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केंद्र ने पेश किया प्री-पैकेज इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस, जानें तंगी से जूझ रहे एमएसएमई सेक्‍टर को कैसे मिलेगी मदद

केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए अब तक कई कदम उठाए हैं.

केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए अब तक कई कदम उठाए हैं.

केंद्र सरकार ने कर्जदारों को ध्‍यान में रखते हुए एक अनौपचारिक हाइब्रिड प्रक्रिया प्री-पैकेज इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस (Pre-package Insolvency Resolution Process) तैयार की है. इसके तहत कोरोना संकट की वजह से दिवालिया हो चुके या होने के जोखिम से जूझ रहे माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) की मदद की जाएगी.

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    नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) के लिए अहम और कोरोना संकट के कारण तंगी (Financial Crisis) से जूझ रहे सूक्ष्‍म, लघु व मझोले उद्योगों (MSMEs) की मदद के लिए खास पहल की है. इसके तहत सरकार महामारी के कारण दिवालिया हो चुके या होने के जोखिम का सामना कर रहे छोटे उद्योगों के लिए एक अध्यादेश लेकर आई है. इसमें एमएसएमई के लिए प्री-पैकेज्‍ड इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस (Pre-package Insolvency Resolution Process) पेश किया गया है. यह एक प्री- पैकेज्ड, अनौपचारिक हाइब्रिड और कर्जदारों को ध्यान में रखकर तैयार की गई प्रक्रिया है] जो इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत काम करेगी.

    मुश्किल दौर में भी चलता रहेगा कारोबार, नहीं छिनेगा लोगों का रोजगार
    सरकार ने अध्यादेश में कहा है कि माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज भारतीय इकोनॉमी के लिए बहुत ही अहम हैं. देश की जीडीपी में इनका बड़ा योगदान है. देश की बड़ी आबादी को इनमें रोजगार मिलता है. इन उद्योगों के खास तरह के बिजनेस मॉडल और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को देखते हुए इनकी इनसॉल्वेंसी से जुड़े सवालों को तेजी से सुलझाने की जरूरत है. यह प्री-पैकेज आईबीसी के तहत एमएसएमई के दायरे में आने वाले उद्योगों के लिए वैकल्पिक इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस का काम करेगा औऱ सभी हितधारकों को इससे कॉस्‍ट इफेक्टिव और वैल्यू बढ़ाने वाले नतीजे मिलेगे. इस प्रक्रिया से कम से कम अव्यवस्था उत्पन्‍न होगी और उद्योगों का कारोबार भी जारी रहेगी. इससे मुश्किल दौर में लोगों का रोजगार भी नहीं छिनेगा.

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    केंद्र ने डिफॉल्‍ट की न्‍यूनतम राशि बढ़ाकर कर दी है 1 करोड़ रुपये
    केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए अब तक कई कदम उठाए हैं. इनके तहत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस शुरू करने के लिए डिफॉल्ट की न्‍यूनतम राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया गया है. साथ ही 25 मार्च 2020 से 1 साल में हुए डिफॉल्ट के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस शुरू करने को निलंबित कर दिया है. हालांकि, यह अवधि 24 मार्च 2021 को खत्‍म हो गई है. नई प्री-पैकेज रूपरेखा पर नजर डालें तो इसे शुरू करने के लिए कम से कम 66 फीसदी देनदारों (Creditors) की मंजूरी जरूरी होगी. इस प्री-पैकेज को 120 दिन के अंदर पूरा करना होगा.

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