क्या मोदी सरकार में टूटेगा मनमोहन गवर्नमेंट में बना गेहूं खरीद का रिकॉर्ड?

क्या मोदी सरकार में टूटेगा मनमोहन गवर्नमेंट में बना गेहूं खरीद का रिकॉर्ड?
मध्‍य प्रदेश में गेहूं की रिकॉर्ड सरकारी खरीद हई है

उत्तर प्रदेश में अब तक सिर्फ 20.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया, हरियाणा कर चुका 71 लाख टन की खरीद, जबकि गेहूं उत्पादन में अकेले यूपी का शेयर 34.89 फीसदी है.

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नई दिल्ली. रबी की प्रमुख फसल गेहूं की अब तक हुई खरीद (wheat Procurement) पर खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक रबी मार्केटिंग सीजन (RMS) 2020-21 में 341.56 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद लिया गया है. यह पिछले साल से अधिक है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या मोदी सरकार (Modi Government) मनमोहन सिंह गवर्नमेंट में बना गेहूं खरीद का रिकॉर्ड तोड़ पाएगाी? 2012-13 में यूपीए सरकार के दौरान रिकॉर्ड 382 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार यह रिकॉर्ड टूट सकता है.

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि सरकार ने पहले ही इस बार 4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का टारगेट रखा है. अभी खरीद बंद नहीं हुई है. रिकॉर्ड प्रोडक्शन भी हुआ है. कई राज्यों में अभी काफी गेहूं खरीदा जाना है. लॉकडाउन की वजह से इस बार 15-20 दिन देरी से खरीद शुरू हुई थी. ऐसे में लगता तो यही है कि सरकार गेहूं खरीद के पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी.

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अभी जारी है गेहूं की खरीद




कितना लक्ष्य और कितनी खरीद



-पंजाब ने करीब 1.4 करोड़ टन गेहूं खरीदे जाने का लक्ष्य रखा था. जबकि 24 मई तक सिर्फ 125.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है.

-मध्य प्रदेश में 1 करोड़ टन खरीद के विपरीत 113.38 टन की खरीद हो चुकी है. हरियाणा में 75 लाख टन का लक्ष्य था और यहां 70.65 टन खरीद हुई है.

-उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं खरीद की योजना थी, जबकि यहां अभी तक 20.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है.

-खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सभी ऐसे राज्यों में गेहूं की खरीद आसानी से की जा सकती है जहां अतिरिक्त पैदावार हुई है.

प्रति क्विंटल 250 रुपये का बोनस मिले
किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार से सभी किसानों के गेहूं की खरीद सुनिश्चित करने, समय से भुगतान देने और कोरोना की वजह से हुए नुकसान के बदले एमएसपी (MSP-Minimum Support Prices) के ऊपर प्रति क्विंटल 250 रुपये का बोनस देने की मांग की है. यूपी और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को अपना गेहूं बेचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

लॉकडाउन में मिला नया विकल्प
कोरोना (COVID-19) की वजह से गेहूं की खरीद प्रक्रिया में एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बोरियों की थी. जूट मिलें बंद हो जाने के कारण जूट की बोरियों का उत्पादन रुक गया था. जिससे खरीदे गए गेहूं को भरने के लिए दिक्कत हो रही थी. ऐसे में सरकार ने प्लास्टिक के थैलों का इस्तेमाल कर इससे निपटने की तैयारी की.

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भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य (Photo-Ministry of agriculture)


इन राज्यों में 93 फीसदी से अधिक पैदावार
कृषि मंत्रालय की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार मिलकर देश का 93.31 फीसदी गेहूं पैदा करते हैं. अकेले यूपी का शेयर 34.89 फीसदी है. देश के कुल गेहूं उत्पादन में पंजाब 21.55, हरियाणा 13.20, मध्य प्रदेश 8.81, राजस्थान 8.57 और बिहार 6.2 फीसदी योगदान देता है. जबकि, प्रति हेक्टेयर सबसे ज्यादा पैदावार के मामले में पंजाब और हरियाणा पहले और दूसरे नंबर पर हैं.

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