छोटे कर्जदारों को राहत देगी मोदी सरकार, कर्ज न चुकाने वाले को बैंक नहीं करेंगे परेशान

News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 9:45 AM IST

अगर आपने छोटी रकम का कर्ज लिया है और उसे चुकाने में दिक्कत हो रही है, तो सरकारी बैंक आपके साथ नरमी से पेश आ सकते हैं.

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नई दिल्ली. अगर आपने छोटी रकम का कर्ज लिया है और उसे चुकाने में दिक्कत हो रही है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि मोदी सरकार (Modi Government) कर्ज नहीं चुकाने वाले छोटे कर्जदारों को राहत दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने   सरकारी बैंक (PSU Bank) छोटे कर्जदारों के साथ नरमी से पेश आ सकते हैं.

मंदी की वजह से छोटे कारोबारियों का डिफॉल्ट बढ़ा है. डिफॉल्ट की बढ़ती घटनाओं पर सरकार सतर्क हो गई है.  सूत्रों के हवाले से सीएनबीसी आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक अगर छोटे कर्ज डिफॉल्ट करते हैं तो सरकारी बैंक परेशान नहीं करेंगे. सरकारी बैंक कार्रवाई करने से पहले डिफॉल्ट की वजह सझेंगे. अगर वाजिब वजहों से डिफॉल्ट हुआ है तो नरमी बरतने को कहा गया है. वहीं बैंक संपत्ति जब्त करने या नीलाम करने से पहले दूसरे विकल्प तलाशें. ये भी पढ़ें: इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार देगी आधे से ज्यादा पैसा, जानें क्या है प्लान?



कौन हैं छोटे कर्जदार

छोटे कर्जदार वो हैं जो सिर्फ लाखों में कर्ज नहीं लिए हैं बल्कि 2 करोड़ रुपये या 4 करोड़ रुपये तक कर्ज लिए हैं. वैसे कर्जदार कर्ज चुकाने में नाकाम हैं तो पहले देखें कि कर्ज नहीं चुकाने के पीछे वजह क्या है. अगर कुछ वाजिब वजह है तो फिर आप उनकी संपत्ति को जब्त न करें, उनको नीलाम न करें. आप दूसरे विकल्प अपनाएं.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कर्ज लेकर नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टरों की संपत्तियों और खातों का ब्योरा बैंकों के साथ साझा करेगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने सरकारी बैंकों की अपील पर आयकर विभाग को यह निर्देश जारी किया है. बैंकों ने कर्ज भुगतान में चूक करने वाली इकाइयों पर शिकंजा कसने के लिए यह अपील की थी.

लोन नहीं चुकाने वालों के पास भी होते हैं अधिकार
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अपना लोन वसूलने के लिए बैंक रिकवरी एजेंटों की सेवाएं (Recovery Agent) ले सकते हैं. लेकिन, ये अपनी हद पार नहीं कर सकते हैं. ग्राहकों को धमकाने या जोर जबर्दस्ती करने का अधिकार नहीं है. वे ग्राहक के घर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच जा सकते हैं. हालांकि, वे ग्राहकों से बदसलूकी नहीं कर सकते हैं. अगर इस तरह का दुर्व्यवहार होता है तो ग्राहक इसकी शिकायत बैंक में कर सकते हैं. बैंक से सुनवाई न होने पर बैंकिंग ओंबड्समैन का दरवाजा खटखटाया जा सकता है.



(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक-पॉलिटिकल एडिटर, CNBC आवाज़)

 

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First published: September 11, 2019, 1:29 PM IST
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