मोदी सरकार ने बंद कीं 6 लाख से ज्यादा कंपनियां, संसद में दी जानकारी

बंद होने वाली कंपनियों की इस लिस्ट में सबसे ज्यादा शेल कंपनियां शामिल हैं. आपको बता दें कि मई 2019 तक भारत में रजिस्टर्ड 6 लाख 80 हजार से ज्यादा कंपनियां बंद हो चुकी हैं.

बंद होने वाली कंपनियों की इस लिस्ट में सबसे ज्यादा शेल कंपनियां शामिल हैं. आपको बता दें कि मई 2019 तक भारत में रजिस्टर्ड 6 लाख 80 हजार से ज्यादा कंपनियां बंद हो चुकी हैं.

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    नोटबंदी के बाद से भारत में बड़ी संख्या में कंपनियां बंद हुई हैं. बंद होने वाली कंपनियों की इस लिस्ट में सबसे ज्यादा शेल कंपनियां शामिल हैं. आपको बता दें कि मई 2019 तक भारत में रजिस्टर्ड 6 लाख 80 हजार से ज्यादा कंपनियां बंद हो चुकी हैं. बंद होने वाली कंपनियां कुल रजिस्टर्ड कंपनियों का 36 प्रतिशत हैं. सरकार के डाटा के मुताबिक देश में करीब 1.9 मिलियन कंपनियां रजिस्टर्ड हैं. ये जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर (MCA) ने संसद में दी है.

    दो वित्त वर्षों से अधिक तक वार्षिक रिटर्न नहीं फाइल करने वाली कंपनियां बंद  
    दरअसल, सरकार ने उन कंपनियों की पहचान करने और उन्हें बंद करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया है, जिन्होंने लगातार दो वित्त वर्षों से अधिक समय से वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं किए थे. यानी जिन कंपनियों की ओर से दो साल का फाइनेंशियल स्टेटमेंट और एनुअल रिटर्न नहीं दाखिल किया जाता है, उन्हें बंद कंपनी मान लिया जाता है.

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    सरकार ऐसी कंपनियों को चिह्नित करके उन्हें कंपनी एक्ट 2013 के सेक्शन 248 (1) के अंतर्गत आने वाले नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन रद कर दिया जाता है. साल 2017-18 में इसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.

    दिल्ली और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बंद हुई कंपनियां
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद को दी जानकारी के मुताबिक देश में रजिस्टर्ड कंपनियों के बंद होने के मामले में दिल्ली और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं. दिल्ली में जहां 142425 कंपनियां बंद हुईं, जबकि महाराष्ट्र में 125937 कंपनियां बंद हो गई हैं. दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में देश की आधे से ज्यादा बंद होने वाली कंपनियां शामिल हैं. एमसीए ने साल 2017-18 में करीब 2,20,000 कंपनियों को रजिस्ट्रेशन लिस्ट से हटा दिया था, जबकि साल 2018-19 में 110,000 कंपनियों को इस लिस्ट से हटा दिया गया था.

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