लाइव टीवी

मोदी सरकार की स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम से किसानों को क्या मिला?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 20, 2020, 12:25 PM IST
मोदी सरकार की स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम से किसानों को क्या मिला?
मशीन बैंक बनाने पर 40 से 80 प्रतिशत तक सरकारी सहायता है

स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम के पांच साल पूरे, कृषि मंत्रालय का दावा-प्रोडक्टिविटी में 5-6% वृद्धि, रासायनिक खाद की खपत में 10 फीसदी की कमी, लेकिन किसान संगठनों ने विश्वसनीयता पर उठाए सवाल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2020, 12:25 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कृषि और किसान को आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई मोदी सरकार की स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम (Soil Health Card Scheme) के 5 साल पूरे हो गए. इस दौरान देश में 22.5 करोड़ कार्ड किसानों को दिए जा चुके हैं. जिसके जरिए उन्हें पता चल रहा है कि किस खेत में कौन से तत्व की कमी है. जिसकी कमी है उस तत्व को खाद के रूप में डाला जा रहा है और जिसकी कमी नहीं है उसे नहीं डाला जा रहा. बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई किसानों को इसका कोई लाभ मिला है या सिर्फ यह सिर्फ कागजी काम भर है. कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) का दावा इस कार्ड से 8-10 प्रतिशत की सीमा तक रासायनिक खाद के इस्तेमाल में कमी आई है. जबकि उपज (प्रोडक्टिविटी) में 5-6 फीसदी की वृद्धि हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी, 2015 को राजस्‍थान के सूरतगढ़ में स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम लॉन्‍च की थी.

केंद्र सरकार ने यह निष्कर्ष दो संस्थाओं नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशन मैनेजमेंट (MANAGE), हैदराबाद की स्टडी के आधार पर निकाला है. हालांकि किसान नेता इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.

कितने किसानों को पता कि उनके खेत से सैंपल लिया गया?
राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद कहते हैं, “सरकार आंकड़ा बता सकती है कि इतने करोड़ कार्ड बन गए, उसके लाभ के दावे भी कर सकती है लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि क्या किसानों को पता है कि उनके खेत से मिट्टी का सैंपल कब उठाया गया?”



soil testing business, soil management, soil testing business plan, soil testing business for sale, soil testing services business, starting a soil testing business, गांव में रोजगार कैसे करें, गांवों में रोजगार, गांव में चलने वाला रोजगार, गांव में बिजनेस करने का तरीका, गांव में बिजनेस करने का तरीका, गांव में बिजनेस करने के तरीके, गांव में बिजनेस कैसे शुरू करें, गांव में बिजनेस करना, business news in hindi, agriculture ministry, modi government, Bio-fertilizers, किसानों को पता कि उनके खेत से सैंपल लिया
क्या ठीक तरीके से बनाए जा रहे हैं स्वायल हेल्थ कार्ड?  (File Photo)




आनंद कहते हैं “दरअसल, सरकार पैसा भले जारी कर रही है, उसका आंकड़ा दिखा रही है लेकिन जमीन पर इसका इंप्लीमेंटेशन ठीक से नहीं हो रहा. कई जगह पूरे गांव को नहीं पता है कि मिट्टी का सैंपल कब लिया गया और किसान के पास रिपोर्ट आ गई.”

सरकार की रिपोर्ट
नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल: इसकी स्टडी में कहा गया है कि जब से किसान इस कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं 8-10 प्रतिशत तक रासायनिक उर्वरक के उपयोग में कमी आई है. मृदा स्वास्थ्य कार्ड में उपलब्ध सिफारिशों के अनुसार उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के कारण फसल की उपज में कुल मिलाकर 5-6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

मैनेज रिपोर्ट: उर्वरक उपयोग विशेषकर नाइट्रोजन में कुछ कमी तथा जैव-उर्वरकों (Bio-fertilizers) एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग में वृद्धि आई है. धान के किसानों ने यूरिया के उपयोग को 9 प्रतिशत तथा डीएपी/एसएसपी को 7 प्रतिशत से कम किया. पोटैशियम के इस्तेमाल में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जिप्सम के उपयोग तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों में कुछ हद तक वृद्धि देखी गई. यह उर्वरकों के संतुलित उपयोग की तरफ बढ़ने का सही संकेत है. धान में डीएपी में भारी कमी आई और कपास की खेती प्रति इकाई क्षेत्र की लागत में कमी आई है. इससे लागत में लगभग 4-10 प्रतिशत गिरावट देखी गई.

soil testing business, soil management, soil testing business plan, soil testing business for sale, soil testing services business, starting a soil testing business, गांव में रोजगार कैसे करें, गांवों में रोजगार, गांव में चलने वाला रोजगार, गांव में बिजनेस करने का तरीका, गांव में बिजनेस करने का तरीका, गांव में बिजनेस करने के तरीके, गांव में बिजनेस कैसे शुरू करें, गांव में बिजनेस करना, business news in hindi, agriculture ministry, modi government, Bio-fertilizers, किसानों को पता कि उनके खेत से सैंपल लिया
मिट्टी की जांच करवाकर किसान उत्पादन लागत कम कर सकते हैं (File Photo)


ऐसे करें शुरू- मिट्टी जांच प्रयोगशाला को दो तरीके से स्टार्ट किया जा सकता है. पहले तरीके में प्रयोगशाला एक दुकान किराये पर लेकर खोली जा सकती है. इसके अलावा दूसरी प्रयोगशाला ऐसी होती है जिसे इधर उधर ले जाया जा सकता है इसे अंग्रेजी में MOBILE SOIL TESTING VAN कहते हैं.

(1) पहले तरीके में कारोबारी ऐसी मिट्टी को जांचेगा जो उसकी प्रयोगशाला में किसी के द्वारा भेजी या लायी जाएगी और उसके बाद उसकी रिपोर्ट ईमेल या प्रिंट आउट लेकर ग्राहक को भेज दी जाएगी. हालांकि पहले की तुलना में दूसरा विकल्प काफी फायदेमंद हो सकता है, इसलिए जहां तक इसमें निवेश का भी सवाल है वह पहले विकल्प की तुलना में अधिक ही है.

 (2) मिट्टी जांच प्रयोगशाला में सेवाओं की एक विस्तृत शृंखला पेश की जा सकती है. इस बिज़नेस को कोराबारी छोटे से स्तर से शुरू कर सकता है और जब उसे पूरा आत्मविश्वास हो जाय तो इस बिज़नेस को उसी आधार पर बढ़ा भी सकता है.



ये भी पढ़ें:

युवा किसानों को तोहफा! यह बिज़नेस शुरू करने के लिए सरकार देगी 3.75 लाख रुपये, ऐसे उठाए फायदा

मिट्टी की जांच के लिए देश में बनेंगी 11 हजार प्रयोगशालाएं, किसानों को ये होगा फायदा
First published: February 19, 2020, 6:43 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading