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झटका! बजट में इनकम टैक्स रेट में नहीं होगी कटौती, ये है वजह

भाषा
Updated: October 30, 2019, 9:20 PM IST
झटका! बजट में इनकम टैक्स रेट में नहीं होगी कटौती, ये है वजह
वित्तीय दबाव को देखते हुये सरकार की ओर से इनकम टैक्स रेट में कटौती की संभावना नहीं

वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार की ओर से इनकम टैक्स रेट में कटौती की संभावना नहीं है.

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नई दिल्ली. आर्थिक नरमी (Economic Slowdown) और राजस्व प्राप्तियों के अनुमान से कम रहने के मद्देनजर सरकार की ओर से सुपर रिच को व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) की दरों में राहत दिये जाने की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई देती है. सूत्रों ने यह बात कही है.

हाल के दिनों में यह सुझाव जोर पकड़ रहा है कि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत इनकम टैक्स दरों में कटौती की जानी चाहिए. सरकार ने मांग और निवेश बढ़ाने के लिए इससे पहले कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स में 10 प्रतिशत की बड़ी कटौती की है. उसके बाद से पर्सनल इनकम टैक्स में राहत की मांग तेज हो गई है.

इन वजहों से इनकम टैक्स में कटौती मुश्किल
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में पर्सनल इनकम टैक्स दरों में कटौती बहुत मुश्किल है. आर्थिक सुस्ती, कर प्राप्ति कम होने और गैर-कर प्राप्ति भी अनुमान से कम रहने जैसे कई कारण है जिनकी वजह से इनकम टैक्स की दरों में कटौती करना काफी मुश्किल काम होगा.

13.80 लाख करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स प्राप्त करने का लक्ष्य
सरकार पिछले वित्त वर्ष में भी अपना प्रत्यक्ष कर प्राप्ति का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी. प्रत्यक्ष कर में कंपनी कर, पर्सनल इनकम टैक्स कर शामिल है. चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर प्राप्ति का 13.80 लाख करोड़ रुपये का ऊंचा लक्ष्य रखा गया है.

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डायरेक्ट टैक्स वसूली पर दबाव
सरकार को आयुष्मान भारत, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, पीएम-किसान और पीएम आवास योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के लिए अधिक धन की जरूरत है. इन योजनाओं के लिए सरकार को धन की काफी जरूरत है क्योंकि अप्रत्यक्ष कर प्राप्ति पर भी पहले ही दबाव बना हुआ है.

GST कलेक्शन में गिरावट
माल एवं सेवाकर (GST) में राजस्व प्राप्ति हाल के महीनों में कम हुई है. इसके अलावा कॉरपोरेट कर कटौती के रूप में सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये के राजस्व छोड़ने का अनुमान लगाया है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए 28 साल में पहली बार कंपनियों के लिए कंपनी कर में सीधे 10 प्रतिशत तक की कटौती की है.

5 लाख की सालान आय पहले ही कर चुकी है टैक्स फ्री
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के निम्न स्तर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई. सूत्रों का कहना है कि सरकार करदाताओं को पहले ही कई तरह की रियायतें दे रही है. पर्सनल टैक्सपेयर्स की 5 लाख रुपये सालाना की आय करीब-करीब टैक्स फ्री कर दी गई है.

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सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के कार्यों पर खर्च बढ़ाते हुए 2019-20 के बजट में सुपर रिच पर कर सरचार्ज में वृद्धि की है. 2 करोड़ से लेकर 5 करोड़ रुपये सालाना कमाई करने वाले सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाने से उन पर टैक्स की दर 39 प्रतिशत और 5 करोड़ रुपये से अधिक कमाई करने वालों पर बढ़े सरचार्ज से टैक्स की दर 42.74 प्रतिशत तक पहुंच गई.

डायरेक्ट टैक्स पर गठित समिति ने टैक्स कट की बात कही
सरकार ने जैसे ही कंपनी कर में कटौती की घोषणा की उसके बाद से पर्सनल इनकम टैक्स दर में कटौती की मांग भी उठने लगी. प्रत्यक्ष कर संहिता पर गठित समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में पर्सनल इनकम टैक्स में नरमी लाए जाने की बात की है. दूसरी तरफ राजस्व प्राप्ति बढ़ाने के लिए कर अनुपालन को बेहतर बनाने का सुझाव दिया गया है.

देश के कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा काफी ज्यादा है. वर्ष 2009-10 में कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा 61 प्रतिशत तक रहा. पिछले साल यह 55 प्रतिशत के आसपास रहा. पिछले वित्त वर्ष में व्यक्तिगत आयकर प्राप्ति 4.7 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 2.5 प्रतिशत रही जबकि इस साल व्यक्तिगत आयकर प्राप्ति में 23 प्रतिशत की महत्वकांक्षी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है जबकि 2018- 19 में यह वृद्धि केवल 10 प्रतिशत ही रही थी.

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First published: October 30, 2019, 8:56 PM IST
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