नवंबर तक ब्‍याज पर ब्‍याज माफी स्‍कीम को लेकर सर्कुलर जारी कर देगी.


  •  क्या होता है लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग?

    लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग का सीधा मतलब लोन की मौजूदा शर्तों को बदलना होता है. बैंक इन्‍हें ग्राहकों की सहूलियत के लिए बदलते हैं. इससे बैंक या वित्‍तीय संस्‍थान लोन की मूल रकम और इस पर ब्‍याज का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर पाते हैं. इसका बैंकों और ग्राहकों दोनों को फायदा है.


  •  मोरेटोरियम देने की जरूरत क्यों पड़ी?

    Ans. कोरोना महामारी से लोगों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा था. इससे राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लोन पर मोरेटोरियम देने का फैसला किया था. इसमें ग्राहकों की इच्‍छा पर था कि वे अपनी ईएमआई का भुगतान करें या न करें. मोरेटोरियम की अवधि 31 अगस्‍त को समाप्‍त हो चुकी है. ग्राहकों को इसमें लोन का रिपेमेंट टालने के लिए छह महीने की मोहलत मिली थी.


  • क्या है पूरा मामला?

    कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लगाया था. उस समय उद्योग धंधे पूरी तरह बंद थे. इसीलिए कारोबारियों और कंपनियों के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गई. कई लोगों की नौकरियां चली गईं. ऐसे में लोन की किस्तें चुकाना मुश्किल था. ऐसे में रिजर्व बैंक ने लोन मोरेटोरियम की सहूलियत दी थी. यानी लोन पर किस्तें टाल दी गई थीं. किसी लोन पर मोरेटोरियम का लाभ लेते हुए किस्त नहीं चुकाई तो उस अवधि का ब्याज मूलधन में जुड़ जाएगा. यानी अब मूलधन+ब्याज पर ब्याज लगेगा. इसी ब्याज पर ब्याज का मसला सुप्रीम कोर्ट में है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज