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गन्ना किसानों को राहत! मोदी सरकार ने चीनी मिलों को दिया बड़ा तोहफा

भाषा
Updated: November 13, 2019, 7:17 PM IST
गन्ना किसानों को राहत! मोदी सरकार ने चीनी मिलों को दिया बड़ा तोहफा
चीनी मिलों के 15,000 करोड़ रुपये के सस्ते कर्ज की वापसी पर छह महीने की और छूट

सरकार ने चीनी मिलों (Sugar Mills) और किसानों (Farmers) के हित में लोन वापसी पर लगाई गई रोक की समयसीमा बढ़ाकर डेढ़ साल कर दी.

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नई दिल्ली. चीनी मिलों (Sugar Mills) को कुछ और राहत देते हुये सरकार (Government) ने उन्हें दिये जा रहे 15,000 करोड़ रुपये की सस्ती लोन योजना के तहत लोन वापसी पर लगाई गई रोक की समयसीमा (Moratorium Period for Repayments) छह महीने और बढ़ा दी है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. अब, चीनी मिलें लिये गये कर्ज की वापसी की शुरुआत डेढ़ वर्ष के बाद कर सकतीं हैं. लोन वापसी पर रोक अवधि वह समयसीमा होती है जिसके भीतर कर्ज लेने वाली पार्टी को कर्ज चुकाने की छूट होती है. इस अवधि के बीत जाने के बाद ही कर्ज की वापसी शुरू होगी.

केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के लिये दो किश्तों में सस्ते लोन पैकेज की घोषणा की- पहली जून 2018 में 4,440 करोड़ रुपये की और दूसरी मार्च 2019 में 10,540 करोड़ रुपये की. चीनी मिलों को यह लोन गन्ना बकाये का भुगतान करने और अधिशेष चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए स्थानांतरित करने के लिए दिया गया था. एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, जब देश में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए सस्ती ब्याज दर वाली कर्ज योजना शुरू की गई थी, तो लोन अदायगी से एक साल की छूट दी गई थी. अब चीनी मिलों और किसानों के हित में इस छूट की अवधि को बढ़ाकर डेढ़ साल कर दिया गया है.

45 आवेदकों को लोन मंजूर
सूत्र ने बताया कि इस संबंध में एक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी. सरकारी आंकडों के अनुसार लोन के लिए आये 418 आवेदनों में से खाद्य मंत्रालय ने 282 को पात्र पाया है. इसमें से 6,139.08 करोड़ रुपये के लोन के लिए 114 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है. हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि बैंकों ने 45 आवेदकों को लोन मंजूर किया है और सितंबर अंत तक 33 आवेदकों को 900 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं.

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आसान ब्याज दर पर लोन की व्यवस्था
चीनी उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना के तहत घोषित 15,000 करोड़ रुपये की कुल आसान ब्याज दर वाली लोन राशि का केवल 5-6 प्रतिशत ही बैंकों द्वारा वितरित किया गया है. चीनी उद्योग का विचार है कि मंत्रालय स्तर पर पहली स्क्रीनिंग में बहुत समय बर्बाद हो रहा है. आदर्श रूप से, बैंकों को पात्रता मानदंडों की जांच करनी चाहिए और तदनुसार ऋण राशि को मंजूरी देनी चाहिए.
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चीनी उद्योग के एक अन्य अधिकारी ने कहा, इस प्रक्रिया में, योजना ठीक से नहीं शुरु हो पाई है. इस योजना को जून 2018 में शुरु किया गया था और अभी भी मंत्रालय आवेदनों की जांच ही कर रहा है. इस कछुआ गति से, चीनी मिलों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. एक इथेनॉल इकाई को लगाने के लिए कम से कम 18 महीने लगते हैं.

मौजूदा वक्त में, 3-4 लाख टन चीनी इथेनॉल बनाने के लिए दी जाती है. योजना के तहत अतिरिक्त क्षमता के निर्माण के बाद, 9-10 लाख टन चीनी को इथेनॉल (Ethanol) उत्पादन के लिए स्थानांतरित किये जाने की उम्मीद है. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार चीनी मिलों ने चीनी सत्र 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में 22 अक्टूबर तक तेल विपणन कंपनियों (OMC) को 175 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की है और उन्हें पेट्रोल के साथ 5.2 प्रतिशत सम्मिश्रण का स्तर प्राप्त करने में मदद की है.

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किसानों के हित में बड़ा फैसला
चीनी मिलों की नकदी की स्थिति में सुधार लाने, चीनी के भंडार को कम करने तथा किसानों के गन्ने के बकाया का समय पर भुगतान करने के लिए आसान ब्याज दर वाले लोन की घोषणा की गई थी. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्यों दोनों द्वारा निर्धारित गन्ने के मूल्य के आधार पर, इस वर्ष अभी तक गन्ने का बकाया 9,000 करोड़ रुपये से अधिक है.

ब्राजील के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश, भारत में चीनी की बहुतायत है. भारत ने वर्ष 2017-18 तथा वर्ष 2018-19 में क्रमश: 3.25 करोड़ टन और 3.31 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया था, जो चीनी की घरेलू खपत 2.5 करोड़ टन से अधिक रही है.

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First published: November 13, 2019, 7:17 PM IST
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