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कॉपर इंडस्ट्री को राहत देने की तैयारी सरकार की, सस्ते इंपोर्ट पर कसेगा शिकंजा

News18Hindi
Updated: December 2, 2019, 2:50 PM IST

कॉपर वायर के सस्ते इंपोर्ट से घरेलू कॉपर इंडस्ट्री परेशान है. फिलहाल इसके कच्चे माल पर 2.5 फीसदी की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. वहीं, तैयार कॉपर वायर पर इफेक्टिव ड्यूटी जीरो फीसदी है.

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  • Last Updated: December 2, 2019, 2:50 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार (Modi Government) कॉपर इंडस्ट्री (Copper Industry) को राहत देने की तैयारी में है. सरकार कॉपर के सस्ते इम्पोर्ट पर शिकंजा कसने वाली है. नीति आयोग (Niti Aayog) ने इस पर वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) से जरूरी कदम उठाने की सिफारिश की है. सरकार के इस कदम से वेदांता (Vedanta), हिंडाल्को (Hindalco) जैसी बड़ी कंपनियों के साथ छोटी कंपनियों को राहत मिलेगी.

सस्ते कॉपर वायर इंपोर्ट से इंडस्ट्री परेशन
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तीन हफ्ते पहले नीति आयोग में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. उस बैठक में नीति आयोग के वाइस चेयमैन और कॉपर इंडस्ट्री के दिग्गज वेदांता और हिंडाल्को कंपनी शामिल हुई थी. इस बैठक में मुद्दा ये था कि देश में सस्ता कॉपर इम्पोर्ट हो रहा है. इस बैठक में एक खास प्रोडक्ट का जिक्र किया गया कि घरेलू कंपनियां बड़े पैमाने पर 6 एमएम से कम कॉपर वायर का उत्पादन करती है. लेकिन इसका बहुत ज्यादा इम्पोर्ट हो रहा है.

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इंडस्ट्री को हो रहा बहुत ज्यादा नुकसान
यह इम्पोर्ट उन देशों से हो रहा है जिनसे हमारा द्विपक्षीय करार है. द्विपक्षीय करार होने की वजह से कॉपर वायर पर इफेक्टिव ड्यूटी जीरो फीसदी पर है. जबकि उसी कॉपर वायर को बनाने के लिए इम्पोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल पर 2.5 फीसदी की इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है. इसको खत्म किया जाए और कच्चे माल पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई जाए या फिर तैयार माल पर इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई जाए. क्योंकि इंडस्ट्री को इससे बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है.

सूत्रों के मुताबिक बैठक में नीति आयोग इंडस्ट्री की दलीलों से सहमत हुआ है. इसके पहले पूरे घरेल कॉपर इंडस्ट्री को लेकर आईआईएफटी में एक रिसर्च किया गया था जिसमें यह मुद्दा उठा था. दोनों को मिलाकर नीति आयोग ने वित्त मंत्रालय से सिफारिश की है आप इस इंवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करें.
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(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिटिकल एडिटर- CNBC आवाज़)

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First published: December 2, 2019, 2:50 PM IST
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