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सिस्तान-बलूचिस्तान में टिड्डी दल की जड़ पर प्रहार करेगा भारत, राहत की सांस लेंगे किसान

भारत में इस बार टिड्डडी दल का सबसे बड़ा हमला

भारत में इस बार टिड्डडी दल का सबसे बड़ा हमला

ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में हो रहा नए टिड्डी दल का निर्माण, वहीं पर मारने के लिए भारत ने ईरान को भेजा 25 मीट्रिक टन मैलाथियान

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    नई दिल्ली. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO- Food and Agriculture Organisation) की रिपोर्ट बता रही है कि टिड्डी का पतिंगा अवस्था वाली आबादी का निर्माण ईरान (Iran) के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में हो रहा है. यह आने वाले महीनों में भारत की ओर पलायन करेगा और दोबारा फसलों की तबाही का कारण बनेगा. मोदी सरकार ने इसकी जड़ पर प्रहार करके दूसरे देश में ही इस खत्म कर देने का प्लान बनाया है. यानी इनके प्रजनन स्थल पर ही समाप्त करने के लिए ईरान से संपर्क किया गया है.

    एचआईएल इंडिया लिमिटेड ने ‘सरकार-से-सरकार’ पहल के तहत ईरान को टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 25 मीट्रिक टन मैलाथियान (95% यूएलवी) भेजा है. यह रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) का कीटनाशक निर्माता पीएसयू है.

    हॉर्न ऑफ अफ्रीका, पूर्वी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप में फसलों की भारी तबाही करने के बाद मरुस्थलीय टिड्डे मार्च और अप्रैल में भारत में प्रवेश कर गए थे. इसने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश राज्यों के खेतों से लेकर बागवानी फसलें तक तबाह हो गईं. देश वर्तमान समय में 25 साल के सबसे ज्यादा बुरे टिड्डी आक्रमण का सामना कर रहा है.

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    राजस्थान में टिड्डियों के न्यूट्रिशनल वैल्यू पर होगी स्टडी (Demo Pic)


    इसलिए सरकार चाहती है कि इस बार ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में जो टिड्डियां पैदा हो रही हैं उन्हें भारत आने से पहले वहीं पर खत्म दिया जाए. भारत ने हाल ही में ईरान और पाकिस्तान से इस क्षेत्र में मरुस्थलीय टिड्डे के खतरे से मुकाबला करने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया अपनाने के लिए संपर्क किया था. ईरान ने इस प्रस्ताव पर अपनी इच्छा व्यक्त की है.

    इसके बाद विदेश मंत्रालय ने एचआईएल इंडिया लिमिटेड को ईरान के लिए 25 मीट्रिक टन मैलाथियान (Malathion) भेजने के आदेश दिए. ईरान तक यह खेप आज 16 जून तक पहुंचने की उम्मीद है.

    एचआईएल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture) के टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम (Locust Control Programme) के लिए भी मैलाथियान दे रहा है. 2019 से लेकर अब तक, कंपनी द्वारा इस कार्यक्रम के लिए 600 मीट्रिक टन से ज्यादा मैलाथियान दिया गया है.

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