कंपनियों के स्कैम पर लगेगी लगाम, मोदी सरकार ने बनाया ये प्लान!

कॉरपोरेट सेक्टर में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और स्कैम से निजात दिलाने के लिए दोबारा सत्ता में आई मोदी सरकार कुछ बड़ा कदम उठा सकती है. नए सिस्टम के तहत कंपनी बोर्ड्स के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्ति से पहले परीक्षा पास करनी होगी.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 4:27 PM IST
कंपनियों के स्कैम पर लगेगी लगाम, मोदी सरकार ने बनाया ये प्लान!
पीएम नरेंद्र मोदी
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Updated: June 12, 2019, 4:27 PM IST
कॉरपोरेट सेक्टर में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और स्कैम से निजात दिलाने के लिए दोबारा सत्ता में आई मोदी सरकार कुछ बड़ा कदम उठा सकती है. नरेंद्र मोदी सरकार कॉरपोरेट गवर्नेंस सिस्टम में बदलाव की संभावनाएं तलाश रही है. नए सिस्टम के तहत कंपनी बोर्ड्स के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्ति से पहले परीक्षा पास करनी होगी.

कंपनी के डायरेक्टर्स को देनी होगी परीक्षा


मिंट के मुताबिक, कंपनियों के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्त करने से पहले उन्हें परीक्षा देनी होगी. कॉरपोरेट अफेयर्स के टॉप ब्यूरोक्रैट इनचार्ज इनजेती श्रीनिवास ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार डेलॉइट हैस्किंस एंड सेल्स पर भी पाबंदी लगाना चाहती है क्योंकि यह कंपनी की गड़बड़ियों को पकड़ने में नाकाम रही.

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कॉर्पोरेट सेक्टर में कई घोटाले आए सामने
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इंडिया के वॉचडॉग की निगरानी कौन करेगा? पिछले एक साल के दौरान इंडिया में कई स्कैम हुए हैं. ज्वैलर्स को लोन देने वाले सरकारी बैंक को 2 अरब डॉलर का चूना लगा है. वहीं NBFC सेक्टर में क्राइसिस आई और कई अरबपति दिवालिया हो गए. जानकारों का कहना है कि कंपनी के कामकाज पर निगरानी रखने वाले इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को ये घोटाले होने से पहले इन मामलों का पता होना चाहिए.

क्या है परीक्षा की वजह
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श्रीनिवास ने कहा कि हम ये मिथ खत्म करना चाहते हैं कि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के पास कोई ड्यूटी नहीं होती है. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट लिटरेसी को बढ़ावा देना चाहते हैं क्योंकि उन्हे अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेहियों के बारे में पता हो.

यह परीक्षा ऑनलाइन असेसमेंट होगी. इसमें उनसे लॉ, एथिक्स और कैपिटल मार्केट सहित कुछ दूसरे मामलों के बारे में सवाल किए जाएंगे. जो लोग इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बनना चाहते हैं उन्हें यह परीक्षा क्लीयर करनी होगी. इसमें सहूलियत यह है कि वे तब तक परीक्षा दे सकते हैं जब तक पास ना हो जाएं.

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अनुभवी डायरेक्टर्स जो पहले से ही बोर्ड में हैं उन्हें परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी लेकिन उन्हें अपना नाम सरकार के डाटाबेस में शामिल करना होगा. श्रीनिवास ने कहा कि इससे यह पता चलेगा कि किस कंपनी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जरूरत है और कौन उस जगह को भर सकता है. मौजूदा कानून के मुताबिक, हर लिस्टेड कंपनी को अपनी बोर्ड स्ट्रेंथ का एक तिहाई इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करना होगा.

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