मध्य प्रदेश की सरकारी मंडी में भी छले जा रहे किसान, MSP से आधे रेट पर बिक रही मूंग दाल

मध्य प्रदेश की सरकारी मंडी में भी छले जा रहे किसान, MSP से आधे रेट पर बिक रही मूंग दाल
मध्य प्रदेश के किसानों को नहीं मिल रहा मूंग का सही दाम

मध्य प्रदेश में किसानों को नहीं दिया जा रहा मोदी सरकार द्वारा तय किया गया मूंग का दाम, लागत भी नहीं मिल रही. राज्य के कृषि मंत्री ने कहा-रखने की जगह नहीं इसलिए नहीं हो रही सरकारी खरीद

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नई दिल्ली. दिल्ली दरबार में किसानों (Farmers) की उपज के दाम को लेकर कागजों पर काफी अच्छी बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग हैं. खुद बीजेपी शासित मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के किसानों को उचित दाम न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. ताजा मामला मूंग (Moong) की फसल से जुड़ा हुआ है. मोदी सरकार ने साल 2020-21 के लिए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP-Minimum support price) 7,196 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन एमपी में किसान इसके आधे दाम पर बेचने को मजबूर हैं.

कृषि मंत्री के क्षेत्र का है ये हाल

किसानों का हक मारने का यह काम बाकायदा सरकारी मंडी में सरकारी पर्ची पर हो रहा है. इसी 9 जुलाई को कृषि उपज मंडी समिति हरदा जिले में एक किसान से 3641 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर इसकी खरीद की गई. हरदा की ही मंडी में जून में 4550 रुपये के रेट पर भी खरीद हुई थी. हरदा और होशंगाबाद एमपी का सबसे बड़ा मूंग बेल्ट है. खुद राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल हरदा जिले से ही आते हैं लेकिन वहां के किसानों की समस्या का भी समाधान नहीं हो पा रहा.



4,797  रुपये प्रति क्विंटल आती है लागत: सीएसीपी
किसानों के पास मूंग (Mung bean) रखने की जगह नहीं है. बारिश में फसल खराब होने का अंदेशा है इसलिए वो उसे मजबूरी में औने-पौने रेट पर बेच रहे हैं. जबकि कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices) ने इस साल मूंग पैदा करने की लागत 4,797  रुपये प्रति क्विंटल बताई है.

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एमएसपी से आधे दाम पर खरीद का ये रहा सबूत


मूंग का रकबा और उत्पादन

कृषि मंत्रालय के दलहन विकास निदेशालय के मुताबिक 2011-12 से 2015-16 के बीच देश में औसतन लगभग 32.67 लाख हेक्टेयर एरिया में मूंग (green gram) की फसल हुई. जबकि 15.04 लाख टन उत्पादन हुआ. राजस्थान, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश व तमिलनाडु राज्य देश के प्रमुख मूंग उत्पादक राज्य हैं. मूंग का उत्पादन अब 20 लाख टन से अधिक हो रहा है.

-मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा 4.60 लाख हेक्टेयर है.

-यहां अकेले 2.40 हेक्टेयर का रकबा हरदा और होशंगाबाद जिलों में है.

-एमपी कुल उत्पादन 5.70 लाख मिट्रिक टन है.

सरकारी मंडी में ही जारी है खेल

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन में मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राहुल राज कहते हैं कि मई और जून में मूंग की कटाई हो गई थी. राज्य सरकार ने किसानों से वादा किया था कि मूंग की सरकारी खरीद के लिए 4 से 15 जून तक रजिस्ट्रेशन होगा. लेकिन आज 15 जुलाई तक ऐसा नहीं हुआ है. मतलब साफ है कि सरकार ने मूंग की खरीद अब तक शुरू नहीं की है.

जब सहकारी समिति खुद खरीद करती है तभी किसान को एमएसपी मिलता है. वरना सरकारी मंडी में मंडी सचिव के सामने ही सरकार द्वारा रजिटर्ड व्यापारी एमएसपी से कम दाम पर बोली लगाते हैं और उनका कुछ बिगड़ता भी नहीं. यहां के किसान इतनी मेहनत से फसल उगाने के बावजूद दाम न मिलने वाली इसी कुव्यवस्था के शिकार हैं.

राहुल राज कहते हैं कि सरकार अब तक खरीद न होने के पीछे वेयरहाउस यानी मूंग रखने की जगह न होने का हवाला दे रही है. ऐसे में अंदाजा लगाना चाहिए कि सरकार ने किसानों के लिए अब तक क्या किया है. उनका कहना है कि जब सरकारी मंडियों में सरकारी पर्ची पर ही किसानों का शोषण जारी है तो निजी मंडियों में क्या होगा? सरकार इसी तरह एमएसपी घोषित करने करने के बाद कोई न कोई बहाना करके खरीद करेगी नहीं और फिर व्यापारी खुलेआम अन्नदाता को लूटने का काम करेंगे.

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4,797 रुपये प्रति क्विंटल आती है पैदा करने की लागत


किसानों का लीगल राइट बने एमएसपी: देविंदर शर्मा

जानेमाने कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा कहते हैं केंद्र सरकार किसानों को पूरी तरह से बाजार के हवाले करना चाहती है. सरकारी मंडी में एमएसपी का आधा दाम मिलना तो यही संकेत कर रहा है कि जब खरीद निजी क्षेत्र के हवाले हो जाएगी तब किसानों के लिए कितना खतरनाक होगा. जब तक एमएसपी को किसानों का लीगल राइट नहीं बनाया जाएगा तब तक उन्हें सही दाम नहीं मिलेगा. किसानों की हर फसल का एश्योर्ड प्राइस तय होना चाहिए. उससे कम दाम पर खरीद न हो.

शर्मा कहते हैं कि किसी कृषि मंत्री द्वारा यह कहना कि खरीद इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि रखने की जगह नहीं है, यह बयान काफी हास्यास्पद है. क्या मंत्री को पहले से नहीं पता था कि मूंग को भी रखने का इंतजाम होना चाहिए.

मूंग की खरीद न करने पर मंत्री का तर्क

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का कहना है, “मूंग की खरीद करने का मैंने वादा किया था. इसका अनुमोदन भी कर दिया था. लेकिन अधिकारियों ने बताया कि खरीद कर रखने के लिए जगह नहीं है. अभी गेहूं भी खुले में पड़ा हुआ है. जैसे ही वेयरहाउस की व्यवस्था हो जाएगी हम मूंग की खरीद शुरू कर देंगे.”

उधर, मोदी सरकार (modi government) द्वारा गठित डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी (DFI-doubling farmers income) के सदस्य और राज्यसभा सांसद विजय पाल तोमर ने कहा कि मंडी में सिर्फ सरकारी खरीद पर ही एमएसपी की बाध्यता है.
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