आर्थिक ग्रोथ को लग सकता है झटका! GDP 7.2% और रुपया 75/$ पहुंचने का अनुमान

रेटिंग एजेंसी फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रुपया अगले साल यानी 2019 के अंत तक रुपये के 75 प्रति डॉलर का स्तर छूने की आशंका जताई है.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 12:39 PM IST
आर्थिक ग्रोथ को लग सकता है झटका! GDP 7.2% और रुपया 75/$ पहुंचने का अनुमान
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: December 6, 2018, 12:39 PM IST
भारत की जीडीपी ग्रोथ आने वाली तिमाहियों में और घट सकती है. रेटिंग एजेंसी फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत की आर्थिक ग्रोथ 7.8 फीसदी से घटकर 7.2% रह सकती है. वहीं, एजेंसी ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भी ग्रोथ का अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है. साथ ही, एजेंसी ने अगले साल यानी 2019 के अंत तक रुपये के 75 प्रति डॉलर का स्तर छूने की आशंका जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर ट्रेड वॉर का बड़ा असर दिखा है. अगले साल भी ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के और गड़बड़ाने की आशंका है. ऐसे में उभरते देशों की करेंसी पर निगेटिव असर होगा.

आपको बता दें कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की जीडीपी ​ग्रोथ रेट गिरकर 7.1 फीसदी रही. जबकि पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में यह 8.2 फीसदी थी. वहीं, रिजर्व बैंक ने बुधवार को पेश द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.4 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा है. (ये भी पढ़ें-RBI के SLR घटाने से क्या होगा, जानिए पॉलिसी की 7 बड़ी बातें)

कई ब्रोकरेज हाउस ने घटाया भारतीय आर्थिक ग्रोथ का अनुमान

सिटी-  अमेरिकी के सबसे बड़े बैंक सिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही में ग्रोथ 7.6 प्रतिशत रही और यह पूरे साल के लिए 7.5 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के उसके अनुमान की राह पर है, लेकिन गिरावट के रुझान और मुश्किल वित्तीय स्थितियों के कारण इस वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ के उसके अनुमान पर आंच आती दिख रही है.

CLSA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेस ईयर इफेक्ट को शामिल करने पर भी जीडीपी का आंकड़ा उम्मीद से कम रहा. सीएलएसए ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से लगे झटकों का असर इन आंकड़ों पर नहीं दिख रहा है, लेकिन मुश्किल वित्तीय स्थितियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.5 प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ कर पाने की गुंजाइश सीमित है.(ये भी पढ़ें-विजय माल्या को भारी पड़ी अपनी ये छोटी से गलती! 10 साल में डूब गया करोड़ों का एंपायर)

डॉएचे बैंक- एनबीएफसी सेक्टर की समस्याओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर इसके प्रभाव का असर ग्रोथ पर पड़ सकता है. यह दिसंबर क्वॉर्टर से दिखने लगेगा. डोएचे ने कहा कि जनवरी-मार्च 2019 क्वॉर्टर के दौरान ग्रोथ में सुस्ती ज्यादा महसूस की जाएगी. उसने कहा कि वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत से नीचे जा सकती है.(ये भी पढ़ें-LIC की खास पॉलिसी! एक बार पैसा जमा करें, जीवनभर पेंशन की गारंटी)

इडलवाइज- भारत के बड़े ब्रोकरेज हाउस इडलवाइज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अब पड़ रहे असर, लेनदेन लायक नकदी को लेकर मुश्किलों और फेस्टिव सीजन ज्यादा जोरदार न रहने के कारण पूरे साल के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कमी आ सकती है. इडलवाइज ने कहा कि दूसरे क्वॉर्टर के लिए जीडीपी के आंकड़ों से आरबीआई को मॉनेटरी पॉलिसी में ब्याज दरों पर अपने कदम रोकने का मौका मिलेगा और सरकार इस आधार पर ज्यादा खर्च कर सकेगी.(ये भी पढ़ें-बड़े काम है पोस्ट ऑफिस का यह गुल्लक, 1000 रुपये महीने का निवेश बन जाएगा 72500 रुपये)
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