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सरकार खत्म कर सकती है ये तीन बड़े टैक्स, आपके पैसों पर होगा सीधा असर!

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Updated: October 30, 2019, 9:41 PM IST
सरकार खत्म कर सकती है ये तीन बड़े टैक्स, आपके पैसों पर होगा सीधा असर!
शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वालों को जल्द तीन बड़े टैक्स (STT, DDT, LTCG) से छुटकारा मिल सकता है. इसका फायदा म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में SIP के जरिए पैसा लगाने वालों को भी मिलेगा.

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वालों को जल्द तीन बड़े टैक्स (STT, DDT, LTCG) से छुटकारा मिल सकता है. इसका फायदा म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में SIP के जरिए पैसा लगाने वालों को भी मिलेगा.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 9:41 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिवाली के बाद आम लोगों को एक और बड़ा तोहफा देने की तैयारी पूरी कर ली है. दरअसल, शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वालों को जल्द तीन बड़े टैक्स (STT, DDT, LTCG) से छुटकारा मिल सकता है. सूत्रों की मानें तो तीन बड़े टैक्स सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (Securities Transaction Tax, STT), लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को खत्म करने की तैयारी है. इस टैक्स के खत्म होने से निवेशकों (Investors) को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा. साथ ही, लंबे समय से इंतजार कर रहे विदेशी निवेशकों को भी बड़ी राहत मिलेगी.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो सेंसेक्स (Sensex), निफ्टी (Nifty) यहां से नई ऊंचाई छूते नज़र आएंगे. इससे एक तो आप शेयर खरीदने और बेचने पर ज्यादा मुनाफा कमा पाएंगे क्योंकि एसटीटी नहीं देना होगा. वहीं, ज्यादा पैसा बनाने पर भी टैक्स नहीं देना होगा. इसके साथ ही म्यूचुअल फंड (Mutual Funds Investment) निवेशकों को भी इसका फायदा मिलेगा, क्योंकि इस फैसले से शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी आएगी. ऐसे में SIP और अन्य तरीकों से लगे पैसे पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा.

इन तीन टैक्स को खत्म करने की तैयारी में सरकार
मोदी सरकार (Modi Government) शेयर बाजार (Share Market) में निवेशकों (Investor) को बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लेने वाली है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाले हफ्तों में टैक्स छूट का फायदा दे सकती हैं. मतलब साफ है कि STT, LTCG और DDT टैक्स को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है. CNBC-आवाज़ ने फाइनेंस मिनिस्ट्री और नीति आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया है कि विदेशी करेंसी को आकर्षित करने और निवेश बढ़ाने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है.

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इससे क्या होगा
वीएम पोर्टफोलियो के रिसर्च हेड विवेक मित्तल ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि डीडीटी के हटने से निवेशकों को बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि डिविडेंड के तौर पर मोटा पैसा पाने पर टैक्स नहीं लगेगा. ऐसे में विदेशी निवेशक ज्यादा निवेश कर पाएंगे. लिहाजा शेयर बाजार में तेजी आएगी.
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>> विवेक के मुताबिक, म्यूचुअल फंड हाउस को तो ज्यादा फायदा होगा क्योंकि वो कुल मुनाफे में से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के तौर पर जो रकम रखते हैं वो अब नहीं रखनी होगी. ऐसे में ज्यादा पैसा शेयर बाजार में लगेगा और एसआईपी के जरिए पैसा लगाने वालों का रिटर्न भी बढ़ जाएगा.



>> कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर पशुपति सुब्रमण्यम ने न्यूज18 हिंदी के साथ खास बातचीत में कहा है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स अगर हटता है या फिर दरों में कोई भी बदलाव होता है तो सीधे तौर पर इसका फायदा शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों को मिलेगा.

सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से जुड़ी जरूरी बातें जानिए
एसटीटी 2004 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था और उसी साल 1 अक्टूबर से लागू हुआ था. इसे लाने के पीछे तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम का मकसद कैपिटल गेन टैक्स से बचने की कोशिश करने वालों को पकड़ना था. अगर आसान शब्दों में कहें तो कई लोग शेयरों की बिक्री पर अपना मुनाफा छुपाकर टैक्स बचाते थे. इसीलिए सरकार ये टैक्स लाई थी.

>> शेयर बाजार में शेयरों की खरीद और बिक्री पर ये टैक्स लगता है. जब भी आप कोई शेयर खरीदते हैं उसकी कीमतों में ये टैक्स शामिल होता है. शेयर बाजार के ब्रोकर्स को इस टैक्स को स्वचालित रूप से लेन-देन की कीमत में जोड़ना पड़ता है, इसलिए इसे टालने का उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

>> सिक्‍योरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स की सिक्‍योरिटी जिन पर लागू होती है वो हैं शेयर्स, बॉन्‍ड, डिबेंचर्स,  डेरिवेटिव्‍स, यूनिट्स, निवेश करने वाली कोई स्‍कीम इक्‍विटी पर आधारित स्कीम पर ये टैक्स लगता है. सिक्‍योरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स के लिए टैक्‍स की दर सरकार तय करती है और वह सिक्‍योरिटी के प्रकार और ट्रांजैक्‍शन के प्रकार पर निर्भर करता है फिर चाहे वो खरीदा गया हो या बेचा गया हो.



डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स DDT से जुड़ी जरूरी बातें जानिए
अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देने से पहले भारतीय कंपनियों को 15 फीसदी डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) देना पड़ता है. भारत सरकार कंपनियों पर यह टैक्स लगाती है. किसी वित्त वर्ष में घरेलू कंपनी से मिले 10 लाख रुपये तक के डिविडेंड पर टैक्स से छूट मिलती है. यानी निवेशक को इस पर टैक्स नहीं देना पड़ता. किसी विदेशी कंपनी को अपने शेयरधारकों को दिए गए डिविडेंड पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स का भुगतान करने से छूट दी जाती है.

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>> वहीं, विदेशी कंपनी से प्राप्त डिविडेंड निवेशकों के लिए टैक्सेबल होता है. इसे 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत लिया जाता है. इस पर लागू दरों के अनुसार टैक्स वसूला जाता है. म्यूचुअल फंडों से मिला डिविडेंड निवेशकों के लिए टैक्स फ्री है.

>> लेकिन, उन्हें डेट फंडों के लिए 25 फीसदी की दर से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (29.12 फीसदी सरचार्ज और सेस के साथ) देना पड़ता है. इक्विटी फंडों के लिए यह 10 फीसदी (11.64 फीसदी सरचार्ज और सेस सहित) है.

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) से जुड़ी जरूरी बातें जानिए
इक्विटी यानी शेयर बाजार, इक्विटी म्यूचुअल फंड में वे ही लोग पैसा लगाते हैं जिनकी कमाई बहुत है और तमाम खर्चे करने के बाद अच्छी बचत हो जाती है. ऐसे में सरकार इस तरह के निवेश से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लेती है. इस टैक्स को कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं. कैपिटल गेन टैक्स दो तरह का होता है, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म. इन पर टैक्स की दर भी अलग-अलग होती है.



शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स -अगर आपने कोई शेयर खरीदा या फिर किसी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया और उसे एक साल के भीतर ही बेच दिया तो उससे होने वाली कमाई पर लगेगा 15 फीसदी टैक्स. चाहे आपका टैक्स स्लैब कोई भी हो. चाहे आप जीरो टैक्स में आते हों या फिर 30 फीसदी टैक्स वाले स्लैब में आते हैं, आपको शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर 15 फीसदी टैक्स देना होगा.

>> लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के बारे में जानिए- पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल टैक्स बहुत ही आसान था. इसमें अगर आपने 1 साल तक कुछ नहीं बेचा तो कुछ भी टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन 2018 से सरकार ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं. इसमें अब सरकार ने स्टॉक मार्केट से होने वाली कमाई को भी शामिल कर लिया है.

>> शेयर मार्केट से पहले सरकार घर, संपत्ति, जेवर, कार, बैंक एफडी, एनपीएस और बॉन्ड आदि की बिक्री से हासिल हुए मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलती रही है. अब अगर पहले साल 1 लाख रुपये मुनाफा कमाया है तो कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन 1 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर 10 फीसदी टैक्स देना होगा.

>> लंबी अवधि में किसी भी चल या अचल संपत्ति पर मिलने वाले प्रॉफिट पर लगने वाले टैक्‍स को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स कहा जाता है. यह देश में पहले से ही मौजूद है. 2018 से यह पहली बार स्‍टॉक मार्केट पर लगा है. इससे पहले यह प्रॉपर्टी समेत कई चीजों पर लगता रहा है. अलग-अलग सेगमेंट के हिसाब से लॉन्‍ग टर्म का कैलकुलेशन अलग-अलग होता है.

आपको बताते चलें कि अगर इन तीनों टैक्स पर कोई फैसला होता है तो शेयर बाजार में तेजी आना लगभग तय है. इसका फायदा उठाने के लिए म्यूचुअल फंड में नया निवेश भी किया जा सकता है. वहीं, अगर निवेशित है तो भी ज्यादा रिटर्न का फायदा मिलेगा.

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First published: October 30, 2019, 9:01 PM IST
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