Farm Act 2020: नाराज किसानों को रिझाने के लिए राजनाथ सिंह ने संभाला मोर्चा, क्या इस तरह बनेगी बात?

कृषि कानून पर राजनाथ सिंह ने संभाला मोर्चा (File Photo)
कृषि कानून पर राजनाथ सिंह ने संभाला मोर्चा (File Photo)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं और पद्मश्री प्राप्त प्रोग्रेसिव किसानों से की बात. हालांकि, एमएसपी पर सवाल अब भी बरकरार है!

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 6:24 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. नए कृषि कानून (Farm Act 2020) को लेकर चौतरफा घिरी केंद्र सरकार अब कुछ प्रोग्रेसिव किसानों, किसान नेताओं और विशेषज्ञों की मदद से जनता का मन बदलने की कोशिश में जुट गई है. कांग्रेस के आंदोलन के बीच पार्टी स्तर पर किसानों को समझाने का कार्यक्रम भी बन गया है. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है. मंगलवार को उनके घर पर 10 किसान प्रतिनिधियों को बुलाया गया. जिसमें 6 किसान पद्मश्री प्राप्त किसान भी शामिल रहे. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मीटिंग में शामिल हुए. बैठक में ले देकर बात न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अटक गई. जिसके बारे में कुछ किसान प्रतिनिधियों ने दोनों मंत्रियों के सामने अपने तर्क रखे.

कृषि मंत्री तोमर ने कहा, लंबे समय से कृषि सुधार के लिए किसान नेता, विशेषज्ञ और पक्ष-विपक्ष की पार्टियां भी मांग करती रही हैं. उसी मांग के अनुरूप किसान हित में मोदी सरकार ने यह निर्णय लिया है. लेकिन अब कुछ दल अपने राजनीतिक हितों के लिए इनका विरोध कर रहे हैं. ऐसे में हमने यह बैठक आशंकाओं को दूर करने के लिए बुलाई है. बैठक में शामिल एक प्रतिनिधि ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने बताया कि नए कृषि कानून से कृषि क्षेत्र तरक्की ओर बढ़ेगा. मंडी और एमएसपी व्यवस्था लागू रहेगी. मीटिंग का संचालन करते हुए इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन एमजे खान ने कृषि रिफॉर्म्स के सकारात्मक पहलुओं को रेखांकित किया.

New farm law, Agriculture budget, Ministry of Agriculture, congress, modi government, MSP, FPO, Economy, नया कृषि कानून, कृषि बजट, कृषि मंत्रालय, कांग्रेस, मोदी सरकार, न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी, एफपीओ, अर्थव्यवस्था
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गिनाईं उपलब्धियां




इसे भी पढ़ें: यूपी से बिहार और एमपी तक तबाह हुई किसानों की फसल, मुआवजे का पता नहीं
किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने कहा  कि मंडी से बाहर खरीद जो नई खरीद व्यवस्था बनाई गई है उसमें एमएसपी को बाध्यकारी बनाया जाए. क्योंकि यह खरीद सरकार को नहीं बल्कि बाहर वालों यानी निजी क्षेत्र को करनी है. एमएसपी को बाध्यकारी बनने के बाद निजी क्षेत्र को परचेज में अधिकतम 25 से 30 हजार करोड़ रुपये की ही अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ेगी. इससे किसान (Farmer) खुश रहेगा और सरकार की जेब से कुछ जाएगा भी नहीं.



सिंह ने बताया कि देश में सालाना कुल 30 करोड़ टन खाद्यान्न (Food Grains) का उत्पादन हो रहा है. इसमें गेहूं, चावल, मोटे अनाज और दालें आदि शामिल है. इसमें से 15 करोड़ टन किसान खुद इस्तेमाल करता है और शेष 15 करोड़ टन बाजार में जाता है. जिसमें से 9 करोड़ टन सरकारी खरीद है. लगभग 6 करोड़ टन प्राइवेट ट्रेडर खरीद रहा है.

निजी क्षेत्र एमएसपी से औसतन 500 रुपये प्रति क्विंटल कम पर खरीद करता है. एमएसपी बाध्यकारी बनाने के बाद उसे औसतन यही 500 रुपये क्विंटल अधिक देना होगा. कुल मिलाकर पूरे प्राइवेट सेक्टर को सालाना 30,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त करना होगा. यह राशि बहुत अधिक नहीं है और सरकार को भी नहीं देनी है. इसलिए उसे एमएसपी को बाध्यकारी बनाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए. हालांकि, दोनों मंत्रियों ने एमएसपी पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया.

Farm Act 2020, नया कृषि कानून, PM-Kisan Samman Nidhi Scheme, पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम, Kisan Credit Card, किसान क्रेडिट कार्ड, Mandi and MSP, मंडी और एमएसपी व्यवस्था, Farmers news, किसान समाचार
कृषि कानून के खिलाफ जारी है आंदोलन, 'ट्रैक्टर रैली' में शामिल राहुल गांधी (Photo-Congress)


इसे भी पढ़ें: जहां MSP पर ज्यादा हुई खरीद वहां किसानों की आय सबसे अच्छी

चौधरी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (PM-Kisan Samman Nidhi Scheme) की रकम बढ़ाकर कम से कम 12 हजार रुपये सालाना करने और आगे चलकर इसे 24 हजार रुपये तक करने की मांग भी रखी. कहा कि यह किसानों के लिए सबसे कारगर योजना है. इसके अलावा मनरेगा मजदूरों को कृषि कार्य में लगाने,  किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) की लिमिट डबल करने और ब्याज में छूट की सीमा 3 से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग भी रखी. साथ ही प्राइवेट डेयरियों द्वारा भी किसानों की सहकारी संस्था अमूल के रेट पर ही दूध की खरीद हो, इसके लिए कानूनी प्रावधान किया जाए.

इस मौके पर पद्मश्री अवार्डी किसान कमल सिंह चौहान, सुल्तान सिंह, नरेंद्र सिंह, (हरियाणा), रामशरण वर्मा, भारत भूषण त्यागी (यूपी) और राजस्थान निवासी जगदीश प्रसाद पारिख मौजूद रहे. इसके अलावा आर्गेनिक फार्मिंग करने वाले हरपाल सिंह ग्रेवाल, किसान नेता बिजेंद्र सिंह दलाल एवं मानसिंह यादव आदि मौजूद रहे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज